Middle East Crisis : अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) एचआर मैकमास्टर ने सऊदी अरब और पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंता जताई है। उनके मुताबिक, क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता का सीधा असर सऊदी अरब की आर्थिक महत्वाकांक्षाओं और विजन 2030 पर पड़ सकता है। मैकमास्टर ने कहा कि क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान जटिल भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
सुरक्षा मजबूत करने के लिए सऊदी ने बढ़ाए रिश्ते
मैकमास्टर के अनुसार, सऊदी अरब ने अपनी सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए मिस्र, तुर्किये और पाकिस्तान सहित कई देशों के साथ संबंध मजबूत किए हैं। सुरक्षा सहयोग से जुड़ी पहलों में मक्का पैक्ट का भी उल्लेख किया गया। हालांकि, उनका कहना है कि केवल सुरक्षा समझौते और रणनीतिक साझेदारियां पर्याप्त नहीं हैं। विजन 2030 के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए खाड़ी क्षेत्र में लंबे समय तक स्थिरता और सुरक्षित वातावरण बेहद महत्वपूर्ण है।
मक्का तक पहुंची हिंसा ने बढ़ाई चिंता
मैकमास्टर ने कहा कि मौजूदा खतरा केवल सऊदी अरब के आर्थिक और रणनीतिक बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, मक्का भी हमले की चपेट में आ चुका है, जिससे सुरक्षा को लेकर चिंता और गंभीर हो जाती है। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब का आर्थिक मॉडल ऐसे वातावरण पर निर्भर करता है, जहां निवेश, कारोबार और लोगों की आवाजाही के लिए पर्याप्त सुरक्षा और स्थिरता मौजूद हो।
वित्तीय केंद्र बनने के लिए सुरक्षा जरूरी
मैकमास्टर ने सऊदी अरब की महत्वाकांक्षाओं को सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि देश खुद को वैश्विक वित्तीय केंद्र के रूप में विकसित करना चाहता है। इसके अलावा कंप्यूटिंग पावर, डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में भी बड़ी भूमिका हासिल करना चाहता है। ऐसे में निवेशकों और कंपनियों के लिए भरोसेमंद सुरक्षा व्यवस्था जरूरी होगी। इसी संदर्भ में उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में सऊदी नेतृत्व अपनी सुरक्षा की गारंटी को लेकर किस पर भरोसा करेगा।
अमेरिका की सुरक्षा प्रतिबद्धता पर संदेह
पूर्व अमेरिकी सुरक्षा सलाहकार ने यह भी कहा कि रियाद के मन में अमेरिका की दीर्घकालिक सुरक्षा प्रतिबद्धताओं को लेकर कुछ संदेह हो सकता है। उनके मुताबिक, अमेरिका के साथ युद्धविराम और समझौतों जैसी परिस्थितियां सामने आती रही हैं। उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ट्रंप कठिन और जोखिम वाले फैसले लेने के लिए तैयार रहते हैं, लेकिन उनकी सोच में यह बात भी शामिल है कि सहयोगी देशों को अपनी सुरक्षा के लिए खुद भी अधिक जिम्मेदारी उठानी चाहिए।
ईरान पर खाड़ी देशों को बांटने का आरोप
मैकमास्टर ने ईरान पर खाड़ी देशों की सुरक्षा चिंताओं का फायदा उठाकर उनके बीच मतभेद बढ़ाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, ईरान अलग-अलग समय पर अलग-अलग खाड़ी देशों को निशाना बनाकर क्षेत्रीय एकजुटता कमजोर करने की कोशिश कर सकता है। उन्होंने हालिया हमलों का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी समय सऊदी अरब को निशाना बनाया जाता है, जबकि संयुक्त अरब अमीरात या कतर को नहीं, तो इससे खाड़ी देशों के बीच साझा सुरक्षा प्रतिक्रिया प्रभावित हो सकती है।
विजन 2030 के लिए स्थिरता सबसे अहम
सऊदी अरब का विजन 2030 तेल आधारित अर्थव्यवस्था की निर्भरता कम करके वित्त, तकनीक, पर्यटन, एआई और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। मैकमास्टर के आकलन के अनुसार, इन लक्ष्यों के लिए सिर्फ निवेश और आर्थिक संसाधन पर्याप्त नहीं होंगे। क्षेत्रीय शांति, राजनीतिक स्थिरता और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था भी आवश्यक होगी। लगातार संघर्ष की स्थिति में बड़े निवेश और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए जोखिम बढ़ सकते हैं।
हूतियों की बढ़ती ताकत भी बनी चुनौती
मैकमास्टर ने हूती समूह की बढ़ती सैन्य क्षमता को भी सऊदी अरब के लिए चुनौती के रूप में देखा। पिछले कुछ वर्षों में हूतियों ने अपनी क्षमता बढ़ाई है और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हुई है। ऐसे में सऊदी अरब के सामने एक साथ आर्थिक बदलाव और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की स्थिति बनी हुई है। खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता अब सऊदी अरब के आर्थिक भविष्य और विजन 2030 की प्रगति से भी जुड़ती दिखाई दे रही है।
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