Middle East Crisis : यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने रियाद की सुरक्षा को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कहा है कि सऊदी अरब और दोनों पवित्र स्थलों की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान किसी भी हद तक जाने को तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्लामाबाद जरूरत पड़ने पर सऊदी अरब को कूटनीतिक और भौतिक, दोनों स्तरों पर समर्थन देगा।
मक्का के पास हूती ड्रोन को इंटरसेप्ट करने का दावा
पाकिस्तान का यह बयान उस घटनाक्रम के बाद आया है, जब सऊदी अरब ने मक्का के दक्षिण में एक हूती ड्रोन को नष्ट करने की जानकारी दी थी। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के मुताबिक ड्रोन को पवित्र शहर के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही रोक दिया गया। रियाद ने मक्का की सुरक्षा को बेहद संवेदनशील मुद्दा बताते हुए हूती हमलों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है।
हूतियों ने मक्का को निशाना बनाने से किया इनकार
वहीं, हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने मक्का को निशाना बनाने के सऊदी आरोप को खारिज किया है। हूती पक्ष का कहना है कि उसके सैन्य अभियान सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों और सैन्य ठिकानों पर केंद्रित हैं, न कि इस्लाम के पवित्र स्थलों पर। इस तरह मक्का के पास ड्रोन घटना को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।
क्या है पाकिस्तान, सऊदी और तुर्किये का मक्का समझौता
इस घटनाक्रम के बीच चर्चा पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते की भी हो रही है। तीनों देशों ने 7 अगस्त 2026 को मक्का में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के अनुसार तीनों देशों में से किसी एक पर बाहरी सशस्त्र हमला होने की स्थिति में उसे सभी पर हमला माना जाएगा। इसका उद्देश्य सामूहिक सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करना बताया गया है।
पाकिस्तान ने समझौते को बताया रक्षात्मक व्यवस्था
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि मक्का समझौता प्रकृति में रक्षात्मक है और किसी देश के खिलाफ लक्षित नहीं है। आधिकारिक बयान के अनुसार इसका उद्देश्य बाहरी आक्रमण के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोध क्षमता बढ़ाना और तीनों देशों की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा में सहयोग मजबूत करना है। समझौते को संयुक्त आत्मरक्षा के अधिकार से भी जोड़ा गया है।
रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी दोहराई प्रतिबद्धता
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ भी कह चुके हैं कि मक्का समझौता पाकिस्तान पर लागू होता है और देश अपनी जिम्मेदारी निभाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिमों के पवित्र स्थलों की सुरक्षा पाकिस्तान की जिम्मेदारी समझौते से अलग भी है। हालांकि, उन्होंने संभावित सैन्य कार्रवाई की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने से इनकार किया है।
सैन्य प्रतिक्रिया पर अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं
पाकिस्तानी सेना की ओर से सऊदी अरब के समर्थन को लेकर बयान स्पष्ट है, लेकिन किसी संभावित सैन्य कार्रवाई की प्रकृति या समयसीमा सार्वजनिक नहीं की गई है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, समझौते के तहत किसी हमले की स्थिति में तीनों देशों के बीच प्रतिक्रिया को लेकर समन्वय जरूरी होगा। इसलिए मक्का के पास हुई ड्रोन घटना के बाद समझौते की व्यावहारिक भूमिका को लेकर क्षेत्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
7 अगस्त को मक्का में हुआ था रक्षा समझौता
मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 7 अगस्त को हस्ताक्षर किए थे। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार समझौता तीनों देशों के बीच सामूहिक सुरक्षा, रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है।
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