Chia Seeds Farming : बदलते समय के साथ किसानों का रुझान पारंपरिक फसलों से आगे बढ़कर ऐसी फसलों की ओर भी बढ़ रहा है, जिनकी बाजार में अच्छी मांग है और जिन्हें सीमित जमीन में उगाया जा सकता है। चिया सीड्स भी ऐसी ही फसल है। हेल्दी डाइट, फिटनेस और न्यूट्रिशन से जुड़े उत्पादों में चिया सीड्स का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। इसी वजह से किसानों के लिए इसकी खेती अतिरिक्त आमदनी का विकल्प बन सकती है।
कम पानी में हो सकती है चिया की खेती
चिया को ऐसी फसल माना जाता है, जिसमें बहुत अधिक पानी की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि, बेहतर पैदावार के लिए खेत की तैयारी, बुवाई का सही समय और फसल प्रबंधन पर ध्यान देना जरूरी है। खासकर पहली बार चिया की खेती करने वाले किसानों को अपने क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के अनुसार कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेना उपयोगी हो सकता है।
खेत तैयार करते समय इन बातों का रखें ध्यान
चिया की खेती शुरू करने से पहले खेत को अच्छी तरह तैयार करना जरूरी है। इसके लिए खेत की जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा किया जा सकता है। खेत में बारिश या सिंचाई का पानी लंबे समय तक जमा नहीं होना चाहिए। मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए आवश्यकता के अनुसार अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या जैविक खाद का इस्तेमाल किया जा सकता है।
छोटे बीजों की बुवाई में रखें सावधानी
चिया के बीज आकार में काफी छोटे होते हैं, इसलिए इन्हें मिट्टी में ज्यादा गहराई तक नहीं डालना चाहिए। किसान इन्हें खेत में छिड़ककर या निर्धारित दूरी पर लाइन बनाकर बो सकते हैं। लाइन में बुवाई करने से आगे चलकर निराई-गुड़ाई और पौधों की देखभाल आसान रहती है। यदि बुवाई के समय मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं है, तो जरूरत के मुताबिक हल्की सिंचाई की जा सकती है।
मौसम के अनुसार तय करें बुवाई का समय
चिया की बुवाई का उपयुक्त समय क्षेत्र की जलवायु के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए किसान अपने जिले के कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विशेषज्ञ से स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से जानकारी लेकर ही बुवाई करें। सही समय पर बुवाई करने से पौधों की शुरुआती वृद्धि और उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
जरूरत से ज्यादा सिंचाई से बचना जरूरी
चिया को कम पानी वाली फसल माना जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सिंचाई की आवश्यकता बिल्कुल नहीं होती। फसल को मौसम, मिट्टी और पौधों की जरूरत के अनुसार पानी देना चाहिए। खेत में लंबे समय तक पानी जमा रहने से पौधों को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए जरूरत से ज्यादा सिंचाई करने से बचना जरूरी है।
खरपतवार और कीटों पर रखें नजर
फसल की शुरुआती अवस्था में खेत की सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। पौधों के आसपास अधिक खरपतवार होने पर उनकी वृद्धि प्रभावित हो सकती है। समय-समय पर खरपतवार हटाने के साथ पौधों के बीच उचित दूरी बनाए रखना भी जरूरी है। यदि पत्तियों या पौधों पर कीट अथवा बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो किसी दवा का इस्तेमाल खुद करने के बजाय कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
फरवरी-मार्च में हो सकती है चिया की कटाई
जब चिया की फसल पककर तैयार होने लगती है तो पौधों का रंग हल्का भूरा पड़ने लगता है और बीज सख्त हो जाते हैं। इसे कटाई का उपयुक्त समय माना जाता है। आमतौर पर इसकी कटाई फरवरी से मार्च के दौरान की जाती है। कटाई के बाद बीजों को सावधानीपूर्वक सुखाकर अलग किया जाता है, ताकि उनकी गुणवत्ता बनी रहे।
एक एकड़ में लागत और संभावित आमदनी
दिए गए आंकड़ों के अनुसार, एक एकड़ में चिया सीड्स की खेती पर करीब 10,000 से 15,000 रुपये तक खर्च आ सकता है। एक एकड़ से लगभग 4 से 6 क्विंटल तक उत्पादन मिलने का दावा किया गया है। थोक बाजार में कीमत 20,000 से 30,000 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास बताई गई है। इस हिसाब से सकल आमदनी करीब 80,000 से 1.8 लाख रुपये के बीच हो सकती है। वास्तविक कमाई उत्पादन, गुणवत्ता, बाजार भाव और स्थानीय लागत पर निर्भर करेगी।
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