Balrampur Teacher : छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से शिक्षकों के समर्पण की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो बारिश के मौसम में ग्रामीण इलाकों की कठिन परिस्थितियों को दिखाती है। वाड्रफनगर ब्लॉक के धौरपुर गांव में पदस्थ दो महिला शिक्षक स्कूल पहुंचने के लिए हर दिन मुश्किल सफर तय करती हैं। बारिश में रास्ता खराब होने के कारण उन्हें अपनी स्कूटी छोड़कर करीब 3 किलोमीटर तक पहाड़ी और पथरीले रास्ते पर पैदल चलना पड़ता है। इसके बाद उन्हें उफनती नदी पार करके स्कूल तक पहुंचना होता है।
9 महीने की बच्ची को गोद में लेकर नदी पार
इन दोनों शिक्षिकाओं में कर्मिला टोप्पो की कहानी विशेष रूप से सामने आई है। वह अपनी 9 महीने की बच्ची को गोद में लेकर नदी पार करती हैं। कई बार नदी का पानी कमर तक पहुंच जाता है और जलस्तर इससे भी ऊपर होने की स्थिति बन जाती है। इसके बावजूद वह बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए स्कूल पहुंचने का प्रयास करती हैं।
धौरपुर गांव बारिश में हो जाता है लगभग अलग-थलग
यह पूरा मामला वाड्रफनगर ब्लॉक के धौरपुर गांव का है। धौरपुर बस्ती मोरन और इरिया नदियों के संगम के आगे स्थित बताई गई है। मानसून के दौरान दोनों नदियों में जलस्तर बढ़ने के बाद गांव तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता है। कई बार यह क्षेत्र आसपास के इलाकों से लगभग कट जाता है। बारिश के दिनों में सामान्य वाहन भी गांव तक नहीं पहुंच पाते।
मरना में स्कूटी छोड़कर पैदल चलती हैं शिक्षिकाएं
शिक्षिका संध्या हलदार के मुताबिक, दोनों शिक्षक अपनी स्कूटी मरना नाम की जगह पर खड़ी कर देती हैं। इसके बाद करीब तीन किलोमीटर का रास्ता उन्हें पैदल तय करना पड़ता है। यह रास्ता पहाड़ी और पथरीला है। पैदल यात्रा पूरी करने के बाद दोनों को नदी पार करनी होती है और फिर स्कूल पहुंचना संभव होता है।
जलस्तर बढ़ने पर वापस लौटना पड़ता है
संध्या हलदार ने बताया कि जब नदी में पानी कम होता है तो वे किसी तरह उसे पार कर स्कूल पहुंच जाती हैं। लेकिन बारिश ज्यादा होने और जलस्तर बढ़ने पर नदी पार करना संभव नहीं रहता। ऐसे हालात में उन्हें रास्ते से ही वापस लौटना पड़ता है। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों की शिक्षा को लेकर उन्हें चिंता रहती है और बच्चों का उन्हें देखकर खुश होना उन्हें लगातार प्रयास करने की प्रेरणा देता है।
2014 से स्कूल में तैनात हैं कर्मिला टोप्पो
कर्मिला टोप्पो वर्ष 2014 से इसी स्कूल में पदस्थ हैं। उन्होंने बताया कि हर साल मानसून के दौरान उन्हें ऐसी ही परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। प्रशासन की ओर से अधिक पानी होने पर नदी पार नहीं करने की सलाह भी दी जाती है। इसके बावजूद परिस्थितियां अनुकूल होने पर वह बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल पहुंचने की कोशिश करती हैं।
खबर सामने आने के बाद कलेक्टर को मिली जानकारी
शिक्षिकाओं की इस मुश्किल यात्रा की जानकारी बलरामपुर कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी तक भी पहुंची। कलेक्टर के मुताबिक, उन्हें इस बारे में समाचार रिपोर्ट के जरिए जानकारी मिली। उन्होंने बताया कि उन्हें पता चला कि एक शिक्षिका अपने छोटे बच्चे को साथ लेकर नदी पार करती हैं और बारिश के बावजूद करीब तीन किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचती हैं।
कलेक्टर ने शिक्षिका के समर्पण की सराहना की
कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने कर्मिला टोप्पो के कर्तव्य के प्रति समर्पण और मेहनत की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे शिक्षक अपने दायित्व के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण पेश करते हैं। धौरपुर में बारिश के दौरान स्कूल तक पहुंचना जहां आम लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण है, वहीं दोनों शिक्षिकाओं के लिए बच्चों की पढ़ाई जारी रखने की कोशिश का हिस्सा बन गया है।
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