CBFC New Rules 2026 : भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी CBFC को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। केंद्र सरकार ने 16 सितंबर 2026 को CBFC का 18 सदस्यों के साथ पुनर्गठन किया। नई सूची में पंकज त्रिपाठी, सुनील शेट्टी, प्रीति जिंटा, रूपाली गांगुली, प्रसूनजीत चटर्जी, प्रियदर्शन और अन्य प्रमुख नाम शामिल हैं। इसके दो दिन बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए फिल्मों के प्रमाणन की संशोधित गाइडलाइंस जारी कर दीं।
1991 की पुरानी गाइडलाइंस की जगह नया फ्रेमवर्क
मंत्रालय के अनुसार नई गाइडलाइंस लंबे समय से लागू पुराने प्रमाणन दिशानिर्देशों को अपडेट करती हैं। इसका उद्देश्य फिल्मों के कंटेंट का मूल्यांकन मौजूदा सामाजिक परिस्थितियों और प्रमाणन व्यवस्था के अनुरूप करना है। नए फ्रेमवर्क में फिल्म के विषय, संदर्भ, प्रस्तुति और दर्शकों पर संभावित प्रभाव को ध्यान में रखने पर जोर दिया गया है। इस बदलाव के साथ उम्र आधारित प्रमाणन व्यवस्था को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।
फिल्मों में ड्रग्स दिखाने पर जरूरी होगी चेतावनी
नई गाइडलाइंस में नशीले और साइकोट्रोपिक पदार्थों से संबंधित कंटेंट पर विशेष ध्यान दिया गया है। यदि किसी फिल्म में ड्रग्स का सेवन, इस्तेमाल या तस्करी दिखाई जाती है, तो निर्धारित वैधानिक चेतावनी दिखाना जरूरी होगा। इसका उद्देश्य दर्शकों, खासकर युवा वर्ग को नशीले पदार्थों के नुकसान और उनसे जुड़े कानूनी परिणामों के बारे में जागरूक करना है। ड्रग्स से जुड़े दृश्यों को फिल्म के संदर्भ और प्रस्तुति के आधार पर प्रमाणन प्रक्रिया में देखा जाएगा।
UA फिल्मों के लिए तीन उम्र आधारित कैटेगरी
फिल्म प्रमाणन व्यवस्था में अब U और A के साथ UA की उम्र आधारित श्रेणियां भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनमें UA 7+, UA 13+ और UA 16+ शामिल हैं। इन मार्करों का इस्तेमाल यह बताने के लिए किया जाता है कि किसी फिल्म में ऐसा कंटेंट हो सकता है, जिसे कम उम्र के बच्चों के लिए अभिभावकीय विवेक के साथ देखा जाना चाहिए। CBFC पहले ही इन आयु-आधारित मार्करों को लागू कर चुका है और 2026 की संशोधित गाइडलाइंस में इन्हें प्रमाणन ढांचे के हिस्से के रूप में शामिल किया गया है।
हिंसा और अपराध के चित्रण पर भी नियम
नई व्यवस्था में हिंसा और अपराध को फिल्म में किस तरह प्रस्तुत किया गया है, इस पर भी ध्यान दिया जाएगा। समाज-विरोधी गतिविधियों या हिंसक व्यवहार को इस तरह पेश करने से बचने पर जोर है, जिससे वह आकर्षक या उचित प्रतीत हो। बच्चों के साथ दुर्व्यवहार, जानवरों के प्रति क्रूरता और दिव्यांग व्यक्तियों से जुड़े संवेदनशील दृश्यों को भी प्रमाणन के दौरान संदर्भ के साथ देखा जाएगा।
यौन हिंसा और संवेदनशील विषयों पर भी नजर
संशोधित गाइडलाइंस में यौन हिंसा, सांप्रदायिक भावनाओं, राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और देश से जुड़े संवेदनशील विषयों को लेकर भी प्रावधानों पर जोर दिया गया है। किसी फिल्म के दृश्य को केवल अलग-अलग देखकर निर्णय लेने के बजाय उसके पूरे संदर्भ, कहानी, समयकाल और प्रस्तुति को ध्यान में रखने की व्यवस्था पर बल दिया गया है।
बदलते समय के अनुरूप प्रमाणन व्यवस्था
सरकार की संशोधित गाइडलाइंस का व्यापक उद्देश्य फिल्म प्रमाणन व्यवस्था को वर्तमान सामाजिक और कानूनी मानकों के अनुरूप बनाना है। उम्र आधारित UA मार्कर पहले से लागू होने के बावजूद अब उन्हें संशोधित दिशानिर्देशों में स्पष्ट स्थान मिला है। इससे फिल्म निर्माताओं और दर्शकों को कंटेंट की प्रकृति और उपयुक्त आयु वर्ग को समझने में मदद मिल सकती है। CBFC का नया बोर्ड भी तीन वर्ष या अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा।
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