TMC Symbol Freeze : तृणमूल कांग्रेस के नाम और पारंपरिक चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के उस अंतरिम फैसले को चुनौती दी है, जिसमें ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल एवं घास’ वाले आरक्षित चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। यह विवाद पार्टी के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच संगठनात्मक नियंत्रण और पार्टी की पहचान को लेकर है।
कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में उठाया मामला
सोमवार को वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने ममता बनर्जी की याचिका का सुप्रीम कोर्ट में उल्लेख करते हुए मामले की जल्द सुनवाई की मांग की। उन्होंने अदालत के सामने चुनाव आयोग की कार्रवाई के समय को लेकर सवाल उठाया। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले को जल्द सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सुनवाई के दौरान दूसरे पक्ष को अपनी दलील रखने का अवसर मिलेगा।
जून से चल रही थी चुनाव आयोग में सुनवाई
कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि चुनाव आयोग में इस विवाद की सुनवाई जून से शुरू हुई थी। उनके अनुसार, ममता बनर्जी के गुट ने जुलाई में आयोग के सामने अपना विस्तृत जवाब दाखिल किया था। सिब्बल ने कहा कि इसके बाद काफी समय तक आयोग की ओर से कोई अंतिम निर्णय नहीं आया। उन्होंने यह भी बताया कि नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को फ्रीज करने का अंतरिम आदेश आया।
6 अक्टूबर के उपचुनाव से पहले बढ़ा विवाद
नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 6 अक्टूबर को होने हैं। ऐसे में चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले का सीधा असर दोनों गुटों की चुनावी पहचान पर पड़ता है। आयोग ने दोनों पक्षों को मूल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल एवं घास’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल से रोक दिया है। अंतिम निर्णय होने तक दोनों गुटों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह की अंतरिम व्यवस्था की गई है।
ममता गुट को मिला नया नाम और चुनाव चिन्ह
चुनाव आयोग की अंतरिम व्यवस्था के तहत ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम दिया गया है। इसके साथ इस गुट को ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है। आयोग के अनुसार यह व्यवस्था आगामी उपचुनावों के लिए अंतरिम तौर पर लागू रहेगी। इस फैसले के बाद ममता गुट ने मूल पार्टी नाम और चिन्ह को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
दूसरे गुट को मिला ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’
चुनाव आयोग ने दूसरे प्रतिद्वंद्वी गुट के लिए ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया है। यह फैसला उस स्थिति में लिया गया है, जब दोनों पक्षों ने तृणमूल कांग्रेस के नाम, चुनाव चिन्ह और संगठनात्मक नियंत्रण पर अपना दावा पेश किया था। आयोग ने अंतिम तौर पर विवाद का निपटारा करने के बजाय फिलहाल उपचुनावों को ध्यान में रखते हुए अंतरिम व्यवस्था लागू की है।
संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर आमने-सामने गुट
विवाद केवल पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह तक सीमित नहीं है। दोनों गुट संगठनात्मक ढांचे और पार्टी पर नियंत्रण को लेकर भी अलग-अलग दावे कर रहे हैं। प्रतिद्वंद्वी गुट की ओर से मौजूदा संगठनात्मक ढांचे की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं, जबकि ममता बनर्जी के गुट ने इन दावों को चुनौती दी है। इसी विवाद के बाद मामला चुनाव आयोग के समक्ष पहुंचा और आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अंतरिम आदेश जारी किया।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी नजरें
अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली आगामी सुनवाई इस विवाद के अगले चरण के लिए महत्वपूर्ण होगी। ममता बनर्जी गुट ने चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश को चुनौती देते हुए मूल पार्टी नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर राहत मांगी है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की वर्तमान व्यवस्था के तहत दोनों गुट 6 अक्टूबर के उपचुनावों में अलग-अलग नाम और चिन्ह के साथ मैदान में उतरेंगे। अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सामने आने के बाद मामले की आगे की कानूनी दिशा स्पष्ट होगी।
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