Tomato and Kidney Stone : टमाटर हमारी रोजमर्रा की डाइट का अहम हिस्सा है और इसमें कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। सलाद से लेकर सब्जी और सॉस तक, इसका इस्तेमाल कई तरह से किया जाता है। हालांकि, टमाटर और खासकर इसके बीजों को लेकर लंबे समय से यह धारणा चली आ रही है कि इन्हें खाने से किडनी में पथरी बनने या पहले से मौजूद स्टोन के बढ़ने का खतरा रहता है। इसी भ्रम को लेकर सर्टिफाइड न्यूट्रिशनिस्ट और वेट लॉस स्पेशलिस्ट लीमा महाजन ने टमाटर और किडनी स्टोन के संबंध को समझाया है।
टमाटर में कितनी मात्रा में होता है ऑक्सलेट?
लीमा महाजन के अनुसार, टमाटर खाने से किडनी स्टोन होने की बात एक आम मिथक है। उनके मुताबिक टमाटर में ऑक्सलेट की मात्रा बहुत कम होती है। एक सामान्य टमाटर में करीब 6 से 7 मिलीग्राम ऑक्सलेट पाया जाता है। इसकी तुलना में एक कप पालक में लगभग 750 मिलीग्राम ऑक्सलेट हो सकता है। इसलिए ऑक्सलेट की मात्रा के लिहाज से टमाटर को पालक जैसे हाई-ऑक्सलेट फूड्स की श्रेणी में रखना सही नहीं होगा।
क्या टमाटर के बीज भी नुकसानदायक हैं?
टमाटर के बीजों को लेकर भी लोगों के मन में कई तरह की शंकाएं रहती हैं। आम धारणा है कि बीज किडनी में जमा होकर स्टोन का कारण बन सकते हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार सामान्य मात्रा में टमाटर या उसके बीजों का सेवन किडनी स्टोन का सीधा कारण नहीं माना जाता। इसलिए केवल पथरी के डर से टमाटर के बीज निकालकर खाना जरूरी नहीं है। फिर भी जिन लोगों को बार-बार पथरी होती है, उन्हें अपनी व्यक्तिगत डाइट के लिए डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लेनी चाहिए।
टमाटर में मौजूद सिट्रेट कैसे करता है मदद?
टमाटर में सिट्रेट भी पाया जाता है, जिसे किडनी स्टोन से जुड़ी प्रक्रिया में उपयोगी माना जाता है। सिट्रेट पेशाब में कैल्शियम के साथ जुड़कर कैल्शियम ऑक्सलेट क्रिस्टल बनने की प्रक्रिया को कम करने में मदद कर सकता है। इसी वजह से टमाटर को केवल पथरी बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ के तौर पर देखना सही नहीं है। हालांकि, किडनी स्टोन कई कारणों से हो सकता है और केवल किसी एक खाद्य पदार्थ को इसका जिम्मेदार मानना उचित नहीं है।
किन खाद्य पदार्थों में ऑक्सलेट ज्यादा होता है?
किडनी स्टोन की समस्या से जूझ रहे लोगों को अपनी डाइट पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है। हाई-ऑक्सलेट खाद्य पदार्थों में पालक, बादाम, चॉकलेट और चुकंदर जैसे फूड शामिल किए जाते हैं। ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन अपनी जरूरत और डॉक्टर की सलाह के अनुसार सीमित किया जा सकता है। खासकर बार-बार कैल्शियम ऑक्सलेट स्टोन बनने वाले लोगों को अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहता है।
ऑक्सलेट फूड के साथ कैल्शियम क्यों जरूरी?
यदि डाइट में ऑक्सलेट युक्त खाद्य पदार्थ शामिल किए जाते हैं, तो उनके साथ कैल्शियम युक्त भोजन लेना कुछ लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है। दही, पनीर और रागी जैसे कैल्शियम वाले खाद्य पदार्थ भोजन का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। भोजन में मौजूद कैल्शियम आंतों में ऑक्सलेट के साथ जुड़ सकता है, जिससे शरीर में ऑक्सलेट के अवशोषण को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, कैल्शियम की मात्रा व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करती है।
पर्याप्त पानी पीना है सबसे जरूरी
किडनी स्टोन से बचाव में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। पर्याप्त पानी पीने से पेशाब पतला रहता है और पथरी बनाने वाले कुछ पदार्थों के क्रिस्टल बनने की संभावना कम हो सकती है। इसके साथ ही भोजन में नमक की मात्रा कम रखना भी जरूरी है। अगर किसी व्यक्ति को बार-बार किडनी स्टोन होता है, पेशाब में खून आता है या तेज दर्द की शिकायत रहती है, तो घरेलू उपायों के बजाय चिकित्सकीय जांच और विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।
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