UNSC Reform : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में सुधार को लेकर भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान के समूह G4 ने एक बार फिर दबाव बढ़ाया है। चारों देशों ने सुरक्षा परिषद में जल्द और व्यापक सुधार लागू करने की मांग की है। G4 का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और बदलती भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को देखते हुए सुरक्षा परिषद की संरचना में बदलाव जरूरी है।
न्यूयॉर्क में हुई G4 विदेश मंत्रियों की बैठक
G4 देशों के विदेश मंत्रियों की 22 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र से इतर बैठक हुई। इसमें भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर, ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा, जर्मनी के विदेश मंत्री योहान डेविड वाडेफुल और जापान के विदेश मंत्री मोतोगी तोशिमित्सु शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता एस. जयशंकर ने की। बैठक के बाद चारों देशों ने संयुक्त मंत्रिस्तरीय बयान जारी किया।
आठ दशक पुरानी संरचना पर G4 ने उठाए सवाल
G4 ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मौजूदा व्यवस्था को करीब आठ दशक पुरानी संरचना के रूप में रेखांकित किया। समूह के अनुसार, दुनिया की राजनीतिक और रणनीतिक परिस्थितियां 1945 के दौर की तुलना में काफी बदल चुकी हैं। ऐसे में सुरक्षा परिषद की संरचना में मौजूदा वैश्विक वास्तविकताओं को अधिक प्रभावी ढंग से प्रतिबिंबित करने की जरूरत है।
स्थायी और अस्थायी दोनों सीटें बढ़ाने की मांग
G4 ने UNSC में सदस्य देशों की संख्या बढ़ाने की अपनी मांग दोहराई है। समूह चाहता है कि सुधार प्रक्रिया में स्थायी और गैर-स्थायी यानी अस्थायी, दोनों श्रेणियों में सदस्यता का विस्तार किया जाए। G4 लंबे समय से सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने और विभिन्न क्षेत्रों की भागीदारी बढ़ाने की वकालत करता रहा है।
प्रतिनिधित्व और वैधता पर भी जोर
संयुक्त बयान में G4 देशों ने सुरक्षा परिषद की प्रतिनिधित्व क्षमता, वैधता, विश्वसनीयता और प्रभावशीलता से जुड़े सवालों को उठाया। उनका तर्क है कि मौजूदा सदस्यता संरचना बदलती अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के अनुरूप पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं देती। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने भी 81वें महासभा सत्र के उद्घाटन में सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत का उल्लेख किया और अफ्रीका की स्थायी प्रतिनिधित्व की अनुपस्थिति पर सवाल उठाया।
सुधार प्रक्रिया में ठोस बातचीत की मांग
G4 ने केवल सुधार की मांग ही नहीं दोहराई, बल्कि वार्ता को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया है। समूह का कहना है कि लंबे समय से चल रही अंतर-सरकारी वार्ताओं को ठोस परिणामों की दिशा में ले जाने की जरूरत है। G4 पहले भी टेक्स्ट-बेस्ड नेगोशिएशन शुरू करने और सुधार प्रक्रिया में स्पष्ट प्रगति की मांग करता रहा है।
भारत की भूमिका पर टिकी निगाहें
UNSC सुधार भारत की विदेश नीति के प्रमुख बहुपक्षीय मुद्दों में शामिल रहा है। G4 के मंच के जरिए भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान सुरक्षा परिषद के विस्तार के लिए साझा रुख रखते हैं। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौजूदा सत्र के दौरान इस मुद्दे पर भारत की गतिविधियों और एस. जयशंकर के आगामी संबोधन पर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है।
आगे की राह में बनी रहेगी चुनौती
UNSC सुधार पर G4 की मांग के बावजूद अंतिम बदलाव के लिए संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के बीच व्यापक सहमति और औपचारिक प्रक्रिया की जरूरत होगी। सुरक्षा परिषद की सदस्यता, स्थायी सीटों, गैर-स्थायी सीटों और अन्य सुधारों को लेकर विभिन्न देशों और समूहों के अलग-अलग प्रस्ताव हैं। इसलिए आने वाली वार्ताओं में इन मतभेदों के बीच सहमति बनाने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
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