Gyanesh Kumar Controversy : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भारतीय चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची से जुड़े ECINet सॉफ्टवेयर को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने 24 सितंबर को प्रकाशित इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए गोवा में 97 पात्र मतदाताओं के नाम अंतिम सूची में शामिल नहीं होने का मुद्दा उठाया। रिपोर्ट के मुताबिक, गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने इन मतदाताओं के नाम दोबारा शामिल करने के लिए सात दिनों में आठ बार चुनाव आयोग को ईमेल भेजे थे।
ERO ने 97 मतदाताओं को पाया था पात्र
रिपोर्ट के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान कुछ मतदाताओं के नाम ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के आधार पर चिन्हित किए गए थे। इसके बाद गोवा के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों यानी EROs ने दस्तावेजों और आपत्तियों की जांच की। 97 मामलों में अधिकारियों ने संबंधित मतदाताओं को अंतिम मतदाता सूची में शामिल किए जाने योग्य माना। हालांकि, ECINet में नाम दोबारा शामिल करने के लिए जरूरी सुविधा उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई।
सात दिनों में आठ ईमेल का मामला
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 11 से 17 फरवरी के बीच गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने इस मुद्दे पर कई बार चुनाव आयोग के अधिकारियों से संपर्क किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईमेल में पहले हटाए गए नामों को ERO के निर्णय के आधार पर वापस शामिल करने के लिए सिस्टम में जरूरी विकल्प उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। अंतिम मतदाता सूची 21 फरवरी को प्रकाशित हुई, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार 20 सितंबर तक इन 97 नामों को सूची में शामिल नहीं किया गया था।
जयराम रमेश ने पूरे SIR पर उठाए सवाल
जयराम रमेश ने इस रिपोर्ट को चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जोड़ते हुए SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से जुड़े महत्वपूर्ण कामों में ECINet की भूमिका बढ़ने से जमीनी स्तर के निर्वाचन अधिकारियों की भूमिका प्रभावित हो रही है। रमेश ने दावा किया कि इससे मतदाता सूची तैयार करने और उसमें नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल पैदा हुए हैं।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का भी जिक्र
कांग्रेस नेता ने इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट का भी हवाला दिया जिसमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से पिछले 10 महीनों में दर्ज की गई आपत्तियों का उल्लेख था। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने मतदाता सूची, नए मतदाताओं के पंजीकरण और चुनावी डेटा तक पहुंच से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर लिखित चिंताएं जताई थीं।
Form 6 में बदलाव को लेकर भी विवाद
रमेश ने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 को लेकर भी सवाल उठाए। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, Form 6 में SIR से संबंधित एक सवाल जोड़े जाने पर दोनों चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट में बताया गया कि इस बदलाव को लेकर यह सवाल उठा कि क्या मौजूदा नियमों के तहत फॉर्म में ऐसा परिवर्तन किया जा सकता है।
चुनाव आयोग ने अपने फैसलों को बताया सर्वसम्मत
इन आरोपों और आंतरिक आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने अपना पक्ष रखा। आयोग ने कहा कि आंतरिक चर्चाओं के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां किसी भी संस्थान की निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार, पिछले एक वर्ष में लिए गए संबंधित निर्णय पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत फैसलों का परिणाम रहे हैं।
जयराम रमेश ने CEC से इस्तीफे की मांग की
जयराम रमेश ने अपने बयान में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा देने की मांग भी की। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री को भी जवाबदेह ठहराने की बात कही। ये आरोप कांग्रेस नेता के राजनीतिक दावे हैं; चुनाव आयोग ने अपनी प्रतिक्रिया में निर्णयों को सर्वसम्मत बताया है। ऐसे में ECINet, SIR और मतदाता सूची से जुड़े विवादों पर आगे की संस्थागत और कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
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