World Rabies Day 2026: विश्व रेबीज दिवस 2026 पर जानें बचाव, टीकाकरण और समय पर इलाज क्यों जरूरी है

World Rabies Day 2026 पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ रेबीज से बचाव के लिए जागरूकता, टीकाकरण और समय पर चिकित्सा सलाह की जरूरत पर जोर देते हैं। जानवर के काटने या खरोंच के बाद देरी करना जोखिम बढ़ा सकता है। ऐसे में घाव की तुरंत सफाई और चिकित्सकीय सलाह लेना बेहद जरूरी माना जाता है।

World Rabies Day 2026 : 28 सितंबर को विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर आम नागरिकों को इस गंभीर और जानलेवा बीमारी के प्रति जागरूक रहने की अपील की गई। पशुधन विकास विभाग, अंबिकापुर के अतिरिक्त उप संचालक डॉ. सी.के. मिश्रा ने पालतू एवं जोखिम वाले पशुओं का नियमित टीकाकरण कराने तथा किसी पशु के काटने या खरोंचने के बाद बिना देरी चिकित्सकीय उपचार लेने की सलाह दी है।

ads

हर साल 28 सितंबर को मनाया जाता है दिवस

विश्व रेबीज दिवस प्रत्येक वर्ष 28 सितंबर को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य रेबीज के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना और इस बीमारी से होने वाली मौतों को रोकने के लिए जनभागीदारी को प्रोत्साहित करना है। 28 सितंबर महान वैज्ञानिक लुई पाश्चर की पुण्यतिथि भी है, जिन्होंने रेबीज का पहला टीका विकसित किया था।

Adst

रेबीज क्या है और कैसे फैलता है

पशुधन विकास विभाग, अंबिकापुर के अतिरिक्त उप संचालक डॉ. सी.के. मिश्रा ने बताया कि रेबीज एक वायरल और जूनोटिक बीमारी है, जो संक्रमित स्तनधारी पशु की लार के संपर्क से मनुष्यों और अन्य पशुओं में फैल सकती है। संक्रमित कुत्ते के काटने या खरोंचने से संक्रमण का खतरा सबसे अधिक रहता है। WHO के अनुसार मानव रेबीज के लगभग 99 प्रतिशत मामले संक्रमित कुत्तों से जुड़े हैं।

दूसरे संक्रमित पशुओं से भी हो सकता है संक्रमण

डा. मिश्रा के अनुसार कुत्तों के अलावा सियार, लोमड़ी, बिल्ली और अन्य संक्रमित स्तनधारी पशुओं के काटने या खरोंचने से भी रेबीज फैल सकता है। इसलिए किसी संदिग्ध पशु के काटने या खरोंचने को मामूली मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर उपचार संक्रमण के गंभीर परिणामों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

लक्षण आने के बाद बीमारी बेहद घातक

रेबीज की सबसे गंभीर विशेषता यह है कि लक्षण शुरू होने के बाद बीमारी लगभग 100 प्रतिशत घातक मानी जाती है। हालांकि संक्रमण के बाद समय पर घाव की सफाई और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस यानी PEP लेने से रेबीज से होने वाली मृत्यु को रोका जा सकता है।

Adst

संक्रमित कुत्ते में दिख सकते हैं बदलाव

रेबीज से संक्रमित कुत्ते में व्यवहार में अचानक बदलाव, असामान्य आक्रामकता, बेचैनी, पानी या भोजन से दूरी, निगलने में कठिनाई, अत्यधिक लार आना और चलने-फिरने में असामान्यता जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं। हालांकि केवल लक्षणों के आधार पर किसी पशु को संक्रमित मानना उचित नहीं है और विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।

पालतू पशुओं का टीकाकरण जरूरी

रेबीज की रोकथाम के लिए पालतू कुत्तों और जोखिम वाले अन्य पशुओं का नियमित एंटी-रेबीज टीकाकरण बेहद महत्वपूर्ण है। पशु चिकित्सक डा. मिश्रा की सलाह के अनुसार टीके और आवश्यक बूस्टर डोज लगवानी चाहिए। बड़े स्तर पर कुत्तों का टीकाकरण मानव रेबीज की रोकथाम की प्रमुख रणनीतियों में शामिल है।

काटने पर तुरंत घाव धोना जरूरी

यदि कुत्ता या कोई संदिग्ध पशु काट ले अथवा खरोंच दे तो घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए। उपलब्ध होने पर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उचित एंटीसेप्टिक का इस्तेमाल किया जा सकता है। घाव पर मिर्च, चूना, तेल, मिट्टी या अन्य घरेलू पदार्थ नहीं लगाने चाहिए।

अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह लें

पशु के काटने या खरोंचने के बाद बिना देरी नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचना चाहिए। चिकित्सक की सलाह के अनुसार रेबीज वैक्सीन और आवश्यकता होने पर रेबीज इम्युनोग्लोब्युलिन यानी RIG दिया जा सकता है। उपचार का निर्णय घाव और संपर्क की प्रकृति के आधार पर स्वास्थ्यकर्मी करते हैं।

झाड़-फूंक और अंधविश्वास से बचने की सलाह

विशेषज्ञों ने रेबीज के संदिग्ध संपर्क के बाद झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के भरोसे समय गंवाने से बचने की अपील की है। वैज्ञानिक और चिकित्सकीय उपचार में देरी गंभीर परिणाम दे सकती है। इसलिए पशु के काटने या खरोंचने के बाद तुरंत स्वास्थ्य सेवाओं से संपर्क करना जरूरी है।

दुनिया में हर साल हजारों मौतें

WHO के अनुसार दुनियाभर में रेबीज से हर वर्ष लगभग 59 हजार लोगों की मृत्यु होने का अनुमान है। प्रभावित लोगों में करीब 40 प्रतिशत 15 वर्ष से कम आयु के बच्चे होते हैं। भारत में भी पशु-काटने की घटनाएं सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई हैं।

वन हेल्थ दृष्टिकोण से रोकथाम पर जोर

रेबीज की रोकथाम के लिए मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और स्थानीय समुदायों के बीच समन्वय आवश्यक है। पशुओं का टीकाकरण, जिम्मेदार पशुपालन, आवारा कुत्तों का टीकाकरण और काटे जाने पर तत्काल उपचार इसके नियंत्रण में महत्वपूर्ण हैं। विश्व रेबीज दिवस 2026 की थीम “Stronger Together” है, जो सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर जोर देती है।

नागरिकों से सतर्क रहने की अपील

पशुधन विकास विभाग, अंबिकापुर के अतिरिक्त उप संचालक डॉ. सी.के. मिश्रा ने नागरिकों से रेबीज को लेकर जागरूक और सतर्क रहने की अपील की। संदेश स्पष्ट है—रेबीज से घबराने के बजाय सावधानी बरतें, पशुओं का नियमित टीकाकरण कराएं और काटने या खरोंचने की स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय उपचार लें।

Read More :  Stock Market Today: बाजार में हाहाकार, निफ्टी की 46 कंपनियां लाल निशान में खुलीं

Chandan Das

Chandan Das

Writer & Blogger

All Posts
पिछले पोस्ट
अगला पोस्ट

ताज़ा खबरे

  • All Posts
  • FIFA World Cup 2026
  • Thetarget365
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अन्य
  • अपराध
  • कारोबार
  • कृषि
  • खेल
  • छत्तीसगढ़
  • टेक
  • ट्रेंड
  • ताज़ा खबर
  • धर्म
  • पशु-पक्षी
  • मनोरंजन
  • मौसम
  • राजनीति
  • राष्ट्रीय
  • विचार/लेख
  • शिक्षा और नौकरी
  • साहित्य/मीडिया
  • सेहत-फिटनेस
    •   Back
    • मध्य प्रदेश
    • पश्चिम बंगाल
    • उत्तर प्रदेश
    • बिहार
    • महाराष्ट्र
    • झारखंड
    • राजस्थान
    • ओडिशा

© 2026 | All Rights Reserved | Thetarget365.com | Made By Top News Portal Development Company. 

Contacts

Call Us At – +91-:9406130006
WhatsApp – +91 62665 68872
Mail Us At – thetargetweb@gmail.com
Meet Us At – Shitla Ward, Ambikapur Dist. Surguja Chhattisgarh.497001.

Adst