India-USA Trade Deal : भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर लंबे समय से बातचीत जारी है। कई दौर की वार्ता में अलग-अलग मुद्दों पर मतभेद सामने आते रहे हैं, लेकिन अब दोनों देशों के बीच समझौते को लेकर फिर गतिविधियां तेज हुई हैं। बातचीत में टैरिफ के साथ-साथ भविष्य में व्यापारिक लाभों को सुरक्षित रखने से जुड़े प्रावधानों पर भी चर्चा की जा रही है। इसी क्रम में द्विपक्षीय व्यापार समझौते यानी BTA के संभावित फ्रेमवर्क में Forward-MFN को शामिल करने का मुद्दा सामने आया है।
केवल टैरिफ कटौती तक सीमित नहीं है बातचीत
भारत और अमेरिका के बीच चर्चा अब सिर्फ मौजूदा टैरिफ को कम करने तक सीमित नहीं दिखाई दे रही है। भारत की कोशिश है कि यदि किसी समझौते के तहत भारतीय उत्पादों को अमेरिका में टैरिफ संबंधी लाभ मिलता है, तो भविष्य में बदलती अमेरिकी व्यापार नीति के कारण ये फायदे कमजोर न पड़ें। इसी उद्देश्य से Forward-MFN जैसे प्रावधान पर बातचीत की जा रही है। हालांकि यह प्रस्ताव अभी चर्चा के स्तर पर है और इसका अंतिम स्वरूप तय नहीं हुआ है।
भारत चाहता है टैरिफ में भविष्य की सुरक्षा
Forward-MFN के संभावित प्रावधान के जरिए भारत टैरिफ व्यवस्था में स्थिरता चाहता है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी भारतीय उत्पाद पर अमेरिका में 15 प्रतिशत शुल्क लागू है और बाद में अमेरिका किसी प्रतिस्पर्धी देश के उसी उत्पाद पर शुल्क घटाकर 10 प्रतिशत कर देता है, तो भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति प्रभावित हो सकती है। प्रस्तावित व्यवस्था में ऐसी स्थिति में भारत को भी समान या अनुकूल टैरिफ ट्रीटमेंट देने का विकल्प चर्चा में है।
विदेश मंत्री जयशंकर ने डील को लेकर दिया संकेत
संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठकों में शामिल होने के लिए अमेरिका पहुंचे विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देश डील के काफी करीब हैं। उनके बयान को बातचीत में प्रगति के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि समझौते की अंतिम शर्तें और औपचारिक घोषणा होने तक किसी निष्कर्ष को अंतिम नहीं माना जा सकता।
पीयूष गोयल भी अमेरिका दौरे पर
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी 29 सितंबर से 5 अक्टूबर 2026 तक अमेरिका के दौरे पर हैं। उनके दौरे के दौरान भारत-अमेरिका BTA और व्यापार समझौते से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के अलावा G20 ट्रेड मिनिस्टर्स मीटिंग में भागीदारी भी निर्धारित है। ऐसे में दोनों देशों के बीच व्यापारिक मुद्दों पर उच्चस्तरीय चर्चा जारी रहने की संभावना है।
Forward-MFN का सामान्य MFN से क्या अंतर है
MFN यानी Most-Favoured-Nation का सामान्य सिद्धांत व्यापारिक साझेदारों के बीच समान परिस्थितियों में भेदभाव कम करने से जुड़ा है। वहीं Forward-MFN का प्रस्तावित फोकस भविष्य में होने वाले टैरिफ बदलावों पर है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि अमेरिका किसी प्रतिस्पर्धी देश को किसी भारतीय उत्पाद की तुलना में बेहतर टैरिफ सुविधा देता है, तो भारत को भी उस बदलाव का लाभ मिल सके।
टैरिफ नीति में बदलाव से भारत की चिंता
भारत के लिए टैरिफ में स्थिरता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत और प्रतिस्पर्धा के आधार पर अपनी रणनीति बनानी होती है। यदि किसी प्रतिस्पर्धी देश को अचानक कम टैरिफ मिल जाता है, तो भारतीय उत्पाद अपेक्षाकृत महंगे हो सकते हैं। Forward-MFN पर चर्चा इसी संभावित स्थिति से जुड़े जोखिम को कम करने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है।
अमेरिकी टैरिफ नीति में बदलाव भी अहम
अमेरिका की हालिया टैरिफ नीति में कई देशों और उत्पादों को लेकर बदलाव देखने को मिले हैं। ऐसे माहौल में भारत व्यापार समझौते के तहत टैरिफ संबंधी शर्तों में अधिक स्पष्टता और स्थिरता चाहता है। हालांकि Forward-MFN को लेकर अभी बातचीत जारी है और अंतिम निर्णय दोनों देशों के बीच होने वाली वार्ता तथा समझौते की शर्तों पर निर्भर करेगा।
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