France Student Protest: फ्रांस में स्कूलों की व्यवस्थाओं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब देशव्यापी रूप ले चुका है। शुक्रवार को देश के कई हिस्सों में हाईस्कूल छात्रों ने प्रदर्शन करते हुए स्कूलों के प्रवेश द्वार बंद कर दिए। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, 564 शिक्षण संस्थान किसी न किसी तरह के प्रदर्शन या व्यवधान से प्रभावित हुए, जबकि करीब 400 हाईस्कूलों को बंद रखना पड़ा। कई स्कूलों ने पढ़ाई जारी रखने के लिए ऑनलाइन कक्षाओं का सहारा लिया।
बेहतर सुविधाओं और शिक्षकों की मांग
छात्रों की प्रमुख शिकायतों में स्कूलों में संसाधनों की कमी, शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की अनुपस्थिति, भीड़भाड़ वाली कक्षाएं और लंबे स्कूल घंटे शामिल हैं। कई प्रदर्शनकारी पुराने या जर्जर भवनों तथा गर्म कक्षाओं की समस्या भी उठा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि शिक्षा के लिए पर्याप्त बजट और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
बजट कटौती और शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल
आंदोलन के पीछे शिक्षा पर सरकारी खर्च और स्कूलों की स्थिति को लेकर असंतोष भी अहम मुद्दा है। छात्रों और उनके समर्थकों का कहना है कि पर्याप्त निवेश नहीं होने से कक्षाओं, स्टाफ और स्कूल सुविधाओं पर असर पड़ा है। फ्रांस की शिक्षा व्यवस्था में सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि के आधार पर छात्रों के प्रदर्शन में अंतर को लेकर भी लंबे समय से चर्चा होती रही है।
पेरिस से पूरे देश में फैला विरोध
यह आंदोलन पिछले सप्ताह पेरिस क्षेत्र के हाईस्कूलों से शुरू हुआ और तेजी से दूसरे शहरों तक फैल गया। शुक्रवार को पेरिस के कई स्कूलों के बाहर छात्रों ने बैरिकेड लगाए। राजधानी में लियोनार्ड डी विंची और गैस्टन-बाशेलार्ड हाईस्कूल के आसपास आग लगने की घटनाएं सामने आईं। ल्योन समेत अन्य शहरों में भी प्रदर्शन के दौरान आगजनी और पुलिस के साथ झड़प की खबरें सामने आईं।
हिंसा और पुलिस कार्रवाई से बढ़ा तनाव
प्रदर्शनों के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच कई जगह टकराव हुआ। सरकार ने आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं की आलोचना की है। वहीं प्रदर्शनकारी छात्रों ने पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने और आंसू गैस के इस्तेमाल का आरोप लगाया है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि कुछ हिंसक समूहों ने छात्रों की मूल मांगों से अलग गतिविधियों के जरिए आंदोलन को प्रभावित किया है।
सैकड़ों लोग घायल, हजारों हिरासत में
फ्रांसीसी अधिकारियों के अनुसार, आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में छात्र, स्कूल कर्मचारी और पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों में 170 छात्रों और 65 स्कूल कर्मचारियों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। वहीं न्याय मंत्री जेराल्ड डरमानिन के मुताबिक आंदोलन शुरू होने के बाद करीब 2,000 लोगों को पुलिस हिरासत में लिया गया, जिनमें लगभग 90 प्रतिशत नाबालिग बताए गए।
सरकार ने माना छात्रों की चिंता जायज
शिक्षा मंत्री एडुआर्ड गेफ्रे ने छात्रों की शिक्षा संबंधी चिंताओं को स्वीकार किया है, लेकिन हिंसक घटनाओं पर कड़ा रुख अपनाया है। सरकार का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और हिंसा के बीच अंतर किया जाना चाहिए। शुक्रवार को मंत्री ने छात्र संगठनों, अभिभावक प्रतिनिधियों और अन्य पक्षों से बातचीत की। हालांकि, छात्र संगठनों ने बैठक के बाद कहा कि उन्हें तत्काल लागू होने वाले ठोस उपाय नहीं मिले और उन्होंने आंदोलन जारी रखने का आह्वान किया।
राष्ट्रपति चुनाव से पहले राजनीतिक बहस तेज
फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव की तैयारियों के बीच छात्र आंदोलन ने राजनीतिक बहस को भी प्रभावित किया है। सरकार और विपक्षी नेताओं के बीच आंदोलन में राजनीतिक भूमिका को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। हालांकि, प्रदर्शन में शामिल छात्र संगठनों की ओर से शिक्षा व्यवस्था, स्कूलों की सुविधाओं और संसाधनों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी जा रही है। फिलहाल सरकार के सामने छात्रों की शिकायतों पर संवाद बढ़ाने के साथ-साथ स्कूलों में हिंसा और तोड़फोड़ रोकने की चुनौती बनी हुई है।
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