West Bengal Politics : पश्चिम बंगाल की राजनीति में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। कांग्रेस नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने 1 अक्टूबर को टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी से कांग्रेस में वापस लौटने की अपील की। उन्होंने कहा कि ममता अपने साथ बचे हुए विधायकों और सांसदों को लेकर कांग्रेस में शामिल हो सकती हैं और पार्टी बंगाल में उनके नेतृत्व को स्वीकार करने के लिए तैयार होगी।
कांग्रेस आलाकमान से भी अधीर ने की अपील
अधीर रंजन चौधरी ने केवल ममता बनर्जी से ही अपील नहीं की, बल्कि कांग्रेस आलाकमान से भी इस प्रस्ताव पर विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में अलग संगठन की जरूरत नहीं है और ममता यदि कांग्रेस में लौटती हैं तो बंगाल में उनके साथ मिलकर काम किया जा सकता है। उनका यह बयान पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी में सामने आई आंतरिक चुनौतियों के बीच आया है।
रेजीनगर उपचुनाव को लेकर भी की अपील
अधीर चौधरी ने ममता बनर्जी से रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की अपील भी की। उन्होंने इसे सहयोग की भावना से जोड़ते हुए नंदीग्राम उपचुनाव का उदाहरण दिया। रिपोर्टों के अनुसार, ममता बनर्जी ने पहले नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार के समर्थन का ऐलान किया था। रेजीनगर और नंदीग्राम में 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं।
टीएमसी के संगठनात्मक संकट का दिया हवाला
अधीर रंजन ने अपने बयान में टीएमसी की मौजूदा स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि 2026 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद संगठन के भीतर कई स्तरों पर असंतोष और बगावत की स्थिति बनी है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में अलग राजनीतिक संगठन बनाए रखने की आवश्यकता नहीं दिखती। हालांकि, टीएमसी की ओर से इस प्रस्ताव को लेकर अभी तक कांग्रेस नेतृत्व की तरफ से किसी औपचारिक प्रस्ताव की जरूरत बताई गई है।
ममता ने 1998 में कांग्रेस से अलग होकर बनाई थी टीएमसी
ममता बनर्जी ने 1998 में कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी। इसके बाद टीएमसी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। ऐसे में अधीर चौधरी का ममता को दोबारा कांग्रेस में शामिल होने का सुझाव राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण राजनीतिक बयान के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, यह फिलहाल अधीर चौधरी का प्रस्ताव है और ममता बनर्जी की ओर से कांग्रेस में लौटने को लेकर कोई सहमति सामने नहीं आई है।
बीजेपी सांसद सौमित्र खान ने साधा निशाना
अधीर रंजन के बयान पर बीजेपी सांसद सौमित्र खान ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अधीर और ममता के साथ आने से कोई खास फायदा नहीं होगा। खान ने अधीर की मंशा पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि वह अपनी संसदीय सीट बचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने ममता बनर्जी को लेकर भी टिप्पणी की और कहा कि दोनों नेताओं के साथ आने से राजनीतिक स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। ये टिप्पणियां बीजेपी नेता के राजनीतिक आकलन के तौर पर सामने आई हैं।
टीएमसी की ओर से औपचारिक प्रस्ताव का इंतजार
टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा कि अधीर चौधरी ने अपनी बात रखी है, लेकिन पार्टी इस मुद्दे पर तभी चर्चा करेगी जब कांग्रेस नेतृत्व की ओर से औपचारिक प्रस्ताव आएगा। उन्होंने टीएमसी को अलग राजनीतिक दल बताते हुए कहा कि पार्टी विपक्षी INDIA गठबंधन का हिस्सा बनी हुई है। साथ ही उन्होंने ममता बनर्जी के राजनीतिक नेतृत्व को लेकर पार्टी की मौजूदा स्थिति स्पष्ट की।
बंगाल की राजनीति में नई संभावनाओं पर चर्चा तेज
अधीर रंजन चौधरी का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक समीकरणों को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं। एक तरफ टीएमसी के भीतर संगठनात्मक चुनौतियों की खबरें हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल चुनावी मुद्दों पर समन्वय की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल ममता बनर्जी की ओर से कांग्रेस में वापसी के प्रस्ताव पर कोई फैसला सामने नहीं आया है। ऐसे में आगे कांग्रेस, टीएमसी और अन्य विपक्षी दलों की रणनीति पर नजर रहेगी।
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