वासेपुर के चर्चित गैंगस्टर फहीम खान के घर वर्ष 2004 में हुए AK-47 हमले के मामले में अदालत ने 22 साल बाद फैसला सुनाया। जिला एवं सत्र अदालत ने शाहिद आलम, शहादत हुसैन और तनवीर आलम को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा दी। आखिर उस हमले के पीछे क्या था?
वासेपुर के चर्चित गैंगस्टर फहीम खान के घर वर्ष 2004 में हुए AK-47 हमले के मामले में अदालत ने 22 साल बाद फैसला सुनाया। जिला एवं सत्र अदालत ने शाहिद आलम, शहादत हुसैन और तनवीर आलम को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा दी। आखिर उस हमले के पीछे क्या था?

Faheem Khan House AK-47 Attack : धनबाद के चर्चित गैंगस्टर फहीम खान के वासेपुर स्थित घर पर वर्ष 2004 में हुए AK-47 हमले के मामले में अदालत ने तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय पारस कुमार सिन्हा की अदालत ने शाहिद आलम, शहादत हुसैन और तनवीर आलम को हत्या, आपराधिक साजिश और गैरकानूनी जमावड़े सहित कई गंभीर धाराओं में दोषी ठहराया। करीब 22 साल पुराने इस मामले में अदालत के फैसले के बाद कानूनी प्रक्रिया एक अहम चरण में पहुंच गई है।

यह मामला 29 जनवरी 2004 का है। उस दिन धनबाद के वासेपुर इलाके में फहीम खान के घर को अत्याधुनिक हथियारों से निशाना बनाया गया था। हमलावरों ने कथित तौर पर AK-47 समेत अन्य हथियारों से अंधाधुंध फायरिंग की थी। अचानक हुई गोलीबारी के दौरान इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। हमले में फहीम खान ने किसी तरह अपनी जान बचाई थी।

हमले के दौरान फहीम खान ने बचने के लिए अपने घर से निकलकर पड़ोसी की छत पर छलांग लगा दी थी। इस तरह वह गोलीबारी की चपेट में आने से बच गए थे। हालांकि, हमलावरों की फायरिंग में उनके बॉडीगार्ड विनोद शर्मा की मौत हो गई थी। इसके अलावा शाहिद नामक एक व्यक्ति भी गोली लगने से घायल हुआ था। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई।
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय पारस कुमार सिन्हा की अदालत ने शाहिद आलम, शहादत हुसैन और तनवीर आलम को मामले में दोषी करार दिया। अदालत ने तीनों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या, धारा 120बी के तहत आपराधिक साजिश और धारा 149 के तहत गैरकानूनी जमावड़े से संबंधित अपराधों में दोषी माना। इसके आधार पर अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अदालत ने दोषियों को केवल उम्रकैद तक सीमित नहीं रखा, बल्कि आर्म्स एक्ट और हत्या के प्रयास से संबंधित धाराओं में भी सजा सुनाई। आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत तीनों को सात-सात वर्ष के कारावास की सजा दी गई है। वहीं, धारा 307 के तहत 10-10 साल की सजा सुनाई गई। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। इसलिए अलग-अलग सजाओं की अवधि को जोड़कर अलग से जेल की अवधि तय नहीं होगी।

इस मामले में अदालत ने 28 सितंबर 2026 को शाहिद आलम, शहादत हुसैन और तनवीर आलम को दोषी करार दिया था। इसके बाद 3 अक्टूबर 2026 को अदालत में सजा के बिंदु पर सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलों और मामले में उपलब्ध रिकॉर्ड पर विचार करने के बाद अदालत ने तीनों दोषियों को उम्रकैद सहित अन्य सजाएं सुनाईं।
वर्ष 2004 में हुई इस घटना ने धनबाद के वासेपुर इलाके में काफी चर्चा पैदा की थी। फहीम खान के घर पर हुए हमले में अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई थी। गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत और दूसरे के घायल होने के कारण मामला गंभीर आपराधिक प्रकरण के रूप में अदालत तक पहुंचा। लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब तीन आरोपियों को दोषी ठहराकर सजा सुनाई गई है।
अदालत के फैसले की जानकारी पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता शाहबाज सलाम ने दी। उन्होंने बताया कि अदालत ने तीनों दोषियों को हत्या और अन्य संबंधित धाराओं में उम्रकैद की सजा सुनाई है। फैसले के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। 22 साल पुराने इस मामले में अदालत का फैसला धनबाद के चर्चित आपराधिक मामलों में एक महत्वपूर्ण न्यायिक घटनाक्रम के रूप में सामने आया है।
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