Delhi Police Personnel Assault: दिल्ली में बुधवार को इंडिया गठबंधन के राजघाट मार्च के दौरान कानून-व्यवस्था संभाल रहे दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ कथित मारपीट और बदसलूकी का मामला सामने आया है। पुलिसकर्मियों का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों की भीड़ को नियंत्रित करने और उन्हें निर्धारित व्यवस्था का पालन कराने के दौरान उनके साथ धक्का-मुक्की की गई। इस घटना में कुछ पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात भी सामने आई है।
कांस्टेबल देवेंद्र संधू ने बताई पूरी घटना
कांस्टेबल देवेंद्र संधू के मुताबिक, वह प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्वक तरीके से समझाने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने बताया कि पुलिस की ओर से धारा 163 लागू होने की जानकारी देते हुए लोगों से बसों में बैठने का अनुरोध किया जा रहा था। संधू का आरोप है कि इसी दौरान भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने उनके साथ हाथापाई शुरू कर दी।
नेमप्लेट और टोपी छीनने का लगाया आरोप
देवेंद्र संधू ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों ने उनकी नेमप्लेट तोड़ दी और उनकी पुलिस टोपी भी छीन ली। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोगों ने पीछे से उन्हें खींचकर जमीन पर गिरा दिया। संधू के अनुसार, इस दौरान उन्हें कमर और सिर के पिछले हिस्से में चोट लगी। घटना के बाद उनकी हालत को लेकर पुलिस विभाग में भी चिंता जताई गई।
कांस्टेबल अंकित कसाना ने लगाए गंभीर आरोप
एक अन्य पुलिसकर्मी कांस्टेबल अंकित कसाना ने भी प्रदर्शन के दौरान कथित मारपीट का आरोप लगाया है। कसाना के अनुसार, वह कांग्रेस नेता राहुल गांधी की गाड़ी को सुरक्षित तरीके से निकालने के लिए ड्यूटी कर रहे थे। इसी दौरान करीब 30 से 35 लोगों की भीड़ ने उन्हें कथित तौर पर घेर लिया और उनके साथ गाली-गलौज की।
वर्दी फाड़ने और काटने का भी दावा
कांस्टेबल कसाना का आरोप है कि भीड़ ने उनके साथ धक्का-मुक्की की और उनकी वर्दी तक फाड़ दी। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस दौरान उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें काटा गया। घटना के बाद उन्हें मेडिकल जांच के लिए राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया। पुलिस मामले में सामने आए आरोपों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।
हेड कांस्टेबल और महिला पुलिसकर्मी ने भी बताई परेशानी
प्रदर्शन के दौरान हेड कांस्टेबल भूपेंद्र अहलावत और एक महिला कांस्टेबल ने भी ड्यूटी के दौरान कथित बदसलूकी और धक्का-मुक्की का सामना करने की बात कही है। पुलिसकर्मियों के अनुसार, भीड़ को नियंत्रित करने और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के दौरान स्थिति कई बार तनावपूर्ण हो गई थी।
दिल्ली पुलिस ने दर्ज की तीन FIR
मामले को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली पुलिस ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक, सरकारी काम में बाधा डालने, पुलिसकर्मियों पर कथित हमला करने और दुर्व्यवहार से संबंधित धाराओं के तहत तीन एफआईआर दर्ज की गई हैं। जांच एजेंसियां अब घटना से जुड़े वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच कर रही हैं।
प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
इंडिया गठबंधन के राजघाट मार्च के दौरान बड़ी संख्या में विपक्षी नेता और समर्थक मौजूद थे। ऐसे में सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण दिल्ली पुलिस के लिए बड़ी चुनौती थी। पुलिसकर्मियों पर लगे हमले के आरोपों ने प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच के बाद तस्वीर होगी साफ
पुलिसकर्मियों की ओर से लगाए गए आरोपों के आधार पर एफआईआर दर्ज होने के बाद अब जांच महत्वपूर्ण हो गई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित घटनाएं किस परिस्थिति में हुईं और इनमें कौन-कौन लोग शामिल थे। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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