Russia Plague News : रूस के साइबेरियाई शहर इरकुत्स्क में एक युवा लैबोरेटरी कर्मचारी की मौत के बाद कथित प्लेग संक्रमण को लेकर चिंता बढ़ गई है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि महिला की मौत प्लेग की वजह से हुई। इसके बाद क्षेत्र में संभावित महामारी को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। हालांकि, रूस की सरकार ने इन खबरों को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है।
प्लेग को लेकर सामने आईं कई तरह की रिपोर्ट
मामले को लेकर रूसी और अन्य मीडिया रिपोर्टों में अलग-अलग दावे सामने आए। कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि इरकुत्स्क के एंटी-प्लेग संस्थान में काम करने वाली एक महिला कर्मचारी प्लेग से संक्रमित हुई थी। इसके बाद कुछ अन्य रिपोर्टों में उसी प्रयोगशाला के दूसरे कर्मचारी की मौत की भी बात कही गई, जिससे आशंका और बढ़ गई।
क्रेमलिन ने ज्यादातर खबरों को बताया गलत
बुधवार को क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने मीडिया से बातचीत में प्लेग से संबंधित खबरों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मीडिया में प्रसारित हो रही प्लेग से जुड़ी खबरों का बड़ा हिस्सा गलत है। पेस्कोव ने लोगों से अपील की कि ऐसे मामलों में अनधिकृत रिपोर्टों के बजाय आधिकारिक जानकारी पर भरोसा किया जाए।
आधिकारिक जानकारी के लिए स्वास्थ्य एजेंसी पर भरोसा
दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि संदिग्ध संक्रमण से जुड़े किसी भी मामले की सही जानकारी के लिए रूस की स्वास्थ्य निगरानी एजेंसी रोस्पोट्रेबनादजोर के आधिकारिक बयानों को देखा जाना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब सोशल मीडिया और विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में कथित प्लेग संक्रमण को लेकर कई तरह की जानकारियां प्रसारित हो रही थीं।
25 सितंबर की घटना का किया गया दावा
रूसी मीडिया की कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि 25 सितंबर को इरकुत्स्क एंटी-प्लेग इंस्टीट्यूट की प्रयोगशाला में परीक्षण के दौरान एक टेस्ट ट्यूब टूट गई थी। रिपोर्टों के अनुसार, उस टेस्ट ट्यूब में प्लेग बैक्टीरिया मौजूद होने की बात कही गई थी। इसके बाद दारिया शिपिलोवा नाम की एक युवा महिला की तबीयत बिगड़ने का दावा किया गया।
मौत की वजह पर अब भी स्थिति स्पष्ट नहीं
रिपोर्टों में शिपिलोवा की मौत को कथित तौर पर निमोनिक प्लेग से जोड़ दिया गया। हालांकि, रूस की स्वास्थ्य नियामक संस्था ने इन दावों को पुष्ट नहीं किया है। एजेंसी के अनुसार, प्रयोगशाला के कर्मचारियों में प्लेग संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है। वहीं, शिपिलोवा की बीमारी और मृत्यु का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं बताया गया है।
दूसरे कर्मचारी की मौत की खबर को भी बताया गया गलत
शिपिलोवा की मौत के बाद कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि उसी प्रयोगशाला के एक और कर्मचारी की भी मृत्यु हो गई है। इस खबर से संभावित संक्रमण को लेकर चिंता और बढ़ गई। लेकिन क्रेमलिन की ओर से इस दावे को गलत बताया गया है। मॉस्को ने स्पष्ट किया कि ऐसी खबरों पर आधिकारिक स्रोतों के बिना भरोसा नहीं किया जाना चाहिए।
प्लेग की महामारी की आशंका पर क्या स्थिति है?
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर रूस ने इरकुत्स्क में प्लेग के प्रकोप की पुष्टि नहीं की है। स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा प्रयोगशाला कर्मचारियों की स्थिति और संभावित संक्रमण को लेकर निगरानी की जा रही है। ऐसे में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच और स्वास्थ्य एजेंसियों की रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी है।
WHO ने भी मांगी मामले की जानकारी
पूरे घटनाक्रम पर विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO की नजर भी बनी हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, संगठन ने रूस से संबंधित मामले पर जानकारी मांगी है। WHO की ओर से जानकारी मांगे जाने के बाद इस घटना को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी निगरानी बढ़ गई है।
अफवाहों के बीच आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण
इरकुत्स्क की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि किसी संभावित संक्रामक बीमारी से जुड़े मामलों में अपुष्ट खबरें कितनी तेजी से भय का माहौल पैदा कर सकती हैं। फिलहाल क्रेमलिन और स्वास्थ्य अधिकारियों के बयानों के अनुसार प्लेग संक्रमण और दूसरे कर्मचारी की मौत से जुड़े कई दावे पुष्ट नहीं हैं। इसलिए आधिकारिक स्वास्थ्य अपडेट को ही प्राथमिक आधार माना जाना चाहिए।
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