Tamil Nadu News : तमिलनाडु के इरोड जिले से जातिगत भेदभाव और कथित अपमान का मामला सामने आया है। पेरुंदुरई के पास स्थित पेरुमपल्ली गांव में एक दलित बुजुर्ग के अंतिम संस्कार के दौरान कब्रिस्तान में शव दफनाने को लेकर विवाद हो गया। आरोप है कि इस विवाद के बाद अनुसूचित जाति समुदाय के दो युवकों को कथित प्रभावशाली जाति के लोगों के पैरों में गिरकर माफी मांगने के लिए मजबूर किया गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आ गया है।
90 वर्षीय बुजुर्ग की मौत के बाद शुरू हुआ विवाद
पुलिस के मुताबिक, गांव में 5 अक्टूबर को 90 वर्षीय एक बुजुर्ग की उम्र संबंधी बीमारी के कारण मौत हो गई थी। मृतक अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित था। अंतिम संस्कार के लिए परिजन और समुदाय के लोग शव को गांव के कब्रिस्तान में दफनाने पहुंचे थे। इसी दौरान आरोप है कि वहां मौजूद कथित प्रभावशाली समुदाय के कुछ लोगों ने शव दफनाने की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई और अंतिम संस्कार रोक दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ने लगा।
कब्रिस्तान में शव दफनाने को लेकर बढ़ा तनाव
शव दफनाने से रोके जाने के बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। आरोप है कि इस दौरान कथित प्रभावशाली जाति के लोगों ने दलित समुदाय के सदस्यों को धमकी दी कि यदि उन्होंने उनकी बात नहीं मानी तो भविष्य में उन्हें इलाके में रोजगार नहीं मिलेगा। इस कथित आर्थिक बहिष्कार की धमकी के कारण स्थिति और गंभीर हो गई। आरोपों के अनुसार, इसी दबाव में दो दलित युवकों को सार्वजनिक रूप से झुककर दूसरे लोगों के पैरों में गिरना पड़ा और माफी मांगनी पड़ी।
वायरल वीडियो के बाद इलाके में नाराजगी
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। वीडियो में कथित तौर पर दो व्यक्तियों को दूसरे लोगों के पैरों में गिरते हुए देखा जा सकता है। वीडियो सामने आने के बाद घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर नाराजगी की खबरें सामने आई हैं। हालांकि, वीडियो की पूरी पृष्ठभूमि और उसमें दिखाई दे रहे व्यक्तियों की भूमिका की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही की जा सकेगी। मामले ने एक बार फिर जातिगत भेदभाव और सामाजिक समानता से जुड़े सवालों को चर्चा में ला दिया है।
राजस्व निरीक्षक की शिकायत पर पुलिस ने दर्ज किया केस
पुलिस के अनुसार, पेरुंदुरई के राजस्व निरीक्षक की शिकायत के आधार पर थिंगलूर पुलिस ने गुरुवार देर रात मामला दर्ज किया। इस मामले में दो लोगों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल, आरोपों की सच्चाई और घटना में शामिल लोगों की भूमिका का पता लगाने के लिए आगे की कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस सुरक्षा में बुजुर्ग का अंतिम संस्कार कराया गया
विवाद के बाद मृतक के शव को दफनाने की प्रक्रिया पुलिस सुरक्षा और राजस्व विभाग के अधिकारियों की निगरानी में पूरी कराई गई। प्रशासन की मौजूदगी में अंतिम संस्कार संपन्न होने से शव दफनाने को लेकर तत्काल स्थिति को संभालने की कोशिश की गई। इस घटनाक्रम ने गांव में अंतिम संस्कार के अधिकार और सामाजिक समानता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
जातिगत भेदभाव की आशंका, जांच पर टिकी नजरें
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि क्षेत्र में जातिगत भेदभाव से जुड़ी समस्याएं पहले भी सामने आती रही हैं। हालांकि, इस मामले में कथित घटनाओं और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। पुलिस की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कब्रिस्तान में शव दफनाने से रोकने, रोजगार संबंधी धमकी देने और युवकों को माफी मांगने के लिए मजबूर करने के आरोपों में कितनी सच्चाई है। फिलहाल, मामला दर्ज होने के बाद आगे की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।
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