CJP Press Conference : दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ विवाद रविवार को भी चर्चा में रहा। जंतर-मंतर पर प्रस्तावित धरने से पहले हिरासत में लिए गए CJP के अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरभ दास को रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद तीनों से जुड़े संगठन CJP ने दिल्ली के प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए।
आशुतोष रांका का नरेंद्र मोदी पर आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस में आशुतोष रांका ने कहा कि उनकी लड़ाई चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे अपने खिलाफ लड़ाई बना लिया। उनके इस बयान के जरिए संगठन ने चुनाव आयोग से जुड़े विवाद को लेकर केंद्र सरकार पर राजनीतिक हमला बोला। CJP की ओर से चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए।
पुलिस कार्रवाई को बताया कथित किडनैपिंग
आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि उन्हें हिरासत में नहीं लिया गया, बल्कि उनका अपहरण किया गया। उन्होंने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को अमानवीय बताते हुए कहा कि देश में आपातकाल जैसे हालात दिखाई दे रहे हैं। रांका ने अपने बयान में कहा, “राजा की जान तोते में है।” हालांकि, पुलिस की कार्रवाई को लेकर लगाए गए इन आरोपों पर संबंधित पक्ष का विस्तृत जवाब इस खबर में उपलब्ध नहीं है।
अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के लिए रवाना
रांका ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी कि अभिजीत दीपके अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए महाराष्ट्र के हिंगोली रवाना हो गए हैं। इससे पहले अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरभ दास को रविवार को कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था। इसके बाद तीनों को रिहा कर दिया गया।
एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त
CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने बताया कि तीनों नेताओं की रिहाई कुछ शर्तों के साथ हुई है। उनके अनुसार, तीनों को एक साल तक शांति भंग नहीं करने का वचन देना पड़ा। यह कार्रवाई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 के तहत निवारक कार्रवाई से संबंधित बताई गई है। रिहाई के लिए तीनों ने मजिस्ट्रेट के सामने व्यक्तिगत मुचलके पर हस्ताक्षर किए।
शर्त टूटने पर हो सकती है कार्रवाई
रत्ना सिंह के मुताबिक, यदि संबंधित शर्तों का उल्लंघन होता है, तो मुचलके की राशि जब्त होने और आगे कानूनी कार्रवाई की स्थिति बन सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि मजिस्ट्रेट कानूनी प्रावधानों के तहत शेष अवधि के लिए हिरासत का आदेश दे सकते हैं। इस मामले में रिहाई की शर्तों और उनके संभावित परिणामों को लेकर CJP ने अपनी स्थिति स्पष्ट की।
ध्रुव राठी ने भी हिरासत पर उठाए सवाल
इस घटनाक्रम के बीच यूट्यूबर ध्रुव राठी की रिहाई का भी जिक्र सामने आया। रिहाई के बाद जारी वीडियो संदेश में ध्रुव राठी ने अपनी हिरासत को कथित किडनैपिंग बताया। हालांकि, उनके मामले और CJP नेताओं की हिरासत की परिस्थितियों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
चुनाव आयोग विवाद पर आगे क्या होगा?
CJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग और पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। फिलहाल, संगठन के आरोपों और संबंधित अधिकारियों के पक्ष के बीच अंतर स्पष्ट रखना जरूरी है। इस पूरे घटनाक्रम में आगे की कानूनी कार्रवाई और चुनाव आयोग से जुड़े विवाद पर होने वाली प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी।
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