अंबिकापुर में जमीन घोटाले का एक और मामला उजागर हुआ। लालमाटी की 2.39 एकड़ शासकीय जमीन निजी खाते में दर्ज करने पर पटवारी निलंबित, बंशू लोहार समेत तीन के खिलाफ FIR के निर्देश।
अंबिकापुर में जमीन घोटाले का एक और मामला उजागर हुआ। लालमाटी की 2.39 एकड़ शासकीय जमीन निजी खाते में दर्ज करने पर पटवारी निलंबित, बंशू लोहार समेत तीन के खिलाफ FIR के निर्देश।

Ambikapur Land Scams : अंबिकापुर के भू माफियाओं के लिए परसा गांव का वृद्ध बंशू लोहार पिता भुट्कुल आसान शिकार बन गया है। उसके नाम पर शासकीय मद की जमीन कूटरचना कर भूमाफिया अंतरित करा रहे हैं। अंबिकापुर के नमनाकला स्थित करोड़ों की बेशकीमती जमीन बंशू लोहार के नाम दर्ज कर करोड़ों में बिक्री करने का खेल करने वाले भूमाफियाओं ने इस बार बंशू लोहार को फिर से मोहरा बनाया और इस बार लालमाटी की दो एकड़ से अधिक की शासकीय जमीन उसके नाम से अंतरित करा ली।

इस फर्जीवाड़े में लालमाटी का तत्कालीन पटवारी भी शामिल रहा। पटवारी की मिली भगत से भूमाफियाओं ने जमीन बंशू लोहार के नाम करा उसकी बिक्री भी कर दी। दूसरी बार जमीन फर्जीवाड़े में बंशू लोहार का नाम सामने आया है। इस प्रकरण में बंशू लोहार सहित दो जमीन क्रेताओं के विरुद्ध प्राथमिकी के आदेश हुए हैं जबकि पटवारी को निलंबित कर दिया गया है।

जमीन को फिर से शासकीय मद में अंकित करने का आदेश दिया गया है। लेकिन इस पूरे षडयंत्र के पीछे कौन भूमाफिया शामिल है। उनकी भूमिका स्पष्ट कर प्रकरण की बारीकी से जांच कराने की मांग तेज हो गई है। शहर के ही भूमाफियाओं ने दोनों जमीन में कूटरचना कर गड़बड़ी की थी।
ग्राम लालमाटी में शासकीय मद की 2.39 एकड़ भूमि को त्रुटिपूर्ण जांच प्रतिवेदन के आधार पर निजी मद में दर्ज करने के मामले में कलेक्टर सरगुजा ने बड़ी कार्रवाई की है। हल्का पटवारी सुरेश कुमार डाहिरे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। पटवारी पूर्व में ग्राम लालमाटी, तहसील लुण्ड्रा-धौरपुर में पदस्थ था और वर्तमान में तहसील लखनपुर में पदस्थ है।
यह पूरा मामला खसरा नंबर 70/2 रकबा 0.967 हेक्टेयर यानि 2.39 एकड़ भूमि से जुड़ा है।
अनुविभागीय अधिकारी राजस्व धौरपुर के न्यायालय में चल रहे राजस्व प्रकरण में पटवारी ने स्थल पर वास्तविक कब्जेदार की जानकारी लिए बिना और मूल अभिलेखों का मिलान किए बिना ही शासकीय भूमि को निजी व्यक्ति के नाम दर्ज करने के लिए त्रुटिपूर्ण प्रतिवेदन और पंचनामा न्यायालय में पेश कर दिया। आवेदक द्वारा दी गई छायाप्रति को ही आधार बना लिया गया।

एसडीएम धौरपुर के न्यायालय ने 5 अक्टूबर 2026 को प्रकरण की सुनवाई करते हुए पाया कि भूमि पूर्व से ही शासकीय मद में दर्ज थी और पटवारी प्रतिवेदन व संबंधित दस्तावेज संदिग्ध एवं कूटरचित हैं। न्यायालय ने पुनर्विलोकन के बाद बड़ा आदेश देते हुए खसरा नंबर 70/2 की संपूर्ण भूमि से अनावेदकों का नाम विलोपित कर उसे पूर्ववत शासकीय मद में दर्ज करने का आदेश दिया। साथ ही इस भूमि से संबंधित समस्त क्रय-विक्रय को शून्य घोषित कर दिया।
न्यायालय ने भूमि के विक्रेता बंशु लोहार पिता भुटकूल निवासी ग्राम परसा, तहसील अंबिकापुर तथा क्रेतागण मिस्हाबुल इस्लाम पिता सफी अहमद निवासी मोमिनपुर अंबिकापुर और मो. सलीम पिता मो. कमालुद्दीन निवासी सोस, जिला रांची झारखंड के विरुद्ध संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। वादभूमि पर अतिक्रमण पाए जाने पर शिकायतकर्ता रामचन्द्र लकड़ा आदि के विरुद्ध छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 248 के तहत अतिक्रमण का प्रकरण दर्ज कर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का भी आदेश दिया गया है।
इसी प्रकरण में तत्कालीन पटवारी की भूमिका को गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने कलेक्टर भू-अभिलेख को विभागीय जांच के लिए पत्र लिखा था। नायब तहसीलदार उप तहसील रघुनाथपुर की जांच रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर ने पटवारी सुरेश कुमार डाहिरे को 11 सितंबर को कारण बताओ नोटिस दिया था। 15 सितंबर को दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर कलेक्टर ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 के विपरीत कृत्य मानते हुए वर्गीकरण नियंत्रण तथा अपील नियम 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय तहसीलदार लखनपुर कार्यालय रहेगा और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।

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