Kachidi Fish : 24 किलो की इस मछली की कीमत सुनकर चौंक जाएंगे, आखिर 80 हजार क्यों मिले?

आंध्र प्रदेश के कोनासीमा जिले में मछुआरों के जाल में करीब 24 किलो की दुर्लभ नर कचिड़ी मछली फंस गई। बंदरगाह पर नीलामी में यह 80 हजार रुपये में बिकी। आखिर इस मछली में ऐसा क्या खास है, जिसकी वजह से व्यापारी ने इतनी बड़ी कीमत चुकाई?

Kachidi Fish : महंगाई के दौर में जहां आम मछलियां बाजार में कुछ सौ रुपये प्रति किलो के भाव से बिकती हैं, वहीं आंध्र प्रदेश में पकड़ी गई एक दुर्लभ समुद्री मछली ने सबका ध्यान खींच लिया है। डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनासीमा जिले में मछुआरों के जाल में करीब 24 किलोग्राम वजनी नर कचिड़ी मछली फंस गई। स्थानीय मछली पकड़ने वाले बंदरगाह पर हुई नीलामी में यह मछली 80,000 रुपये में बिकी। नरसापुरम के एक व्यापारी ने सबसे ऊंची बोली लगाकर इसे खरीदा। इस सौदे से मछुआरों को अच्छी कमाई हुई और दुर्लभ समुद्री मछलियों की बाजार में मांग एक बार फिर चर्चा में आ गई।

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समुद्र में मछली पकड़ने गए मछुआरों को मिली बड़ी कामयाबी

जानकारी के मुताबिक, कोनासीमा जिले के सखीनेतिपल्ली मंडल के अंतर्वेदी पल्लीपालेम क्षेत्र के मछुआरे रोज की तरह समुद्र में मछली पकड़ने निकले थे। इसी दौरान उनके जाल में विशाल आकार की कचिड़ी मछली फंस गई। मछली का वजन लगभग 24 किलोग्राम बताया गया है। इतनी बड़ी और दुर्लभ मछली मिलने के बाद मछुआरे उसे लेकर स्थानीय छोटे मछली पकड़ने वाले बंदरगाह पहुंचे, जहां उसे बेचने के लिए नीलामी आयोजित की गई।

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नीलामी में 80 हजार रुपये की लगी सबसे ऊंची बोली

बंदरगाह पर मछली की नीलामी के दौरान व्यापारियों ने इसमें दिलचस्पी दिखाई। आखिरकार नरसापुरम के एक व्यापारी ने 80,000 रुपये की सबसे ऊंची बोली लगाकर मछली खरीद ली। करीब 24 किलोग्राम वजन वाली इस मछली की कीमत सामान्य मछलियों की तुलना में काफी अधिक रही। हालांकि, यह कीमत किसी एक मछली की नीलामी से जुड़ी है और इसे कचिड़ी मछली का तय बाजार भाव नहीं माना जाना चाहिए।

आखिर क्यों महंगी बिकती है कचिड़ी मछली?

कचिड़ी मछली को कुछ स्थानीय बाजारों में गोल्डफिश भी कहा जाता है। नाम समान होने के बावजूद यह घरों में एक्वेरियम में रखी जाने वाली सामान्य गोल्डफिश से अलग समुद्री मछली है। इसकी कीमत पर मछली की दुर्लभता, आकार, खरीदारों की मांग और व्यावसायिक उपयोग जैसे कई कारक असर डाल सकते हैं। मछली कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक, इसके शरीर के कुछ खास अंगों का भी व्यावसायिक महत्व बताया जाता है।

नर कचिड़ी मछली के किस अंग की रहती है मांग?

इस मछली के महंगे बिकने की एक प्रमुख वजह इसके शरीर में मौजूद स्विम ब्लैडर यानी वायु-थैली बताई जाती है। यह अंग मछली को पानी में अपनी स्थिति और उछाल नियंत्रित करने में मदद करता है। कुछ समुद्री मछलियों में स्विम ब्लैडर का इस्तेमाल विभिन्न व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है, जिससे उनकी कीमत बढ़ सकती है। हालांकि, इस खास मछली के अंगों की वास्तविक बिक्री और उपयोग के बारे में अलग से पुष्टि जरूरी है।

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मछुआरों की कमाई के लिए क्यों खास है यह सौदा?

समुद्र में मछली पकड़ने वाले परिवारों की आमदनी कई बार मौसम, समुद्री परिस्थितियों और बाजार की कीमतों पर निर्भर करती है। ऐसे में जाल में कोई दुर्लभ और अधिक मांग वाली मछली फंसना उनके लिए अतिरिक्त कमाई का अवसर बन सकता है। कोनासीमा में 24 किलोग्राम की कचिड़ी मछली का 80 हजार रुपये में बिकना इसी तरह का मामला है। इस घटना ने स्थानीय मछली बाजार में दुर्लभ समुद्री प्रजातियों की कीमत और मांग को लेकर लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी है।

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Chandan Das

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