Israel Election News : नेतन्याहू की सत्ता को चुनौती देने उतरा विपक्ष, क्या चुनाव में पलट जाएगा इजरायल का पूरा सियासी खेल?

इजरायल में नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए चार विपक्षी दल एकजुट हो गए हैं, लेकिन चुनावी गणित अब भी चुनौती बना हुआ है। बहुमत के लिए 61 सीटें जरूरी हैं। बड़ा सवाल यह है कि नई सरकार बनने पर गाजा और पश्चिमी तट की नीतियों में कितना बदलाव आएगा?

Israel Election News : इजरायल की राजनीति में आगामी चुनाव से पहले बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार को सत्ता से हटाने के लिए चार प्रमुख विपक्षी दलों ने हाथ मिला लिया है। याशर पार्टी, डेमोक्रेट्स, इजरायल बेइतेनु और टुगेदर गठबंधन ने चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ आक्रामक प्रचार से बचने और नतीजों के बाद सरकार बनाने के लिए सहयोग करने का संकल्प लिया है।

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चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल

26 सितंबर को हस्ताक्षरित समझौते में विपक्षी नेताओं ने आपसी मतभेदों के बावजूद साथ काम करने की प्रतिबद्धता जताई। बैठक में यायर लैपिड, गादी आइजेनकोट, नफ्ताली बेनेट, एविगडोर लिबरमैन और यायर गोलान शामिल हुए। 27 अक्टूबर को प्रस्तावित चुनाव से पहले इजरायल में राजनीतिक मुकाबला तेज हो गया है। हालांकि, विपक्षी एकता के बावजूद बहुमत हासिल करना आसान नहीं दिख रहा।

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सर्वे में किसी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं

चैनल 12 के सर्वे के मुताबिक, याशर पार्टी को 23 सीटें और नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 21 सीटें मिल सकती हैं। टुगेदर गठबंधन को 13, जबकि इजरायल बेइतेनु और डेमोक्रेट्स को नौ-नौ सीटें मिलने का अनुमान है। चार विपक्षी दलों की कुल संभावित सीटें 54 हैं, जबकि 120 सदस्यीय संसद में बहुमत के लिए 61 सीटें जरूरी हैं। नेतन्याहू गठबंधन को 49 सीटें मिलने का अनुमान है।

फिलिस्तीन नीति में बदलाव पर सवाल

विश्लेषकों का मानना है कि नेतन्याहू को सत्ता से हटाना और फिलिस्तीनियों के लिए परिस्थितियां बदलना दो अलग चुनौतियां हैं। विपक्ष के कई नेता पश्चिमी तट में इजरायली बस्तियों के विस्तार का समर्थन करते हैं। गादी आइजेनकोट फिलिस्तीनी राष्ट्र की अवधारणा के आलोचक हैं, जबकि नफ्ताली बेनेट फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना का विरोध करते हैं।

गाजा और पश्चिमी तट पर सख्त रुख

एविगडोर लिबरमैन पश्चिमी तट के बड़े हिस्से को इजरायल में शामिल करने के पक्षधर हैं। इसके विपरीत, यायर गोलान की डेमोक्रेट्स पार्टी दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करती है, हालांकि वह फिलिस्तीनी राज्य के पूर्ण निरस्त्रीकरण और इजरायल के सुरक्षा नियंत्रण की भी वकालत करती है। ऐसे मतभेद भविष्य की सरकार के लिए महत्वपूर्ण फैसलों पर सहमति बनाना कठिन कर सकते हैं।

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नई सरकार के सामने कई चुनौतियां

चुनाव परिणाम, अरब दलों के साथ संभावित सहयोग और गठबंधन की स्थिरता सरकार गठन में निर्णायक हो सकते हैं। फिलिस्तीनी नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले अरब दलों को सर्वे में 13 सीटें मिलने का अनुमान है, लेकिन कई विपक्षी नेता उनके साथ गठबंधन की संभावना से इनकार कर चुके हैं।

सीमित बदलाव भी हो सकते हैं अहम

विश्लेषकों के अनुसार, नई सरकार पश्चिमी तट में विवादित बस्ती परियोजनाओं पर रोक लगाने, बसने वालों की हिंसा पर कार्रवाई करने और गाजा में मानवीय सहायता बढ़ाने जैसे कदम उठा सकती है। हालांकि, फिलिस्तीनियों के अधिकारों और स्वतंत्र राज्य की मांग पर व्यापक बदलाव की संभावना अनिश्चित बनी हुई है। ऐसे में चुनाव केवल नेतन्याहू के भविष्य का नहीं, बल्कि इजरायल की क्षेत्रीय नीतियों का भी अहम फैसला साबित हो सकता है।

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Chandan Das

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