Trump Iran War : मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच यमन के हूती विद्रोहियों, ईरान और सऊदी अरब से जुड़े घटनाक्रम ने ऊर्जा बाजार को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। तेल से जुड़े ठिकानों और बुनियादी ढांचे पर हमलों की आशंका के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हूती समूह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सऊदी अरब के इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाकर तेल की कीमतें बढ़ाने की कोशिश की जा सकती है। इससे अमेरिका में ईंधन की कीमतों और आगामी मध्यावधि चुनावों पर राजनीतिक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
ट्रंप ने हूतियों पर लगाए तेल महंगा करने के आरोप
ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में दावा किया कि हूती विद्रोही लंबे समय तक शांत रहने के बाद दोबारा सक्रिय हुए हैं। उन्होंने आशंका जताई कि यह गतिविधि ईरान के समर्थन या उसके प्रभाव में हो सकती है। ट्रंप के मुताबिक, सऊदी अरब पर हमलों का उद्देश्य अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले ऊर्जा की कीमतों को बढ़ाना भी हो सकता है। हालांकि, हूतियों की मंशा और ईरान की कथित भूमिका को लेकर इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
ईरान को लेकर ट्रंप का कड़ा रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान की सैन्य क्षमताओं और आर्थिक स्थिति की आलोचना करते हुए कहा कि हूती समूह के हमले क्षेत्रीय हालात को और गंभीर बना सकते हैं। उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि चुनावों के बाद अमेरिका मिडिल ईस्ट में सैन्य कार्रवाई तेज करने पर विचार कर सकता है। इस बयान से क्षेत्र में संभावित तनाव बढ़ने की आशंका पैदा हुई है। हालांकि, भविष्य की सैन्य कार्रवाई को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष निकालने से पहले आधिकारिक घोषणाओं और घटनाक्रम पर नजर रखना जरूरी है।
अमेरिका में महंगाई और ईंधन की कीमतें बनी चिंता
तेल की कीमतों में तेजी का असर अमेरिकी परिवारों के बजट पर पड़ सकता है। पेट्रोल, परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत बढ़ने से महंगाई को लेकर लोगों की चिंता गहरा सकती है। लेख में दिए गए घटनाक्रम के अनुसार, ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के बाद ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव ने अमेरिकी राजनीति में भी आर्थिक मुद्दों को अहम बना दिया है। मतदाताओं के लिए ईंधन की कीमतें और जीवनयापन का खर्च चुनावी फैसलों को प्रभावित करने वाले विषय बन सकते हैं।
मध्यावधि चुनावों पर ट्रंप की नजर
अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनावों में राष्ट्रपति की रिपब्लिकन पार्टी के सामने प्रतिनिधि सभा और सीनेट में अपना बहुमत बनाए रखने की चुनौती है। डेमोक्रेटिक पार्टी को उम्मीद है कि युद्ध, महंगाई और ट्रंप की घटती लोकप्रियता से जुड़ी चिंताओं का उसे फायदा मिल सकता है। यदि डेमोक्रेट्स एक या दोनों सदनों में बढ़त हासिल करते हैं, तो राष्ट्रपति के शेष कार्यकाल में उनके विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाना कठिन हो सकता है।
सर्वेक्षणों में युद्ध को लेकर असंतोष का दावा
रिपोर्ट में AP-NORC सर्वेक्षण का हवाला देते हुए कहा गया है कि करीब 70 प्रतिशत लोगों का मानना था कि ईरान के खिलाफ युद्ध लड़ने लायक नहीं था। ट्रंप ने अपने खिलाफ आए सर्वेक्षणों को गलत बताया और रैलियों में जुटने वाली भीड़ को अपने समर्थन का प्रमाण बताया। इस बीच उन्होंने हूतियों को संदेश दिया कि वे यह न समझें कि वह चुनाव लड़ रहे हैं; उनका कहना था कि चुनाव के बाद भी वह क्षेत्रीय घटनाक्रम पर नजर रखेंगे।
तेल, युद्ध और राजनीति का जुड़ाव
मिडिल ईस्ट में सुरक्षा हालात, तेल की आपूर्ति और अमेरिकी घरेलू राजनीति एक-दूसरे से जुड़ते दिखाई दे रहे हैं। आने वाले दिनों में हमलों, तेल बाजार और अमेरिकी सरकार के फैसलों पर दुनिया की नजर रहेगी।
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