Balod Police : छत्तीसगढ़ के बालोद जिला मुख्यालय और आसपास के रिहायशी इलाकों में संदिग्ध गतिविधियों को लेकर पुलिस ने तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, तीनों उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और भगवा वस्त्र पहनकर इलाके में घूमते हुए भिक्षा मांग रहे थे। पकड़े गए लोगों में पिता-पुत्र भी शामिल हैं। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और क्षेत्र में शांति कायम रखने के उद्देश्य से तीनों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की है। न्यायालय में पेश किए जाने के बाद उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
तीन दिनों से शहर और आसपास के इलाकों में घूम रहे थे
पुलिस से मिली अधिकृत जानकारी के मुताबिक, तीनों व्यक्ति पिछले तीन दिनों से बालोद के सदर रोड, अंदरूनी बस्तियों और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में घूम रहे थे। वे भगवा वस्त्र धारण कर लोगों से भिक्षा मांग रहे थे। गश्त और निगरानी के दौरान पुलिस को उनकी गतिविधियां संदिग्ध लगीं। इसके बाद पुलिस ने उनसे पूछताछ की और उनके आने, ठहरने तथा स्थानीय स्तर पर पंजीयन से संबंधित जानकारी जुटाई।
मुसाफिरनामा दर्ज नहीं कराने की बात आई सामने
प्रारंभिक पूछताछ में पुलिस को पता चला कि तीनों व्यक्ति दूसरे राज्यों से बालोद पहुंचे थे। पुलिस के अनुसार, जिले में आने के बाद उन्होंने स्थानीय थाने में नियमानुसार मुसाफिरनामा यानी आगंतुक पंजीयन नहीं कराया था। उनके ठहरने के स्थान और बालोद आने के उद्देश्य को लेकर पूछताछ की गई। पुलिस का कहना है कि तीनों संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसके बाद संदेह के आधार पर दो व्यक्तियों को सदर रोड और एक को सिवनी क्षेत्र से अभिरक्षा में लिया गया।
उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं तीनों व्यक्ति
पुलिस ने गिरफ्तार व्यक्तियों की पहचान उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के खोरमपुर गांव निवासी विद्यासागर (41), पिता बसंतलाल और उनके 18 वर्षीय पुत्र कृष्ण सागर के रूप में की है। तीसरे व्यक्ति की पहचान उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के पकड़ी रवदुपुर गांव निवासी अतुल पाण्डेय (41), पिता आत्माराम पाण्डेय के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि पूछताछ के दौरान तीनों अपने प्रवास और बिना स्थानीय सत्यापन घूमने के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके।
BNSS की धाराओं के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई
बालोद पुलिस ने तीनों व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 170, 126 और 135(3) के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की। आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय के आदेश पर तीनों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। पुलिस की ओर से इस कार्रवाई को क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने और संभावित अप्रिय घटनाओं की रोकथाम के उद्देश्य से की गई कार्रवाई बताया गया है।
आम नागरिकों और मकान मालिकों से पुलिस की अपील
इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन ने नागरिकों, व्यापारियों और मकान मालिकों से सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस ने कहा है कि अनजान व्यक्तियों को आश्रय देने से पहले उनकी पहचान की जांच करना जरूरी है। किराएदारों और बाहरी कामगारों का पुलिस सत्यापन कराने की भी सलाह दी गई है।
संदिग्ध गतिविधि दिखने पर 112 पर दें सूचना
पुलिस के मुताबिक, यदि कोई अजनबी, साधु के वेश में घूमने वाला व्यक्ति, फेरीवाला या घरेलू कामगार संदिग्ध गतिविधि करता दिखाई दे, तो इसकी जानकारी नजदीकी थाने या आपातकालीन हेल्पलाइन 112 पर दी जा सकती है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी व्यक्ति के पहनावे या बाहरी पहचान के बजाय उसकी वास्तविक गतिविधियों के आधार पर सतर्कता बरतें और किसी भी संदिग्ध स्थिति की सूचना कानून प्रवर्तन एजेंसियों को दें।
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