Rupee Recovery : भारतीय करेंसी में सुधार का सिलसिला गुरुवार को भी जारी रहा। शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 31 पैसे मजबूत होकर 94.86 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया। घरेलू मुद्रा को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप और नकदी को सख्त करने के उपायों से समर्थन मिला। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 94.95 प्रति डॉलर पर खुला था। कारोबार आगे बढ़ने के साथ इसमें मजबूती आई और यह 94.86 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गया। हालिया उतार-चढ़ाव के बीच रुपये की यह तेजी बाजार के लिए अहम मानी जा रही है।
बुधवार को भी मजबूत हुआ था रुपया
इससे पहले बुधवार को भी भारतीय करेंसी में सुधार देखने को मिला था। पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 19 पैसे मजबूत होकर 95.17 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। लगातार दो कारोबारी सत्रों में आई मजबूती से रुपये को कुछ राहत मिली है। हालांकि, विदेशी मुद्रा बाजार में आगे की दिशा कई कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें अमेरिकी डॉलर की चाल, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और रिजर्व बैंक की नीतियां प्रमुख हैं। इसलिए शुरुआती मजबूती को रुपये की स्थायी रिकवरी मानने से पहले बाजार के अगले रुझानों पर नजर रखना जरूरी होगा।
डॉलर इंडेक्स में गिरावट से घरेलू मुद्रा को सहारा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर की कमजोरी भी रुपये के लिए मददगार रही। छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति बताने वाला डॉलर इंडेक्स 0.54 प्रतिशत गिरकर 101.99 पर आ गया। डॉलर इंडेक्स में गिरावट से अन्य मुद्राओं को अपेक्षाकृत राहत मिल सकती है। इसी बीच, अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड का वायदा भाव 1.66 प्रतिशत घटकर 104.30 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है, इसलिए तेल की कीमतों में कमी से आयात बिल और डॉलर की मांग पर दबाव कम होने की संभावना रहती है। हालांकि, वास्तविक असर कीमतों के आगे के रुख पर निर्भर करेगा।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली बनी चिंता
रुपये में मजबूती के बावजूद विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। उपलब्ध शेयर बाजार आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध रूप से 1,857.44 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से बाजार में पूंजी के प्रवाह पर असर पड़ सकता है और डॉलर की मांग बढ़ने की आशंका भी रहती है। ऐसे माहौल में रुपये की चाल पर घरेलू नीतियों के साथ-साथ वैश्विक निवेश रुझानों का भी प्रभाव पड़ सकता है।
RBI के अगले कदमों पर बाजार की नजर
करेंसी बाजार के जानकारों के मुताबिक, अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि रुपये को सहारा देने के लिए RBI आगे किस स्तर तक हस्तक्षेप करता है। केंद्रीय बैंक ने डॉलर की मांग और सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए कई उपाय किए हैं। इनमें विदेशी मुद्रा बाजार में सीधे डॉलर की बिक्री भी शामिल रही है। एक बैंक के करेंसी ट्रेडर के अनुसार, बाजार यह देख रहा है कि रिजर्व बैंक आगे कितनी सक्रियता दिखाता है और रुपये को मजबूत होने के लिए कितनी गुंजाइश मिलती है। पिछले कारोबारी सत्र में 95 रुपये प्रति डॉलर के स्तर से नीचे आने की कोशिश के दौरान रुपये को बाधाओं का सामना करना पड़ा था।
RBI के उपायों का कारोबार पर क्या असर होगा?
10 अक्टूबर को RBI ने विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की सट्टा और एहतियाती मांग घटाने के उद्देश्य से कई कदम उठाए थे। इनमें बैंकों की विदेशी मुद्रा स्थिति पर सीमा सख्त करना, रद्द किए गए कॉन्ट्रैक्ट को दोबारा बुक करने पर रोक लगाना और तेल कंपनियों के लिए डॉलर की सीधी उपलब्धता खोलना शामिल है। इन उपायों से मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, कंपनियों के लिए विदेशी मुद्रा जोखिम से बचाव यानी हेजिंग की लागत अब भी महत्वपूर्ण चिंता है। आने वाले सत्रों में रुपये की दिशा RBI की नीति, डॉलर की चाल, कच्चे तेल के भाव और विदेशी निवेश के रुझान से प्रभावित हो सकती है।
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