Chhattisgarh News : छत्तीसगढ़ में आम जनता को मिलने वाली अत्यावश्यक सेवाओं का संचालन सुचारू बनाए रखने और इनमें किसी भी तरह की बाधा रोकने के लिए कानूनी प्रावधानों को और प्रभावी बनाने की तैयारी चल रही है। इसके लिए छत्तीसगढ़ अत्यावश्यक सेवा संधारण तथा विच्छिन्नता निवारण संशोधन विधेयक, 2026 के विभिन्न प्रावधानों पर शासन स्तर पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में वरिष्ठ सचिवों की उच्चस्तरीय समिति की बैठक हुई। इसमें प्रस्तावित संशोधनों और उनके क्रियान्वयन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की समीक्षा की गई।
1979 के अधिनियम में प्रस्तावित बदलावों पर चर्चा
बैठक में आवश्यक जनसेवाओं में व्यवधान रोकने, प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत करने और व्यवस्था में अनुशासन बनाए रखने से संबंधित कानूनी प्रावधानों पर चर्चा हुई। समिति ने वर्ष 1979 के अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों के विभिन्न बिंदुओं की समीक्षा की। इस दौरान आवश्यक सेवाओं के दायरे को स्पष्ट करने और कानूनी प्रक्रिया को त्रुटिरहित बनाने पर जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने कहा कि आम नागरिकों को मिलने वाली बुनियादी और अत्यावश्यक सुविधाओं में किसी भी स्थिति में बाधा नहीं आनी चाहिए। इसके लिए कानून को वर्तमान जरूरतों के अनुरूप प्रभावी बनाना जरूरी है।
संबंधित विभागों को प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश
मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को विधिक और प्रशासनिक औपचारिकताएं शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए। बैठक में गृह, विधि, वित्त, सामान्य प्रशासन, स्कूल शिक्षा और कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य आवश्यक सेवाओं के संचालन में आने वाली बाधाओं को रोकने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना है। हालांकि, विधेयक के अंतिम स्वरूप, लागू होने की तारीख और प्रस्तावित प्रावधानों के विस्तृत विवरण को लेकर आगे की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
बिलासपुर के दो बड़े अस्पताल PPP मॉडल पर चलाने की तैयारी
छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर चर्चा हुई। बिलासपुर के कोनी स्थित सिम्स मेडिकल कैंपस में बने 240 बिस्तरों वाले सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और 100 बिस्तरों वाले स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के संचालन तथा रखरखाव की जिम्मेदारी निजी संस्था को सौंपने की तैयारी है। इन दोनों अस्पतालों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत 10 वर्षों तक संचालित करने का प्रस्ताव रखा गया है। बुधवार को इस योजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया।
एक लाइसेंस समझौते के तहत होगा संचालन
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मूल्यांकन समिति (PPPAC) की बैठक में दोनों अस्पतालों को एक ही लाइसेंस समझौते के तहत संचालित करने के प्रस्ताव की समीक्षा हुई। योजना के अनुसार, अस्पतालों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी निजी संस्था को दी जा सकती है। इस व्यवस्था के तहत स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन बेहतर बनाने और अस्पतालों की सुविधाओं को व्यवस्थित रखने पर ध्यान दिया जाएगा। हालांकि, प्रस्ताव के अंतिम क्रियान्वयन और निजी संस्था के चयन से संबंधित विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
सरकारी योजनाओं के मरीजों के लिए बिस्तर आरक्षित रहेंगे
प्रस्ताव में यह भी स्पष्ट किया गया है कि आयुष्मान भारत जैसी सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के हितग्राहियों और निश्शुल्क उपचार पाने वाले मरीजों के लिए बिस्तर आरक्षित रखे जाएंगे। वहीं, भुगतान करने वाले मरीजों के उपचार के लिए अधिकतम 20 प्रतिशत बिस्तरों का इस्तेमाल किया जा सकेगा। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में हृदय रोग, न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, किडनी और मूत्र रोगों के उपचार की सुविधा उपलब्ध होगी। इस प्रस्ताव का आगे का स्वरूप तय होने के बाद बिलासपुर में विशेष चिकित्सा सुविधाओं के संचालन और मरीजों को मिलने वाली सेवाओं से जुड़ी स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।
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