Ankita Bhandari Case : उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर गुरुवार, 15 अक्टूबर को कांग्रेस ने लोक भवन के बाहर प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत समेत पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने अंकिता भंडारी मामले को लेकर अपनी मांगें उठाईं और कार्रवाई की मांग करते हुए विरोध जताया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने हरीश रावत सहित कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के बाद प्रदेश की राजनीति में मामले को लेकर फिर से हलचल तेज हो गई है।
हिरासत के बाद हरीश रावत ने दिया बड़ा बयान
पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि पुलिस को किसी प्रदर्शनकारी को हिरासत में लेने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि यह पुलिस का विशेषाधिकार है और उसने अपने अधिकारों का इस्तेमाल किया है। हालांकि, रावत ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस अपने अगले कदम का फैसला खुद करेगी। उनके मुताबिक, पार्टी यह तय करेगी कि अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर आंदोलन को किस दिशा में आगे बढ़ाना है। उन्होंने संकेत दिया कि हिरासत में रहने के बावजूद पार्टी की रणनीति तैयार करने का काम जारी रहेगा।
पुलिस स्टेशन या जेल से बनेगी आंदोलन की रणनीति
हरीश रावत ने अपने बयान में कहा कि कांग्रेस आगे की रणनीति पुलिस स्टेशन से बनाएगी या जेल से, इसका फैसला परिस्थितियों के अनुसार किया जाएगा। उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि पार्टी अंकिता भंडारी मामले को लेकर अपना विरोध जारी रखने के पक्ष में है। हालांकि, कांग्रेस की ओर से आगामी प्रदर्शन, आंदोलन या अन्य कार्यक्रमों के बारे में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। लोक भवन के बाहर हुए प्रदर्शन और नेताओं की हिरासत के बाद अब पार्टी के अगले कदम पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं।
क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड?
अंकिता भंडारी उत्तराखंड के पौड़ी जिले की रहने वाली 19 वर्षीय युवती थीं। वह ऋषिकेश के पास स्थित वनंतरा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे उत्तराखंड में व्यापक आक्रोश पैदा किया था। मामले के सामने आने के बाद महिलाओं की सुरक्षा, कार्यस्थलों पर युवतियों की स्थिति और जांच की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। घटना को लेकर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की गई।
तीन आरोपियों को मिली थी आजीवन कारावास की सजा
इस मामले में पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद तीन आरोपियों को दोषी ठहराया गया। जून 2025 में कोटद्वार की अदालत ने तीनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि, सजा सुनाए जाने के बाद भी अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर समय-समय पर विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं। कांग्रेस का ताजा प्रदर्शन भी इसी मामले को लेकर जारी बहस का हिस्सा है। पार्टी नेताओं की हिरासत के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस आगे आंदोलन को लेकर क्या फैसला करती है और मामले में अपनी मांगों को किस तरह उठाती है।
कांग्रेस के अगले कदम पर टिकी निगाहें
देहरादून में लोक भवन के बाहर हुए प्रदर्शन ने अंकिता भंडारी मामले को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। हरीश रावत ने साफ किया है कि पार्टी आगे की रणनीति स्वयं तय करेगी। फिलहाल प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए नेताओं और कार्यकर्ताओं के संबंध में आगे की कार्रवाई तथा कांग्रेस के आगामी कार्यक्रमों पर नजर बनी हुई है।
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