Election Commission SSR : भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने देश के 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के विशेष सारांश पुनरीक्षण (SSR) की घोषणा की है। आयोग की ओर से गुरुवार को जारी नोटिस के अनुसार, यह प्रक्रिया जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 के तहत संचालित की जाएगी। इस पुनरीक्षण के लिए 1 जनवरी 2027 को पात्रता तिथि निर्धारित किया गया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और पात्र नागरिकों को मतदान के अधिकार से जोड़ना है।
उत्तर प्रदेश समेत इन राज्यों में चलेगा SSR अभियान
चुनाव आयोग की घोषणा के अनुसार, इस विशेष पुनरीक्षण में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर, गोवा, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। इसके अलावा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप तथा पुडुचेरी में भी मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण किया जाएगा। इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाताओं के नाम, विवरण और पात्रता से संबंधित रिकॉर्ड को अद्यतन करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
SIR विवाद के बीच आयोग का बड़ा फैसला
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब देश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। विपक्षी दल इस प्रक्रिया की पारदर्शिता, मतदाताओं के नाम हटाए जाने और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। इस बीच आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया चल रही है या हाल ही में पूरी हुई है, वहां SSR का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा। इससे दोनों प्रक्रियाओं की समय-सारिणी को लेकर अलग-अलग राज्यों में आगे की स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है।
राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में उठाया मामला
SIR प्रक्रिया के खिलाफ विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 12 अक्टूबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर मार्च किया था। इसके बाद मतदाता सूची संशोधन की वैधता और प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर याचिका दायर की गई। इस याचिका में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस नेता सौगत रॉय, RJD नेता तेजस्वी प्रसाद यादव और शिवसेना (UBT) के संजय राउत सहित कई विपक्षी नेताओं ने भाग लिया।
मतदाता सूची से नाम हटाने पर पारदर्शिता की मांग
याचिका में चुनाव आयोग से संशोधन प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक करने और हटाए गए मतदाताओं का विवरण उपलब्ध कराने की मांग की गई है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया के दौरान मनमानी की आशंका को दूर करने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय जरूरी हैं। उन्होंने पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने और पूरी प्रक्रिया का न्यायिक ऑडिट कराने की मांग भी उठाई है।
सभी राज्यों में SIR रोकने की मांग
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से अनुरोध किया है कि मामले का अंतिम निर्णय आने तक सभी राज्यों में SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने पर विचार किया जाए। अब SSR की घोषणा और SIR को लेकर चल रही कानूनी चुनौती के बीच चुनावी प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है। हालांकि, SSR का कार्यक्रम संबंधित राज्यों में बाद में घोषित होने की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी। मतदाताओं के लिए आगामी प्रक्रिया में अपने नाम और व्यक्तिगत विवरण की जांच करना अहम रहेगा, ताकि पात्र नागरिक मताधिकार से वंचित न रहें।
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