Tamil Nadu Political Funding : तमिलनाडु की राजनीति में राजनीतिक चंदे को लेकर एक अहम खुलासा सामने आया है। कोलकाता की लॉटरी कंपनी टाइगर एसोसिएट्स ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान राज्य की दो प्रमुख प्रतिद्वंद्वी पार्टियों—द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK)—को कुल 260 करोड़ रुपये का चंदा दिया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, यह रकम पिछले वित्त वर्ष में दोनों दलों को कंपनी से मिले 110 करोड़ रुपये के मुकाबले दोगुने से भी अधिक है।
दोनों दलों की फंडिंग में कंपनी की बड़ी हिस्सेदारी
निर्वाचन आयोग को सौंपी गई रिपोर्टों के मुताबिक, DMK और AIADMK ने वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 352.55 करोड़ रुपये का चंदा मिलने की जानकारी दी। इसमें से करीब 260 करोड़ रुपये टाइगर एसोसिएट्स से आए। यानी दोनों पार्टियों को मिले कुल चंदे का लगभग 74 प्रतिशत हिस्सा एक ही कंपनी से प्राप्त हुआ। इन आंकड़ों ने राजनीतिक दलों की फंडिंग में बड़े दानदाताओं की भूमिका और चंदे के स्रोतों को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
AIADMK को मिले 135 करोड़ रुपये
रिपोर्ट के अनुसार, टाइगर एसोसिएट्स ने वित्त वर्ष 2025-26 में AIADMK को छह अलग-अलग किस्तों में 135 करोड़ रुपये दिए। पार्टी को इस अवधि में कुल 161.36 करोड़ रुपये का चंदा मिला था। इस हिसाब से कंपनी का योगदान पार्टी की घोषित चंदा राशि का लगभग 84 प्रतिशत बैठता है। आंकड़े बताते हैं कि AIADMK की फंडिंग में इस एक दानदाता की हिस्सेदारी काफी बड़ी रही।
DMK को 14 किस्तों में मिला 125 करोड़ का चंदा
दूसरी ओर, सत्तारूढ़ DMK को टाइगर एसोसिएट्स ने 14 किस्तों में कुल 125 करोड़ रुपये दिए। पार्टी की रिपोर्ट के अनुसार, उसे वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 191.19 करोड़ रुपये का चंदा प्राप्त हुआ। इस तरह कंपनी से मिली राशि DMK के कुल घोषित चंदे के 65 प्रतिशत से अधिक है। दोनों पार्टियों को दी गई रकम में अंतर होने के बावजूद, उनकी फंडिंग में एक ही कंपनी की महत्वपूर्ण भूमिका दिखाई देती है।
दो साल में 370 करोड़ रुपये का योगदान
टाइगर एसोसिएट्स ने वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों दलों को मिलाकर 110 करोड़ रुपये दिए थे। इसके बाद 2025-26 में कंपनी का योगदान बढ़कर 260 करोड़ रुपये हो गया। दोनों वर्षों को मिलाकर कंपनी द्वारा DMK और AIADMK को दिया गया कुल चंदा 370 करोड़ रुपये बताया गया है। इस वृद्धि ने राजनीतिक चंदे की मात्रा और उसके वितरण को लेकर सवालों को नई दिशा दी है।
सैंटियागो मार्टिन से जुड़ाव ने बढ़ाई चर्चा
टाइगर एसोसिएट्स का संबंध लॉटरी कारोबारी सैंटियागो मार्टिन के कारोबारी नेटवर्क से बताया जाता है। कंपनी के निर्धारित साझेदार सुब्बयन नागराजन को मार्टिन का पुराना सहयोगी बताया गया है। कॉर्पोरेट रिकॉर्ड के अनुसार, दोनों एक अन्य कंपनी में भी साझेदार हैं। हालांकि, किसी कारोबारी संबंध या राजनीतिक चंदे के आधार पर अपने आप किसी तरह की अनियमितता साबित नहीं होती।
चुनावी बॉन्ड विवाद के बाद फिर उठे पारदर्शिता के सवाल
फरवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक ठहराते हुए रद्द कर दिया था। इससे पहले मार्टिन की कंपनी फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज चुनावी बॉन्ड खरीदने वाली सबसे बड़ी कंपनी के रूप में सामने आई थी। अब मार्टिन के कारोबारी नेटवर्क से जुड़ी टाइगर एसोसिएट्स द्वारा तमिलनाडु के दोनों प्रमुख दलों को बड़ी रकम दिए जाने के आंकड़ों ने राजनीतिक फंडिंग की पारदर्शिता पर बहस फिर तेज कर दी है। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि दोनों दलों के घोषित चंदे में कंपनी की अहम हिस्सेदारी रही, लेकिन इसके राजनीतिक प्रभाव या किसी संभावित अनियमितता के बारे में निष्कर्ष निकालने के लिए अतिरिक्त प्रमाण आवश्यक होंगे।
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