Navratri 2026 : शारदीय नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इन नौ दिनों में भक्त उपवास रखते हैं और माता रानी की पूजा-अर्चना करते हैं। महाष्टमी और महानवमी पर हवन, कन्या पूजन और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व बढ़ जाता है। वर्ष 2026 में महाष्टमी और महानवमी की पूजा 19 अक्टूबर को तथा दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इन पावन तिथियों पर पूजा के साथ दीपक जलाने की परंपरा भी प्रचलित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धापूर्वक पूजा करने से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।
अष्टमी-नवमी पर दीपक जलाना क्यों माना जाता है शुभ?
हिंदू धर्म में दीपक को प्रकाश, शुभता और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि की अष्टमी और नवमी पर मां दुर्गा की पूजा के साथ घर के कुछ विशेष स्थानों पर दीपक जलाने की परंपरा है। मान्यता है कि मुख्य द्वार, तुलसी के पौधे, रसोई, धन रखने की जगह और पीपल के पेड़ के पास दीपक जलाकर परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की जाती है। कुछ धार्मिक परंपराओं में दीपदान को ग्रहों की शांति की कामना से भी जोड़ा जाता है। आइए जानते हैं, इन पांच स्थानों पर दीपक जलाने से जुड़ी मान्यताएं।
1. घर के मुख्य द्वार पर जलाएं दीपक
नवरात्रि की अष्टमी और नवमी की शाम घर के मुख्य द्वार के पास दीपक जलाना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मुख्य द्वार पर दीपक रखने से घर में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि बनी रहने की प्रार्थना की जाती है। इस परंपरा को निभाते समय दीपक किसी स्थिर और सुरक्षित स्थान पर रखें। ध्यान दें कि दरवाजे से आने-जाने वालों को परेशानी न हो और आग लगने का खतरा भी न रहे।
2. तुलसी के पौधे के पास करें दीपदान
हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को पूजनीय स्थान प्राप्त है। अनेक घरों में सुबह या शाम तुलसी के पास दीपक जलाने की परंपरा निभाई जाती है। नवरात्रि की अष्टमी और नवमी पर भी तुलसी के पास दीपक जलाकर परिवार की सुख-शांति और खुशहाली की कामना की जा सकती है। दीपक रखते समय उसकी लौ को पौधे की पत्तियों और शाखाओं से दूर रखें, ताकि गर्मी से तुलसी को नुकसान न पहुंचे।
3. रसोई में दीपक जलाने की धार्मिक मान्यता
धार्मिक मान्यताओं में रसोई को मां अन्नपूर्णा से जोड़कर देखा जाता है। मां अन्नपूर्णा को अन्न और भोजन की देवी माना जाता है। इसलिए अष्टमी और नवमी पर रसोई की किसी साफ जगह पर दीपक जलाकर घर में अन्न की बरकत और खुशहाली की प्रार्थना की जाती है। कुछ परंपराओं में पानी रखने की जगह के पास दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है। हालांकि, दीपक को गैस चूल्हे, तेल, पर्दों और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखना चाहिए।
4. तिजोरी या धन रखने की जगह पर जलाएं दीया
नवरात्रि की अष्टमी और नवमी पर तिजोरी या धन रखने वाली जगह के पास दीपक जलाने की परंपरा आर्थिक समृद्धि की कामना से जुड़ी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करके परिवार में सुख-समृद्धि और आर्थिक खुशहाली की प्रार्थना की जाती है। नौकरीपेशा लोग और व्यापारी भी इस परंपरा का पालन कर सकते हैं। सुरक्षा के लिए दीपक को तिजोरी के अंदर, नकदी, कागजों या कपड़ों के पास न रखें। इसे सुरक्षित दूरी पर जलाएं।
5. पीपल के पेड़ के पास जलाएं दीपक
हिंदू धर्म में पीपल के पेड़ को पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, नवरात्रि की अष्टमी या नवमी की शाम पीपल के पास सरसों के तेल का दीपक जलाया जा सकता है। कुछ परंपराओं में इसे शनि सहित अन्य ग्रहों के अशुभ प्रभावों की शांति की कामना से जोड़ा जाता है। दीपक जलाते समय पेड़ की जड़ों, सूखे पत्तों और आसपास मौजूद ज्वलनशील चीजों का ध्यान रखें।
दीपक जलाते समय सुरक्षा का रखें ध्यान
अष्टमी और नवमी पर दीपक जलाना धार्मिक आस्था और पारंपरिक पूजा का हिस्सा है। इन उपायों के फल को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हो सकती हैं। दीपक को स्थिर स्थान पर रखें, बच्चों की पहुंच से दूर रखें और उसे जलता हुआ छोड़कर न जाएं।
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