Kolkata Durga Puja Stampede : पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान चोरबागान पूजा पंडाल में भगदड़ जैसी स्थिति पैदा होने की खबर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस हादसे में कम से कम 17 लोगों की मौत हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों ने घटना के दौरान मची अफरा-तफरी और लोगों को हुई परेशानियों के बारे में बताया। पुलिस के अनुसार, बारिश शुरू होने के बाद पंडाल के बाहर इंतजार कर रही भीड़ अचानक आगे बढ़ने लगी। इस दौरान कुछ लोग सड़क पर गिर पड़े, जिसके बाद हालात बिगड़ गए।
बारिश शुरू होते ही बढ़ा भीड़ का दबाव
पुलिस की शुरुआती जानकारी के मुताबिक, चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल के बाहर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। बारिश शुरू होने के बाद भीड़ में अचानक हलचल बढ़ी और लोग आगे की ओर बढ़ने लगे। इसी दौरान धक्का-मुक्की हुई और कुछ लोग जमीन पर गिर गए। भीड़ का दबाव इतना बढ़ गया कि कई लोगों को संभलने और उठने का मौका नहीं मिला। हालांकि, हादसे के सटीक कारणों और घटनाक्रम की विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
प्रत्यक्षदर्शी ने सुनाई दर्दनाक आपबीती
एबीपी न्यूज से बातचीत में एक युवक ने बताया कि वह अपने तीन दोस्तों के साथ वहां मौजूद था। उसके मुताबिक, बाहर तेज बारिश हो रही थी और लोग आगे बढ़ रहे थे। तभी पीछे से अचानक धक्का लगा और आगे चल रहे लोग गिरने लगे। युवक ने बताया कि देखते ही देखते लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरते चले गए। जमीन पर गिरे लोगों के लिए उठना मुश्किल हो गया था। उसने यह भी कहा कि भीड़ के कारण वह अपने दोस्तों को बाहर निकालने में असमर्थ था।
बेहोश हुए लोग, स्थानीय लोगों ने की मदद
एएनआई से बातचीत में एक अन्य युवक ने बताया कि पंडाल के आसपास भारी भीड़ और धक्का-मुक्की के कारण कई लोग बेहोश हो गए थे। कुछ प्रभावित लोगों को बाइक से ले जाने की बात भी सामने आई। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि सांस लेना भी मुश्किल हो रहा था। उसके अनुसार, स्थानीय लोगों ने पंडाल के दूसरी तरफ से एक हिस्सा तोड़कर लोगों को बाहर निकालने में मदद की।
40 मिनट तक सांस लेने में हुई परेशानी
एबीपी आनंदा के मुताबिक, एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि उसे करीब 40 से 45 मिनट तक सांस लेने में दिक्कत हुई। उसने कहा कि वह खुद को भीड़ से बाहर नहीं निकाल पा रहा था। कुछ लोग उसका हाथ और घड़ी पकड़कर खींच रहे थे। आखिरकार, स्थानीय लोगों ने पंडाल का एक हिस्सा तोड़ा, जिसके बाद कई लोग बाहर निकल सके।
एंबुलेंस और पुलिस व्यवस्था पर उठे सवाल
एक महिला ने आरोप लगाया कि घटनास्थल पर पर्याप्त पुलिस और एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं थी। उसने बताया कि कई गाड़ियां वहां फंस गई थीं और स्थानीय लोग अपने निजी वाहनों से मदद के लिए पहुंचे। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने भीड़ प्रबंधन में कथित लापरवाही पर सवाल उठाए। एक युवक ने दावा किया कि लोगों को शव निजी वाहनों से ले जाने पड़े। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
अस्पताल पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी
घटना की जानकारी मिलने के बाद पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के अस्पताल पहुंचने की बात कही गई है। हादसे के बाद राहत और चिकित्सा सहायता की व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित किया गया। फिलहाल, मृतकों की संख्या, घायलों की स्थिति और सुरक्षा इंतजामों को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। घटना ने बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन निकासी की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
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