AAP attack on Modi: आम आदमी पार्टी (AAP) के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया राष्ट्र के नाम संबोधन को लेकर गंभीर आपत्तियां जताईं हैं। भारद्वाज ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का यह संबोधन उम्मीद के मुताबिक प्रभावी नहीं था और खासकर अमेरिका द्वारा H-1B वीजा आवेदकों को प्रायोजित करने वाली कंपनियों से शुल्क बढ़ाने तथा टैरिफ लगाने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर कोई उल्लेख नहीं किया गया।

मोदी के राष्ट्र के नाम संदेश पर सवाल
सौरभ भारद्वाज ने कहा, “ऐसा लग रहा था कि प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा H-1B वीजा आवेदकों को प्रायोजित करने वाली कंपनियों से फीस को 100,000 डॉलर तक बढ़ाने और नए टैरिफ लगाने जैसे संवेदनशील मुद्दों पर कुछ कहेंगे, लेकिन उन्होंने इन पर चुप्पी साध ली।” भारद्वाज ने GST की खबर को पुरानी बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का यह संबोधन बहुत पीछे की बातों पर केंद्रित था।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्र के नाम संदेश को शाम 5 बजे जारी किया, जो सामान्यत: 8 बजे होता है, और इसका कारण भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले क्रिकेट मैच से ध्यान हटाना लग रहा है।
विदेश नीति पर उठाए सवाल
सौरभ भारद्वाज ने भारत की वर्तमान विदेश नीति को “काफी खराब” करार दिया। उनका कहना था कि हाल के घटनाक्रम और प्रधानमंत्री के संबोधन ने आम जनता के मन में उदासीनता पैदा कर दी है। भारद्वाज ने यह भी कहा कि सरकार को विदेश नीति के संवेदनशील मुद्दों पर अधिक स्पष्टता और कूटनीतिक मजबूती दिखानी होगी।
जनता में बढ़ रही है उदासीनता
AAP के दिल्ली अध्यक्ष ने कहा कि सरकार की नीतियों और विदेश नीति की कमजोरी के कारण आम जनता में अब एक उदासीनता और निराशा देखी जा रही है। उन्होंने कहा कि नेताओं को इस भावनात्मक दूरी को समझते हुए जनता के विश्वास को पुनः प्राप्त करने के लिए गंभीर प्रयास करने होंगे।

राजनीतिक गलियारे में उठे सवाल
सौरभ भारद्वाज की यह टिप्पणी बीजेपी सरकार के लिए एक चुनौती के रूप में देखी जा रही है। विपक्ष ने लंबे समय से केंद्र सरकार की विदेश नीति, विशेषकर अमेरिका और पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों को लेकर सवाल उठाए हैं। इस संबोधन के बाद विपक्ष की नाराजगी और तेज हुई है।
प्रधानमंत्री मोदी के राष्ट्र के नाम संदेश ने जनता में मिश्रित प्रतिक्रिया जगाई है। जहां सरकार ने अपने कार्यों को लेकर बात की, वहीं विपक्ष के नेताओं ने इसे अपूर्ण और असंतोषजनक बताया। सौरभ भारद्वाज की टिप्पणी इस बात का संकेत है कि राजनीतिक दलों के बीच विदेश नीति और आर्थिक मुद्दों को लेकर बहस और गहराने वाली है।
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