Iran-US Crisis
Iran-US Crisis: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की हालिया कूटनीतिक सक्रियता ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 को अराघची एक बार फिर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचे। पिछले महज 48 घंटों के भीतर यह उनकी तीसरी पाकिस्तान यात्रा है। रूस के महत्वपूर्ण दौरे के तुरंत बाद की जा रही यह यात्रा इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पर्दे के पीछे किसी बड़े कूटनीतिक समझौते की तैयारी चल रही है।
अब्बास अराघची का बार-बार पाकिस्तान आना इस ओर इशारा करता है कि इस्लामाबाद इस समय मध्यस्थ या ‘शांति दूत’ की एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच दशकों से जारी कड़वाहट और हालिया सैन्य तनाव को देखते हुए, दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष संवाद के लिए पाकिस्तान एक सुरक्षित सेतु का कार्य कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अराघची अपनी इन यात्राओं के माध्यम से वाशिंगटन तक कोई ठोस प्रस्ताव पहुंचाना चाहते हैं, जिसमें पाकिस्तान की भूमिका एक निष्पक्ष गवाह और संचारक की है।
पाकिस्तान पहुंचने से पहले अराघची रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में थे, जहां उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ करीब डेढ़ घंटे तक सघन चर्चा की। इस उच्च स्तरीय बैठक में न केवल ईरान-रूस के द्विपक्षीय संबंधों पर बात हुई, बल्कि पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में अमेरिका और इजरायल की बढ़ती दखलअंदाजी पर भी चिंता जताई गई। अराघची ने रूस को ईरान का “रणनीतिक साझेदार” बताते हुए कठिन समय में मॉस्को के समर्थन की सराहना की। दूसरी ओर, पुतिन ने भी क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए रूस की ओर से हर संभव मदद का भरोसा दिया है।
कूटनीतिक गलियारों में सबसे बड़ी हलचल वॉशिंगटन डी.सी. से आ रही है। व्हाइट हाउस ने इस बात की पुष्टि की है कि ईरान की ओर से एक विशेष शांति प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ इस प्रस्ताव के हर पहलू का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं। इस प्रस्ताव में न केवल वर्तमान संघर्ष को समाप्त करने की बात कही गई है, बल्कि वैश्विक व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने का वादा भी शामिल है।
ईरान के इस नए प्रस्ताव में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक लचीलापन देखने को मिला है। सूत्रों के अनुसार, ईरान ने सुझाव दिया है कि फिलहाल युद्ध विराम और व्यापारिक मार्गों को बहाल करने पर ध्यान केंद्रित किया जाए, जबकि जटिल ‘परमाणु वार्ता’ को भविष्य के दूसरे चरण के लिए टाल दिया जाए। यह कदम अमेरिका के लिए आकर्षक हो सकता है क्योंकि इससे कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में स्थिरता आएगी।
हालांकि कूटनीतिक प्रयास तेज हैं, लेकिन क्षेत्र में अविश्वास की खाई अभी भी बहुत गहरी है। इजरायल की प्रतिक्रिया और अमेरिकी रक्षा विभाग के भीतर की राय इस शांति प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। यदि अब्बास अराघची की यह ‘शटल डिप्लोमेसी’ (लगातार की जाने वाली यात्राएं) सफल रहती है, तो यह 2026 की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत साबित होगी। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस्लामाबाद और वॉशिंगटन के बीच चल रहे इस गुप्त संवाद के नतीजों पर टिकी हैं।
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