Israel-Hezbollah
Israel-Hezbollah: लेबनान सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने आईडीएफ (IDF) के कमांडरों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की है। इस बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा और हिजबुल्लाह के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियानों की भविष्य की दिशा पर गहन मंथन हुआ। नेतन्याहू ने सेना की तत्परता की सराहना करते हुए स्पष्ट किया कि इजरायल अपनी सुरक्षा सीमाओं को अभेद्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कमांडरों को संबोधित करते हुए कहा कि इजरायली सेना ने लेबनान में असाधारण साहस का परिचय दिया है। उन्होंने दावा किया कि हिजबुल्लाह के उस रॉकेट सिस्टम को काफी हद तक नष्ट कर दिया गया है, जो उत्तरी इजरायल के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बना हुआ था। घुसपैठ और एंटी-टैंक मिसाइल हमलों को विफल करने के लिए सीमा पर एक नया ‘बफर जोन’ या सुरक्षित क्षेत्र बनाया गया है। यह रणनीतिक बदलाव अब इजरायल को अपनी शर्तों पर स्थिति नियंत्रित करने की शक्ति प्रदान करता है।
नेतन्याहू ने इस बात पर जोर दिया कि इजरायल की सैन्य कार्रवाई थमी नहीं है। उन्होंने कहा कि इजरायल के पास उभरते खतरों को कुचलने की पूर्ण स्वतंत्रता और अचूक क्षमता है। प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इजरायल की वर्तमान गतिविधियाँ अमेरिका और लेबनानी सरकार के बीच हुए हालिया समझौतों के दायरे में ही की जा रही हैं, ताकि क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के बीच संतुलन बना रहे।
भले ही इजरायल ने बड़ी सफलताएं हासिल की हों, लेकिन नेतन्याहू ने स्वीकार किया कि खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। वर्तमान में सेना के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं: पहला, हिजबुल्लाह के पास अभी भी मौजूद 122 मिमी के रॉकेट, जो जानलेवा साबित हो सकते हैं। दूसरा, आसमान से होने वाले ड्रोन और यूएवी (UAV) हमले। ये दोनों कारक उत्तरी इजरायल के नागरिकों की सुरक्षा के लिए अब भी एक बड़ा प्रश्नचिन्ह बने हुए हैं।
इन आधुनिक खतरों का मुकाबला करने के लिए इजरायल केवल सैन्य बल पर ही नहीं, बल्कि उन्नत तकनीक पर भी दांव लगा रहा है। रक्षा मंत्री और सेना के चीफ ऑफ स्टाफ एक ऐसी योजना पर काम कर रहे हैं, जो ड्रोन और मिसाइल डिफेंस सिस्टम को और अधिक सटीक बना सके। नेतन्याहू का मानना है कि यदि तकनीकी प्रयास सफल होते हैं, तो हिजबुल्लाह की युद्ध क्षमता को पूरी तरह पंगु बनाया जा सकता है।
खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, युद्ध की शुरुआत की तुलना में हिजबुल्लाह के पास अब केवल 10 प्रतिशत मिसाइलें ही बची हैं। भारी कमी के बावजूद, इन अवशेष हथियारों का मनोवैज्ञानिक और भौतिक प्रभाव कम नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री को उम्मीद है कि एक बार जब सैन्य और तकनीकी मोर्चों पर जीत हासिल हो जाएगी, तो कूटनीतिक समाधान का रास्ता खुद-ब-खुद साफ हो जाएगा और क्षेत्र में स्थायी शांति की संभावना बढ़ेगी।
नेतन्याहू ने आईडीएफ सैनिकों के बलिदान की सराहना करते हुए उन्हें ‘ऐतिहासिक रक्षक’ बताया। साथ ही, उन्होंने इजरायल की उस छवि को रेखांकित किया जहाँ ईसाई समुदाय और अन्य अल्पसंख्यक सुरक्षित महसूस करते हैं। इसी संदर्भ में, लेबनान में ईसा मसीह की एक मूर्ति को नुकसान पहुँचाने की घटना पर इजरायल ने कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्री गिडियन सार ने इस पर आधिकारिक रूप से माफी मांगी है और दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया है, ताकि सेना की छवि और धार्मिक सद्भाव पर कोई आंच न आए।
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