Abhijeet Dipke Statement : कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने शुक्रवार, 25 सितंबर को विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में कथित धांधली के आरोपों का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि जब विपक्ष खुद चुनावों को निष्पक्ष नहीं मानता, तो फिर वह लगातार उन्हीं चुनावों में हिस्सा क्यों लेता है। दीपके ने कहा कि विपक्ष को अपने राजनीतिक अस्तित्व के खत्म होने का डर है और इसी वजह से वह चुनावी प्रक्रिया से अलग नहीं हो रहा।
चुनाव आयोग पर धांधली के आरोपों का किया जिक्र
अभिजीत दीपके ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए। इससे पहले वह एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को कथित चुनावी अनियमितताओं के मुद्दे पर अल्टीमेटम दे चुके हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफे की मांग भी की थी। इसके बाद शुक्रवार को एक्स पर पोस्ट करते हुए दीपके ने विपक्षी दलों की रणनीति और चुनावों में उनकी भागीदारी पर सवाल खड़े किए।
‘धांधली का आरोप लगाकर भी चुनाव में हिस्सा लेना विरोधाभासी’
दीपके ने विपक्ष को संबोधित करते हुए कहा कि अगर उसे लगता है कि चुनावों में धांधली हो रही है, लेकिन वह फिर भी चुनाव लड़ता रहता है, तो उसकी भागीदारी से उसी चुनावी व्यवस्था को मान्यता मिलती है। उनके मुताबिक, विपक्ष की लगातार भागीदारी से जनता के बीच यह धारणा बनी रहती है कि चुनाव निष्पक्ष और वास्तविक प्रतिस्पर्धा वाले हैं।
राजनीतिक अस्तित्व बचाने की कोशिश पर उठाया सवाल
अभिजीत दीपके ने विपक्षी दलों के राजनीतिक अस्तित्व को लेकर भी सवाल किया। उन्होंने कहा कि अगर वोट चोरी होने, विधायकों और सांसदों के टूटने तथा राजनीतिक दलों में विभाजन जैसे आरोप लगाए जा रहे हैं, तो केवल चुनाव लड़ते रहना किस तरह राजनीतिक अस्तित्व बचाने की रणनीति हो सकती है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को यह विचार करना चाहिए कि वह किस तरह की राजनीतिक व्यवस्था में अपनी मौजूदगी बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
‘देश और लोकतंत्र के बारे में पहले सोचें’
दीपके ने विपक्षी दलों से अपील करते हुए कहा कि उन्हें अपने राजनीतिक अस्तित्व के बजाय देश और लोकतंत्र के व्यापक हित के बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष वास्तव में चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी होने का दावा करता है, तो उसे इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। उनके मुताबिक, केवल चुनाव लड़ते रहने के बजाय कथित अनियमितताओं के खिलाफ कोई ठोस राजनीतिक कदम उठाने की जरूरत है।
‘धांधली वाले चुनावों में भागीदारी बंद करें’
अभिजीत दीपके ने विपक्ष से कहा कि यदि उसे चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है, तो उसे उसी प्रक्रिया का हिस्सा बने रहने के फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने विपक्ष से कथित धांधली वाले चुनावों में हिस्सा लेना बंद करने की मांग की। हालांकि, उनके ये आरोप और राजनीतिक निष्कर्ष उनके स्वयं के बयान हैं।
फिक्स्ड मैच का उदाहरण देकर समझाया अपना तर्क
दीपके ने अपनी बात समझाने के लिए क्रिकेट मैच का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि अगर कोई मैच पहले से फिक्स हो, तो हर कैच नहीं छोड़ा जाता। कुछ कैच पकड़े जाते हैं और मुकाबले को आखिरी ओवर तक पहुंचाया जाता है, ताकि दर्शकों को करीबी और वास्तविक मुकाबले का अहसास हो। इसी उदाहरण के जरिए उन्होंने चुनावी मुकाबलों में विपक्ष की कुछ जीतों को लेकर अपनी बात रखी।
चुनावी व्यवस्था पर बहस फिर चर्चा में
अभिजीत दीपके के इस बयान के बाद चुनावी प्रक्रिया, विपक्ष की भूमिका और चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों को लेकर राजनीतिक बहस का एक और मुद्दा सामने आया है। उनके बयान में विपक्ष से चुनावों में भागीदारी और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर अपनी रणनीति स्पष्ट करने की मांग की गई है। वहीं, चुनावी धांधली जैसे आरोप गंभीर हैं और ऐसे दावों का आकलन संबंधित तथ्यों, दस्तावेजों और आधिकारिक प्रक्रियाओं के आधार पर किया जाना आवश्यक है।
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