Abhishek Banerjee Office Demolition: पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय हड़कंप मच गया जब तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद अभिषेक बनर्जी के कार्यालय पर जिला प्रशासन ने बुलडोजर चला दिया। यह कार्रवाई दक्षिण 24 परगना जिले के अमताला-बारुईपुर रोड पर स्थित उनके कार्यालय भवन को निशाना बनाकर की गई। जिला प्रशासन के अधिकारियों का स्पष्ट तर्क है कि यह पूरा ढांचा बिना किसी विधिवत स्वीकृत भवन योजना (Building Plan) के अवैध रूप से खड़ा किया गया था। प्रशासनिक स्तर पर इसे अनधिकृत निर्माण घोषित करने के बाद, भारी सुरक्षा बल की मौजूदगी में ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। इस कार्रवाई ने क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और सरकारी नियमों के पालन को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।

चुनाव बाद से बंद था कार्यालय, प्रशासन ने पहले जारी किया था नोटिस
जानकारी के अनुसार, जिस इमारत को ध्वस्त किया गया है, वह पिछले कुछ समय से उपयोग में नहीं थी। विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद से ही यह कार्यालय बंद पड़ा था। प्रशासन ने दावा किया है कि कार्रवाई से पूर्व उन्होंने उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया था और भवन पर नोटिस भी चस्पा किया गया था, जिसमें स्पष्ट रूप से इमारत को अवैध करार देते हुए इसे हटाने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, समय सीमा बीतने के बाद भी जब निर्माणकर्ता की ओर से कोई संतोषजनक जवाब या समाधान नहीं मिला, तो प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बुलडोजर के जरिए इसे गिराने का निर्णय लिया। फिलहाल टीएमसी नेतृत्व या खुद अभिषेक बनर्जी की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म है।

कोलकाता नगर निगम की कार्रवाई: 17 संपत्तियों पर लटकी है डिमोलिशन की तलवार
यह घटनाक्रम केवल एक कार्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक व्यापक प्रशासनिक घेराबंदी नजर आ रही है। हाल ही में कोलकाता नगर निगम (KMC) ने अभिषेक बनर्जी, उनके परिवार के सदस्यों और उनकी कंपनी ‘लीप्स एंड बाउंड्स’ से संबंधित 17 प्रमुख संपत्तियों को लेकर ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी किया है। हैरानी की बात यह है कि इन नोटिसों में हरीश मुखर्जी रोड स्थित अभिषेक बनर्जी का निजी आवास ‘शांतिनिकेतन’ भी शामिल है। निगम का आरोप है कि इन तमाम संपत्तियों के निर्माण में भवन निर्माण संबंधी नियमों और उप-नियमों का खुला उल्लंघन किया गया है।
सियासी गलियारों में हलचल और कानूनी पेचीदगियां
इस बुलडोजर कार्रवाई को लेकर विपक्षी दल और सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू होने की पूरी संभावना है। जहां एक तरफ प्रशासन इसे महज एक नियमित ‘एंटी-एनक्रोचमेंट’ (अतिक्रमण विरोधी) अभियान बता रहा है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक विश्लेषक इसे सत्ता संघर्ष के चश्मे से देख रहे हैं। जिस तरह से एक के बाद एक संपत्तियों को चिन्हित किया जा रहा है, वह यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी और राजनीतिक रूप से और अधिक तूल पकड़ेगा। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि तृणमूल कांग्रेस इस प्रशासनिक हमले का जवाब किस तरह देती है और क्या वे इन नोटिसों के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
Read More : Zohran Mamdani Statement: उमर खालिद की तुलना नेल्सन मंडेला से, बयान पर छिड़ी बहस











