Abhishek Banerjee: तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी को आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें तीन सप्ताह के लिए विदेश यात्रा की इजाजत दी है। हालांकि, अदालत ने इस अनुमति के साथ कुछ महत्वपूर्ण शर्तें भी तय की हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि विदेश यात्रा के दौरान अभिषेक बनर्जी को निर्धारित नियमों का पालन करना होगा और जांच एजेंसी के साथ आवश्यक जानकारी साझा करनी होगी।

कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले को दी थी चुनौती
अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता हाई कोर्ट के 5 अगस्त के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने उन्हें आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उन्होंने शीर्ष अदालत का रुख किया। उनकी याचिका पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई की।

डिप्लोमैटिक पासपोर्ट पर ही यात्रा की अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अभिषेक बनर्जी केवल डिप्लोमैटिक पासपोर्ट के आधार पर विदेश यात्रा कर सकेंगे। इसके साथ ही उन्हें अपनी विदेश यात्रा का पूरा कार्यक्रम जांच एजेंसी को उपलब्ध कराना होगा। इसमें यात्रा की तारीख, विदेश में ठहरने का स्थान और अन्य जरूरी विवरण शामिल होंगे। अदालत ने इन शर्तों के जरिए जांच प्रक्रिया को प्रभावित होने से बचाने की कोशिश की है।
वकील ने डिप्लोमैटिक पासपोर्ट को लेकर दी दलील
अभिषेक बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत को बताया कि फिलहाल उनके पास केवल डिप्लोमैटिक पासपोर्ट है। उनके मुताबिक, यह पासपोर्ट ऑपरेशन सिंदूर के दौरान विदेशों में संपर्क अभियान के लिए जारी किया गया था। उन्होंने अदालत के सामने यह भी दलील दी कि डिप्लोमैटिक पासपोर्ट के जरिए यात्रा करने पर संबंधित भारतीय दूतावास उनकी गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं।
विदेश जाकर वापस नहीं लौटने की आशंका पर सुनवाई
वकील ने अदालत के सामने दलील दी कि भारतीय दूतावासों की निगरानी और डिप्लोमैटिक पासपोर्ट की वजह से अभिषेक बनर्जी के विदेश जाकर वापस नहीं लौटने की आशंका काफी हद तक दूर हो जाती है। हालांकि, पश्चिम बंगाल सरकार ने इस दलील का विरोध किया। राज्य सरकार ने अदालत से विदेश यात्रा की अनुमति नहीं देने का आग्रह किया।

बंगाल सरकार ने 16 मामलों का दिया हवाला
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने अभिषेक बनर्जी की विदेश यात्रा का विरोध किया। सरकार ने अदालत को बताया कि उनके खिलाफ 16 मामले दर्ज हैं। राज्य की ओर से आशंका जताई गई कि अगर उन्हें विदेश जाने की अनुमति दी जाती है, तो वह वापस नहीं लौट सकते। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की पीठ इस दलील से पूरी तरह सहमत नजर नहीं आई।
जस्टिस बागची ने अधिकारों का किया उल्लेख
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को विदेश जाने का अधिकार है और हर व्यक्ति को अपनी चिकित्सा सुविधा चुनने का भी अधिकार प्राप्त है। उन्होंने मामले की प्रकृति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मौजूदा मामला एक चुनावी भाषण से संबंधित है। अदालत की टिप्पणी से संकेत मिला कि केवल इस आधार पर विदेश में इलाज कराने से रोकना उचित नहीं माना जा सकता।
यात्रा की जानकारी जांच एजेंसी को देनी होगी
सुप्रीम कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को निर्देश दिया कि वह अपनी विदेश यात्रा और वहां ठहरने की पूरी जानकारी जांच एजेंसी को उपलब्ध कराएं। अदालत ने हालांकि उनकी यात्रा की जानकारी को सार्वजनिक करने से जुड़ी मांग पर भी विचार किया। बनर्जी की ओर से अनुरोध किया गया कि यात्रा का कार्यक्रम सार्वजनिक नहीं किया जाए, क्योंकि इसमें उनकी निजी और चिकित्सा संबंधी जानकारी शामिल हो सकती है।
इटिनरेरी सार्वजनिक नहीं करने की मांग मंजूर
अदालत ने अभिषेक बनर्जी की ओर से किए गए अनुरोध को स्वीकार कर लिया। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि जांच एजेंसी को दी जाने वाली यात्रा की इटिनरेरी सार्वजनिक नहीं की जाएगी। इस तरह अदालत ने एक तरफ जांच एजेंसी को जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने की शर्त रखी, वहीं दूसरी तरफ यात्रा कार्यक्रम की गोपनीयता भी बनाए रखने की अनुमति दी।
चुनावी भाषण से जुड़े मामले में लगी थी रोक
अभिषेक बनर्जी के खिलाफ मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान कथित भड़काऊ भाषण से जुड़ा है। इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी, लेकिन साथ ही विदेश यात्रा पर भी प्रतिबंध लगा दिया था। बाद में इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति मांगने पर हाई कोर्ट ने 5 अगस्त को उनकी याचिका खारिज कर दी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मिली बड़ी राहत
हाई कोर्ट के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे अभिषेक बनर्जी को अब शीर्ष अदालत से राहत मिल गई है। तीन सप्ताह के लिए विदेश जाकर आंखों का इलाज कराने की अनुमति उन्हें कुछ शर्तों के साथ दी गई है। उन्हें डिप्लोमैटिक पासपोर्ट पर यात्रा करनी होगी और यात्रा तथा ठहरने की जानकारी जांच एजेंसी को देनी होगी। हालांकि, उनकी इटिनरेरी सार्वजनिक नहीं की जाएगी।
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