ADR report 2025 : एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की ताजा रिपोर्ट में सामने आया है कि देश की गैर-मान्यता प्राप्त पंजीकृत राजनीतिक पार्टियों (Registered Unrecognized Political Parties – RUPP) की आय में 2022-23 के दौरान 223% की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है। ये वो पार्टियां हैं जो चुनावों में नाममात्र वोट भी नहीं जुटा पाईं, फिर भी उनकी आय करोड़ों में रही है।
2764 पार्टियों में से 2025 ने नहीं दी आय-व्यय की जानकारी
देश में फिलहाल कुल 2764 RUPP पार्टियां रजिस्टर्ड हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनमें से केवल 739 पार्टियों ने ही अपने वित्तीय विवरण चुनाव आयोग को सौंपे हैं। यानी 73% से अधिक (2025) पार्टियों ने अपनी आय और खर्च की जानकारी सार्वजनिक नहीं की, जिससे इनके संचालन और चंदा प्राप्ति पर पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
गुजरात: केवल 22 हजार वोट, लेकिन आय ₹2,316 करोड़
गुजरात की 5 RUPP पार्टियों ने पिछले 5 सालों में तीन चुनाव (दो लोकसभा और एक विधानसभा) में मिलाकर सिर्फ 22,000 वोट हासिल किए, लेकिन इनकी कुल आय ₹2,316 करोड़ तक पहुंच गई। आश्चर्य की बात यह है कि इनमें से एक पार्टी ने केवल एक साल में ₹1,158 करोड़ की कमाई दर्ज की है।
17 उम्मीदवार, 0 जीत और 2,316 करोड़ की कमाई
ADR के मुताबिक, इन 5 दलों ने 2019 से 2024 के बीच कुल 17 उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे, लेकिन कोई भी जीत हासिल नहीं कर सका। इतना ही नहीं, इनमें से चार पार्टियां 2018 के बाद ही रजिस्टर्ड हुई हैं, फिर भी इतनी भारी भरकम फंडिंग पर इनकी भूमिका और उद्देश्य पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
गुजरात की टॉप 5 अमीर पार्टियां और उनके आंकड़े
| पार्टी का नाम | वोट (संख्या) | आय (₹ करोड़ में) |
|---|---|---|
| भारतीय नेशनल जनता दल | 11,496 | 957 |
| न्यू इंडिया यूनाइटेड पार्टी | 9,029 | 608 |
| सत्यवादी रक्षक पार्टी | 1,042 | 416 |
| जन मन पार्टी | 480 | 134 |
| सौराष्ट्र जनता पार्टी | 140 | 200 |
ये आंकड़े स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि पार्टियों को मतदाताओं का समर्थन तो नहीं मिला, लेकिन धन की कोई कमी नहीं रही।
इन राज्यों में पारदर्शिता सबसे कमजोर
नीचे दिए गए राज्यों में रजिस्टर्ड RUPP पार्टियों की संख्या और उनमें से कितनों ने वित्तीय जानकारी दी, यह दर्शाता है कि पारदर्शिता की स्थिति बेहद खराब है:
| राज्य | कुल पार्टियां | जानकारी न देने वाली |
|---|---|---|
| उत्तर प्रदेश | 744 | 671 |
| दिल्ली | 240 | 168 |
| तमिलनाडु | 230 | 180 |
| महाराष्ट्र | 216 | 161 |
| बिहार | 184 | 117 |
| आंध्र प्रदेश | 129 | 89 |
| मध्य प्रदेश | 107 | 65 |
| हरियाणा | 102 | 77 |
| गुजरात | 95 | 59 |
| कर्नाटक | 92 | 56 |
इसके अलावा, पंजाब (73), उत्तराखंड (40) और गोवा (12) की एक भी पार्टी ने आय-व्यय की जानकारी नहीं दी है।
ADR: पारदर्शिता की दिशा में एक अहम संगठन
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) है, जिसकी स्थापना 1999 में IIM अहमदाबाद के प्रोफेसरों और छात्रों द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य राजनीतिक और चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देना है। यह संगठन चुनाव आयोग और RTI के जरिए जुटाई गई जानकारी को सार्वजनिक करता है।
ADR के प्रमुख कार्य
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चुनावों से पहले उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि (शैक्षणिक, आपराधिक, आर्थिक) का विश्लेषण करता है।
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राजनीतिक दलों की आय, खर्च और चंदे की जानकारी को सामने लाता है।
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सांसदों और विधायकों की संपत्ति में समय के साथ हुई वृद्धि का तुलनात्मक अध्ययन करता है।
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वोटर्स को शिक्षित करने और चुनाव पारदर्शिता की दिशा में लगातार अभियान चलाता है।
निष्कर्ष: फंडिंग के नाम पर खड़े हुए कई सवाल
ADR की रिपोर्ट ने एक बार फिर यह उजागर किया है कि देश की राजनीति में कई पार्टियां केवल नाम मात्र की भागीदारी के बावजूद बड़ी मात्रा में चंदा जुटा रही हैं, लेकिन इसका स्रोत और उद्देश्य स्पष्ट नहीं है। जब वोट के नाम पर जनता का समर्थन नहीं और जवाबदेही शून्य है, तो करोड़ों की आमदनी का मतलब क्या है? इस रिपोर्ट ने चुनावी सुधारों और राजनीतिक फंडिंग की पारदर्शिता को लेकर गंभीर बहस को एक बार फिर जन्म दे दिया है।
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