Ahmedabad plane crash: अहमदाबाद में हुए विमान हादसे के बाद एक बड़ा और अहम अपडेट सामने आया है। हादसे में अपनी जान गंवाने वाले 60 मृतकों के परिजन अब अमेरिका की अदालत का रुख करने जा रहे हैं। उन्होंने दुर्घटनाग्रस्त बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान की निर्माता कंपनी बोइंग के खिलाफ याचिका दायर करने का निर्णय लिया है। इसके लिए उन्होंने अमेरिका के नामचीन वकील माइक एंड्रयूज को हायर किया है, जो एविएशन मामलों में माहिर माने जाते हैं।

क्यों अमेरिका की अदालत?
पीड़ित परिवारों का मानना है कि इस विमान हादसे के लिए कहीं न कहीं बोइंग कंपनी की तकनीकी खामियां जिम्मेदार हैं। वे चाहते हैं कि हादसे की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच हो ताकि सच सामने आ सके। इसके लिए उन्होंने फ्लाइट के कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर की जांच कराने की मांग की है। उनका दावा है कि यह डेटा दुर्घटना की असल वजह को उजागर कर सकता है।

माइक एंड्रयूज और उनकी भूमिका
माइक एंड्रयूज बेस्ले एलन लॉ फर्म से जुड़े हैं और उन्हें टॉप-10 एविएशन लॉयर्स में गिना जाता है। वे गंभीर चोट और अप्राकृतिक मृत्यु के मामलों के विशेषज्ञ हैं। इनके नेतृत्व में कई बार विमान, ट्रक और कार निर्माता कंपनियों के खिलाफ मुकदमे लड़े गए हैं। खासतौर पर 2019 में इथोपियन एयरलाइंस क्रैश के पीड़ित परिवारों के लिए बोइंग 737 मैक्स प्लेन दुर्घटना का केस उन्होंने ही लड़ाया था। ऐसे में बोइंग कंपनी के लिए यह मामला और भी संवेदनशील हो सकता है।
हादसे की तफसीलें
12 जून 2025 को दोपहर करीब डेढ़ बजे, एअर इंडिया की फ्लाइट AI171 अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से लंदन के गैटविक एयरपोर्ट के लिए उड़ान भर रही थी। लेकिन उड़ान के मात्र 32 सेकंड बाद मेघानी नगर क्षेत्र में बीजे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल की बिल्डिंग पर विमान गिर गया। इस क्रैश में विमान में सवार 242 लोगों में से 230 यात्रियों और 12 क्रू मेंबर्स की मौत हो गई। साथ ही जमीन पर 19 लोग भी जान गंवा बैठे। हादसे में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी समेत कई अन्य लोग भी मारे गए। कुल 67 लोग गंभीर रूप से घायल हुए।
जांच रिपोर्ट और तकनीकी कारण
भारत के विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) ने 8 जुलाई 2025 को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट जारी की थी। रिपोर्ट के अनुसार, विमान के टेकऑफ के बाद मात्र 3 सेकंड में दोनों इंजनों के फ्यूल कंट्रोल स्विच ‘रन’ से कट ऑफ मोड में चले गए, जिससे ईंधन की सप्लाई बंद हो गई और विमान नियंत्रण खो बैठा। इस कारण पायलट विमान को संभाल नहीं सके और वह नीचे गिर गया।
AAIB, बोइंग कंपनी और अमेरिका के नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) इस हादसे की जांच में सहयोग कर रहे हैं। दोनों ब्लैक बॉक्स बरामद किए गए हैं, जिनका डेटा अब विश्लेषण किया जा रहा है।
अब क्या होगा?
पीड़ित परिवारों द्वारा अमेरिका की अदालत में बोइंग कंपनी के खिलाफ केस दायर करने से कंपनी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यह मामला एक बार फिर से बोइंग की सुरक्षा मानकों और तकनीकी दोषों पर सवाल खड़ा करेगा। परिवारों का उद्देश्य केवल न्याय पाना नहीं बल्कि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकना भी है।
यह घटनाक्रम अहमदाबाद प्लेन क्रैश की जांच और उसकी जिम्मेदारी तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। अब सबकी निगाहें अमेरिकी अदालत और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।










