Women Reservation Bill
Women Reservation Bill : भारतीय संसदीय इतिहास में आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण रहा, जब केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण और सीटों के विस्तार से जुड़े तीन महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक सदन के पटल पर रखे। इन बिलों का मुख्य उद्देश्य लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करना है। सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, यह आरक्षण व्यवस्था वर्ष 2029 से प्रभावी होगी। इस ऐतिहासिक कदम पर चर्चा और इसे पारित कराने के लिए संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया है। जहाँ सरकार इसे महिला सशक्तिकरण का बड़ा माध्यम बता रही है, वहीं सदन में आज पहले ही दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
इस नए संशोधन बिल में लोकसभा की संरचना को पूरी तरह बदलने का प्रस्ताव है। वर्तमान में लोकसभा की सीटों की संख्या 543 है, जिसे बढ़ाकर 850 करने की योजना है। नए ढांचे के अनुसार, राज्यों में 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें आवंटित की जा सकती हैं। सीटों की इस नई संख्या को अंतिम रूप देने के लिए देश भर में नया परिसीमन (Delimitation) किया जाएगा। यदि यह विधेयक कानून बनता है, तो भविष्य की संसद में 273 सीटें केवल महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। सीटों की इस भारी बढ़ोतरी को लेकर विपक्षी दल सशंकित हैं और इसे संघीय ढांचे के लिए चुनौती मान रहे हैं।
सदन की कार्यवाही के दौरान गृह मंत्री अमित शाह और कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल के बीच तीखी बहस हुई। वेणुगोपाल ने संविधान (131वां संशोधन) बिल और परिसीमन विधेयक को पेश करने पर ‘तकनीकी आपत्ति’ जताई। इस पर अमित शाह ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस सांसद बिल की मेरिट (गुण-दोष) पर बात करने के बजाय केवल प्रक्रियागत अड़चनें पैदा कर रहे हैं। वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि भाजपा इन संशोधनों के जरिए संविधान को ‘हाईजैक’ करना चाहती है और उन्होंने सरकार से इन बिलों को तत्काल वापस लेने की मांग की। शाह ने स्पष्ट किया कि विपक्ष के हर सवाल का जवाब चर्चा के दौरान दिया जाएगा।
समाजवादी पार्टी ने इन विधेयकों का पुरजोर विरोध किया है। सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि सरकार संविधान की मूल भावना के विरोध में कार्य कर रही है। उन्होंने बिल को “महिला आरक्षण की चाशनी” बताते हुए आरोप लगाया कि इसकी आड़ में सरकार वैसा ही प्रयोग पूरे देश में करना चाहती है जैसा कश्मीर और असम में किया गया। यादव ने स्पष्ट किया कि जब तक इसमें पिछड़े वर्ग और मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग से कोटा निर्धारित नहीं किया जाता, तब तक समाजवादी पार्टी इसका विरोध जारी रखेगी। उन्होंने सरकार से मांग की कि 2023 के पुराने बिल को ही मूल रूप में लागू किया जाए।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विशेष सत्र से पहले विपक्षी दलों के साथ रणनीतिक बैठक की, जिसमें राहुल गांधी सहित टीएमसी, आरजेडी, आप (AAP) और शिवसेना (UBT) के नेता शामिल हुए। खड़गे ने कहा कि विपक्ष सैद्धांतिक रूप से महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन लोकसभा की सीटें बढ़ाने और परिसीमन की प्रक्रिया पर उन्हें गंभीर आपत्ति है। विपक्षी गठबंधन का मानना है कि सीटों में अचानक बढ़ोतरी से क्षेत्रीय असंतुलन पैदा हो सकता है। पूरे विपक्ष ने एकजुट होकर इस संशोधन विधेयक के खिलाफ वोट करने का निर्णय लिया है। अब सबकी नजरें प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन पर टिकी हैं, जो कल इस विषय पर सरकार का पक्ष रख सकते हैं।
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