Alexander Leonov Passes Away
Alexander Leonov Passes Away: रूस के रक्षा क्षेत्र और वैश्विक मिसाइल तकनीक के क्षेत्र से एक अत्यंत दुखद खबर सामने आई है। प्रसिद्ध रूसी मिसाइल डिजाइनर और रक्षा वैज्ञानिक अलेक्जेंडर लियोनोव का रविवार, 5 अप्रैल 2026 को 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया। लियोनोव न केवल रूस की सैन्य शक्ति को आधुनिक बनाने वाले प्रमुख स्तंभ थे, बल्कि वे भारत-रूस रक्षा संबंधों की मजबूती के भी प्रतीक माने जाते थे। उनके निधन की पुष्टि रूसी स्थानीय मीडिया और पीटीआई की रिपोर्टों के माध्यम से की गई है।
अलेक्जेंडर लियोनोव रूस की प्रतिष्ठित रक्षा कंपनी एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया के सीईओ (CEO) और मुख्य डिजाइनर के रूप में कार्यरत थे। यह संस्थान भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दिल्ली स्थित ब्रह्मोस एयरोस्पेस में यह रूस की तरफ से मुख्य ज्वाइंट वेंचर पार्टनर है। हालांकि, उनकी प्रेस सेवा और समाचार पोर्टल RBC ने उनकी मृत्यु के सटीक कारणों या स्थान के बारे में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है, लेकिन उनके जाने से रक्षा विज्ञान के एक युग का अंत हो गया है।
लियोनोव की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रूस की अजेय मानी जाने वाली जिरकोन (त्सिरकोन) हाइपरसोनिक मिसाइल का डिजाइन तैयार करना था। जिरकोन एक ऐसी मिसाइल है जिसे जहाज और पनडुब्बी दोनों से लॉन्च किया जा सकता है। यह 3K22 मिसाइल सिस्टम का एक अभिन्न हिस्सा है, जिसे आधिकारिक तौर पर जनवरी 2023 में रूसी नौसेना की सेवा में शामिल किया गया था। इस मिसाइल ने वैश्विक रक्षा संतुलन में रूस को एक नई बढ़त प्रदान की है।
खुले स्रोतों और आरबीसी की रिपोर्टों के अनुसार, जिरकोन मिसाइल की गति मैख 9 तक पहुंच सकती है, जिसका अर्थ है कि यह ध्वनि की गति से लगभग नौ गुना तेजी से अपने लक्ष्य पर प्रहार करती है। इसकी मारक क्षमता 400 से 1500 किलोमीटर के बीच है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह मिसाइल सामान्य विस्फोटकों के साथ-साथ परमाणु वारहेड ले जाने में भी सक्षम है, जो इसे दुनिया की सबसे घातक मिसाइल प्रणालियों की श्रेणी में खड़ा करती है।
भारत के लिए लियोनोव का महत्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि उन्होंने ब्रह्मोस संयुक्त परियोजना के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ब्रह्मोस मिसाइल दरअसल रूसी ‘ओनिक्स’ मिसाइल तकनीक पर आधारित है, जिसे विकसित करने वाली टीम के लियोनोव प्रमुख सदस्य थे। उन्होंने न केवल उन्नत हाइपरसोनिक वाहनों के निर्माण की देखरेख की, बल्कि भारत और रूस के बीच तकनीकी हस्तांतरण और सामरिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में उत्प्रेरक का काम किया।
अलेक्जेंडर लियोनोव को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए रूस के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक “Hero of Labour” के गोल्डन स्टार से सम्मानित किया गया था। उनके नेतृत्व में ग्रेनाइट मिसाइल, वल्कन मिसाइल और बैस्टियन तटीय रक्षा प्रणालियों का विकास हुआ। उन्होंने अंतरिक्ष प्रणालियों के डिजाइन में भी अपना विशेष योगदान दिया, जिससे रूस की अंतरिक्ष और मिसाइल शक्ति दोनों सुदृढ़ हुईं।
लियोनोव का निधन केवल रूस के लिए ही नहीं, बल्कि भारत के रक्षा वैज्ञानिकों के लिए भी एक बड़ी क्षति है। उन्होंने आधुनिक युद्धक विमानों और जहाजों के लिए ऐसी ढाल और तलवार तैयार की थी, जिसे भेदना किसी भी आधुनिक रडार या डिफेंस सिस्टम के लिए लगभग असंभव है। उनके द्वारा डिजाइन की गई मिसाइलें आने वाले कई दशकों तक भारतीय और रूसी सेनाओं की शक्ति का आधार बनी रहेंगी। वैश्विक रक्षा विशेषज्ञ उन्हें एक ऐसे विजनरी के रूप में याद करेंगे जिन्होंने विज्ञान को युद्ध कौशल के साथ पूरी सटीकता से जोड़ा।
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