Ambikapur Statue Controversy
Ambikapur Statue Controversy : छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के अंबिकापुर शहर में एक बेहद ही अजीबोगरीब और विवादित मामला प्रकाश में आया है। यहाँ क्रांतिकारी शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा के आधिकारिक लोकार्पण से पहले ही कुछ लोगों द्वारा उसका ‘पूर्व लोकार्पण’ कर दिया गया। इस घटना ने न केवल प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि इसे शासन की गरिमा और तय प्रोटोकॉल का उल्लंघन माना जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर पालिक निगम के अधिकारियों ने पुलिस की शरण ली है, जिसके बाद शहर के चर्चित चेहरे विकल झा और उनके समर्थकों के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया गया है।
पूरे मामले का घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब नगर पालिक निगम अंबिकापुर में पदस्थ सहायक अभियंता प्रदीप कुमार पैंकरा ने थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, शहीद चंद्रशेखर आजाद की इस नवनिर्मित प्रतिमा का आधिकारिक लोकार्पण प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कर-कमलों द्वारा किया जाना प्रस्तावित था। शासन और नगर निगम इसके लिए भव्य तैयारी कर रहा था और अंतिम चरण की सजावट का काम चल रहा था। आरोप है कि 9 अप्रैल 2026 की मध्यरात्रि, जब शहर सो रहा था, तब करीब 12:00 से 1:00 बजे के बीच विकल झा अपने कुछ साथियों के साथ वहां पहुंचे और बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के प्रतिमा का अनावरण कर दिया।
नगर निगम का कहना है कि इस अनधिकृत कृत्य के कारण न केवल प्रशासनिक मर्यादा टूटी, बल्कि शासकीय कार्य में भारी बाधा भी उत्पन्न हुई। लोकार्पण के लिए की गई विशेष साज-सज्जा और तैयारियों को इस कृत्य से नुकसान पहुँचा। निगम को मुख्यमंत्री के आगमन से पहले दोबारा सारी व्यवस्थाएं और सौंदर्यीकरण का काम करना पड़ा, जिससे सरकारी खजाने और संसाधनों का अतिरिक्त अपव्यय हुआ। इंजीनियर पैंकरा ने अपनी शिकायत में स्पष्ट किया है कि यह कृत्य जानबूझकर लोक सेवकों के काम में अड़चन डालने और व्यवस्था को चुनौती देने के उद्देश्य से किया गया था।
एफआईआर में केवल प्रतिमा के अनावरण का ही जिक्र नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया पर प्रसारित की गई सामग्रियों को भी आधार बनाया गया है। पुलिस को दी गई जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने इस कथित ‘लोकार्पण’ का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया। आरोप है कि इस वीडियो में विकल झा और उनके साथियों द्वारा भड़काऊ भाषण दिए गए और ऐसी बातें कहीं गईं जिससे शहर का सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया। वीडियो में कुछ व्यक्तियों को लेकर “गोडसे की विचारधारा” जैसी टिप्पणियां की गईं, जिसे प्रशासन ने अफवाह फैलाने और सामाजिक तनाव पैदा करने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।
अंबिकापुर थाना पुलिस ने प्राप्त शिकायत और प्राथमिक जांच के आधार पर 10 अप्रैल को विकल झा और उनके सहयोगियों के खिलाफ कड़ी धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। नए कानूनों के तहत दर्ज इस एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 221 (शासकीय कार्य में बाधा), धारा 3(5) (सामूहिक आपराधिक उत्तरदायित्व), धारा 324(3) (शासकीय संपत्ति को क्षति पहुँचाना) और धारा 353(2) (लोक सेवक के कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा डालना) को शामिल किया गया है। पुलिस अब वीडियो फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान कर रही है। शहर में इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई है।
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