Bhilai BJP War
Bhilai BJP War: भिलाई भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर लंबे समय से सुलग रही अंतर्कलह अब एक बड़े संगठनात्मक संकट के रूप में विस्फोटित हो गई है। जिले में पार्टी के भीतर गुटबाजी इस कदर हावी हो गई है कि एक ही पद के लिए दो-दो पदाधिकारियों की घोषणा कर दी गई है। युवा मोर्चा की नियुक्तियों को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब मुख्य संगठन के मंडल अध्यक्षों और जिला पदाधिकारियों के बीच आमने-सामने की लड़ाई में तब्दील हो चुका है, जिससे कार्यकर्ताओं के बीच भारी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
विवाद की शुरुआत 19 अप्रैल की रात को हुई, जब भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के जिलाध्यक्ष सौरभ जायसवाल ने 13 मंडलों के अध्यक्ष और महामंत्री की आधिकारिक सूची जारी की। इस सूची के सार्वजनिक होते ही अगले ही दिन यानी 20 अप्रैल को भिलाई के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया। 13 में से 10 भाजपा मंडल अध्यक्षों ने इस सूची को सिरे से खारिज कर दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने विरोध स्वरूप अपनी एक समानांतर (पैरेलल) सूची जारी कर दी। इस विद्रोह ने पार्टी के अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मंडल अध्यक्षों द्वारा अपनी अलग सूची जारी करने के बाद भिलाई-चरौदा, कोहका, वैशाली नगर, सुपेला, कैंप, पूरब, पश्चिम, जामुल, खुर्सीपार और कुम्हारी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में विचित्र स्थिति पैदा हो गई है। अब इन 10 मंडलों में भाजयुमो के दो-दो अध्यक्ष और दो-दो महामंत्री सक्रिय हैं। मंडल अध्यक्षों का दावा है कि उनके द्वारा जारी की गई सूची ही वास्तविक है, जबकि जिला स्तर से जारी सूची को वे ‘थोपा हुआ’ बता रहे हैं। हालांकि, मुरमुंदा, जेवरा सिरसा और अहिवारा में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और वहां दूसरी सूची नहीं आई है।
इस पूरे घटनाक्रम पर जिला प्रभारी रामजी भारती ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सौरभ जायसवाल द्वारा जारी की गई पहली सूची में उनकी कोई सहमति नहीं थी। भारती के अनुसार, इतनी महत्वपूर्ण नियुक्तियों से पहले उनके साथ कोई औपचारिक चर्चा नहीं की गई। उनका मानना है कि संगठन की मर्यादा के तहत मंडल स्तर से नाम मंगवाकर और सभी पक्षों से बैठकर बात करनी चाहिए थी, लेकिन जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन के हस्ताक्षर से जारी इस सूची में मंडल अध्यक्षों की राय को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।
जानकारों और पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं का आरोप है कि संगठन की स्थापित परंपराओं को ताक पर रखकर यह नियुक्तियां की गई हैं। मंडल अध्यक्षों ने जो नाम प्रस्तावित किए थे, उन्हें दरकिनार कर कुछ ‘खास लोगों’ के इशारे पर अपनों को उपकृत किया गया है। कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर भी गुस्सा है कि पद उन लोगों को दिए गए हैं जो पार्टी के संघर्षों में कभी सक्रिय नहीं रहे, जबकि जमीन पर पसीना बहाने वाले निष्ठावान कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर दिया गया। यह असंतोष आने वाले समय में पार्टी के चुनावी प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है।
विवाद के केंद्र में रहे जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन से जब संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनका फोन बंद मिला। जानकारी के अनुसार, उनकी तबीयत खराब है और वे अस्पताल में भर्ती हैं। दूसरी ओर, सौरभ जायसवाल अपनी सूची पर अडिग हैं। भिलाई भाजपा में यह गुटबाजी अब ‘पॉवर गेम’ बन चुकी है, जिसमें स्थानीय नेता अपनी ताकत दिखा रहे हैं। अब सबकी निगाहें प्रदेश नेतृत्व और संगठन महामंत्री पर टिकी हैं कि वे इस संवैधानिक संकट को कैसे सुलझाते हैं और क्या बागियों पर गाज गिरेगी या सूची में बदलाव होगा।
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