International Science Seminar
International Science Seminar: अम्बिकापुर स्थित प्रतिष्ठित होली क्रॉस वीमेन्स कॉलेज में लाइफ साइंस के उभरते आयामों पर केंद्रित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस का भव्य समापन हुआ। ‘इंटरनेशनल कांफ्रेंस ऑन इंटरडिसिप्लिनरी फ्रंटियर्स इन लाइफ साइंस – 2026’ विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी ने शोध और नवाचार के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सिस्टर शांता जोसफ के कुशल संयोजन और मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम ने वैश्विक वैज्ञानिकों को एक साझा मंच प्रदान किया।
इस दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ अकादमिक जगत की दिग्गज हस्तियों की उपस्थिति में हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर प्रेम प्रकाश सिंह थे। विशिष्ट अतिथियों में छत्तीसगढ़ काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के पूर्व निदेशक प्रोफेसर एम.एल. नायक, उच्च शिक्षा सरगुजा मंडल के अतिरिक्त क्षेत्रीय निदेशक प्रोफेसर रिजवान उल्लाह और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के बायोकेमिस्ट्री विभागाध्यक्ष प्रोफेसर राकेश कुमार सिंह शामिल रहे। इन विशेषज्ञों की मौजूदगी ने छात्र-छात्राओं और शोधार्थियों के लिए प्रेरणा के नए द्वार खोले।
कांफ्रेंस के पहले दिन (7 अप्रैल 2026) का सत्र वैचारिक आदान-प्रदान और शोध की गहराई से भरा रहा। प्राचार्य डॉ. सिस्टर शांता जोसफ ने अध्यक्षीय उद्बोधन में विज्ञान और मानवता के जुड़ाव पर प्रकाश डाला। प्रोफेसर प्रेम प्रकाश सिंह ने प्लेनरी लेक्चर के माध्यम से शोध की महत्ता समझाई, जबकि प्रोफेसर रिजवान उल्लाह ने शैक्षणिक संस्थानों के बीच आपसी सहयोग (Collaboration) की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं, बीएचयू के प्रोफेसर राकेश कुमार सिंह ने ‘लिस्मानिया’ रोग पर हो रहे अनुसंधानों और इसके वैक्सीन निर्माण की प्रक्रिया पर विस्तृत चर्चा की। प्रोफेसर एम.एल. नायक ने पर्यावरण विज्ञान और प्रकृति संरक्षण के वर्तमान संकटों पर विचार प्रस्तुत किए।
संगोष्ठी के दूसरे दिन (8 अप्रैल 2026) तकनीक के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय वक्ताओं ने शिरकत की। ऑनलाइन मोड पर कैलिफोर्निया (USA) के स्क्रिप्स इंस्टीट्यूट से डॉ. कार्तिक नाडेंला ने ‘फोटोएक्टिवेटेड इंसुलिन डिलीवरी’ पर अपना शोध प्रस्तुत किया। वाशिंगटन यूनिवर्सिटी से डॉ. अंजली यादव ने शराब की लत में ‘एपिजेनेटिक्स रेगुलेशन’ की भूमिका समझाई। नेपाल के लुम्बिनी प्रांतीय अस्पताल से डॉ. मनोज धीमरे ने हार्मोनल रेगुलेशन पर अहम जानकारियां साझा कीं। साथ ही कानपुर विश्वविद्यालय के डॉ. दीपेश वर्मा और राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज की डॉ. काव्यांजलि शर्मा ने मानव स्वास्थ्य और जेनेटिक फ्यूजन जैसे जटिल विषयों पर शोध पत्र पढ़े।
यह संगोष्ठी शोध की दृष्टि से अत्यंत सफल रही, जिसमें लगभग 300 शोधार्थियों ने अपना पंजीकरण कराया। दो दिनों के भीतर कुल 32 वैज्ञानिकों, प्राध्यापकों और सहायक प्राध्यापकों ने अपने मौलिक शोध पत्र प्रस्तुत किए। केवल व्याख्यान ही नहीं, बल्कि महाविद्यालय की छात्राओं ने भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत शोध पोस्टरों और मॉडलों ने अतिथियों का ध्यान आकर्षित किया। उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए रचना मिस्त्री, बुशरा परवीन, आफरीन, रूचि सिंह और अंजु जैसी छात्राओं को पुरस्कृत कर उनके उत्साह को बढ़ाया गया।
कांफ्रेंस का समापन समारोह प्रोफेसर एस.के. सिन्हा (डीन, राजमोहनी देवी कृषि एवं अनुसंधान केंद्र) के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्रीय और राष्ट्रीय विकास के लिए जमीनी स्तर पर उत्कृष्ट शोध प्रयोगशालाओं का होना अत्यंत आवश्यक है। डॉ. अनुश्री केशरी ने दो दिवसीय संगोष्ठी की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की और सभी अतिथियों व सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। मंच का सफल संचालन आलोक चक्रवर्ती, जग नारायण सिरदार और मयंक सिंह चौहान सहित अन्य शिक्षकों ने किया। इस दौरान महाविद्यालय का समस्त शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक स्टाफ मौजूद रहा।
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