Ambikapur-Renukoot Rail Line : बरवाडीह के फेर में अंबिकापुर से रेल लाइन विस्तार का प्रस्ताव लंबित – वीरेंद्र पांडेय

Ambikapur-Renukoot Rail Line : अंबिकापुर से रेल लाइन विस्तार अधर में लटका हुआ है। तमाम सर्वे रिपोर्ट रेणुकूट रेल लाइन के पक्ष को मजबूती प्रदान करते हैं लेकिन बरवाडीह के फेर में अंबिकापुर से रेल लाइन विस्तार का प्रस्ताव लंबित पड़ा है। राज्य वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र पांडेय ने अंबिकापुर -रेणुकूट रेल लाइन का खुला समर्थन किया है। उन्होंने सर्वे रिपोर्ट के आधार पर कहा है कि इसे मंजूरी दी जानी चाहिए।

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अंबिकापुर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए वीरेंद्र पांडेय ने कहा कि रेणुकूट रेल लाइन के लिए छत्तीसगढ़ विधानसभा में अशासकीय संकल्प पारित किया जा चुका है। अब गेंद छत्तीसगढ़ सरकार के पाले में है। छत्तीसगढ़ सरकार की जबाबदारी है कि उनके विधानसभा में पारित रेणुकूट रेल लाइन के प्रस्ताव को स्वीकृति दिलाएं।

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राज्य वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र पांडेय ने कहा कि बरवाडीह रेल लाइन का 12 बार सर्वे हो चुका है। हर बार नकारात्मक रिपोर्ट आई है। वर्तमान समय की जरूरत रेणुकूट रेल लाइन है लेकिन इस अच्छी योजना को पलीता लगाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्यप्रदेश के सांसद भी चाहते हैं कि इस रेल लाइन का निर्माण हो। यह रेल लाइन शिक्षा, रोजगार, व्यापार के साथ धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा। उन्होंने कहा कि रेल संघर्ष समिति से जुड़े लोग आने वाले समय में ओडिसा के मुख्यमंत्री से भी मिलेंगे। ओडिसा का भी साथ मिलना तय है क्योंकि इस रेल लाइन से पुरी, बनारस, प्रयागराज, अयोध्या सब जुड़ जाएंगे।

पांडेय ने कहा कि बरवाडीह की तुलना में रेणुकूट रेल लाइन कम दूरी और कम लागत की है। पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी रेणुकूट सर्वथा उपयुक्त है। इस लाइन में सिर्फ 14 किमी का वन क्षेत्र पड़ रहा है जबकि बरवाडीह रेल लाइन में सघन वन और चार अभयारण्य है। इस क्षेत्र में फारेस्ट क्लियरेंस मिलना भी असंभव है। दुराग्रह छोड़कर छत्तीसगढ़ सरकार रेणुकूट को प्राथमिकता में लाए। बरवाडीह के बजाय रेणुकूट को साथ दें।

सेवानिवृत्त प्राचार्य दिवाकर शर्मा ने कहा कि बरवाडीह का पहले से सर्वे हो रहा है इसलिए उसे प्राथमिकता देना व्यवहार्यता नहीं है। सभी स्थितियों में रेणुकूट रेललाइन जनभावनाओं के अनुरूप और लाभदायक है। उन्होंने कहा कि बरवाडीह रेल लाइन को 2013-14 में इस शर्त पर बजट में शामिल किया गया था कि छतीसगढ़ और झारखंड सरकार निश्शुल्क जमीन उपलब्ध कराएगी और कोल इंडिया निवेश करेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

शर्मा ने आगे कहा कि कोल इंडिया इस प्रस्ताव से सहमत नहीं है। क्योंकि कोल इंडिया की खदानें इस क्षेत्र में नहीं है और न ही कोल ब्लाक है। रेणुकूट रेल लाइन हर स्थिति में लाभप्रद है। चर्चा के दौरान रेल संघर्ष समिति से जुड़े मुकेश तिवारी, आलोक तिवारी भी उपस्थित थे।

तो कोरबा से अंबिकापुर होते जुड़ जाएगा रेणुकूट

रेल मंत्रालय द्वारा अंबिकापुर से कोरबा तक नई रेललाइन निर्माण के लिए अंतिम सर्वे के लिए राशि के प्रविधान से भी कोरबा से अंबिकापुर होते रेणुकूट रेललाइन निर्माण को बल मिल रहा है। यह सर्वे चल भी रहा है। यह कई वर्ष पुरानी मांग है। इस मांग को लेकर सरगुजा क्षेत्र रेल संघर्ष समिति के बैनर तले क्षेत्रवासियों द्वारा रेणुकूट से अंबिकापुर तक पदयात्रा भी की जा चुकी है। छत्तीसगढ़ विधानसभा में अंबिकापुर-रेणुकूट रेल लाइन का संकल्प सर्वसम्मति से पारित भी हुआ है। बरवाडीह, आजादी के पहले की परियोजना थी। रेणुकूट हर परिस्थिति में ज्यादा उपयोगी रेल लाइन है।

रेणुकूट रेल लाइन

0 दूरी 152.30 किमी
0 लागत8217.97 करोड़
0 ईआइआरआर -19.50 प्रतिशत
0 एफआइआरआर – 5.51 प्रतिशत
0 डीपीआर जमा – अक्टूबर 2023

बरवाडीह रेल लाइन

0 दूरी 199.98 किमी
0 लागत -9030.43 करोड़
0 ईआइआरआर -3.81 प्रतिशत
0 एफआइआरआर – (-) 0.52 प्रतिशत
0 डीपीआर जमा – जुलाई 2023

( नोट : ईआइआरआर इकोनामिकल इंटरनल रेट आफ़ रिटर्न, एफआइआरआर फाइनेंशियल इंटरनल रेट आफ रिटर्न )

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