SIR News : विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की खबरों के बीच निर्वाचन आयोग की ओर से महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण सामने आया है। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि बिहार समेत कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR से जुड़े आदेशों को मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने मिलकर मंजूरी दी थी। आयोग ने इन फैसलों को पूर्ण आयोग की सर्वसम्मत प्रक्रिया का परिणाम बताया है।
बिहार और असम से जुड़े आदेशों को भी मिली मंजूरी
सूत्रों के मुताबिक, बिहार के लिए जारी SIR आदेश, असम से संबंधित आदेश और अन्य राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जारी किए गए आदेशों को पूर्ण आयोग ने मंजूरी दी थी। जानकारी के अनुसार, अलग-अलग चरणों में 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तथा बाद में 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े SIR आदेशों को आयोग के स्तर पर स्वीकृति दी गई।
नए मतदाताओं के लिए घोषणा फॉर्म की व्यवस्था
SIR से संबंधित प्रक्रिया में नए मतदाताओं के पंजीकरण को लेकर घोषणा फॉर्म का भी प्रावधान सामने आया है। इसे नए मतदाता द्वारा Form-6 के साथ जमा किया जाना है। चुनाव आयोग के अनुसार, इस व्यवस्था का उद्देश्य पंजीकरण प्रक्रिया को व्यवस्थित करना और मतदाता से संबंधित आवश्यक जानकारी को एक ही प्रक्रिया के माध्यम से प्राप्त करना है। आयोग ने हाल में यह भी स्पष्ट किया कि अतिरिक्त घोषणा फॉर्म जमा करने वाले आवेदकों से इसके साथ अलग से कोई अन्य दस्तावेज अनिवार्य नहीं किया गया है।
SIR को लेकर उठे सवालों के बाद बढ़ा विवाद
SIR प्रक्रिया को लेकर विवाद उस समय और बढ़ गया, जब द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट में चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों का हवाला दिया गया। रिपोर्ट में दावा किया गया कि दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले करीब 10 महीनों में कई फैसलों पर आपत्ति दर्ज कराई थी। इनमें नए मतदाताओं के Form-6 में बदलाव और मतदाता सूची से जुड़े कुछ निर्णय शामिल बताए गए।
Form-6 में नए बदलाव को लेकर भी उठे सवाल
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ECINET पर उपलब्ध ऑनलाइन Form-6 में एक अतिरिक्त घोषणा वाला हिस्सा जोड़ा गया था। इसमें आवेदक से पूछा जाता है कि उसका या उसके माता-पिता का नाम पिछली SIR मतदाता सूची में दर्ज था या नहीं। यदि नाम मौजूद होने की जानकारी दी जाती है तो विधानसभा क्षेत्र, बूथ और क्रम संख्या जैसी जानकारी भी मांगी जाती है। इस बदलाव को लेकर चुनाव आयोग के भीतर आपत्तियां दर्ज होने की रिपोर्ट सामने आई थी।
चुनाव आयोग ने मतभेदों को बताया सामान्य प्रक्रिया
इन रिपोर्टों के बाद चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक स्पष्टीकरण में कहा कि किसी बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग सुझाव और टिप्पणियां deliberation यानी विचार-विमर्श की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं। आयोग के अनुसार, अंतिम निर्णय पूर्ण आयोग की प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं। ECI ने कहा कि पिछले एक साल में उसके सभी फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से लिए गए हैं।
कानून और आयोग के निर्देशों के अनुसार काम का दावा
निर्वाचन आयोग ने यह भी कहा है कि उसके सभी कार्य संबंधित कानूनों और आयोग द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप किए गए हैं। SIR के संबंध में आयोग पहले भी संविधान के अनुच्छेद 324 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 समेत संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत अपनी शक्तियों का उल्लेख कर चुका है।
SIR प्रक्रिया पर आगे भी बनी रहेगी नजर
SIR को लेकर आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया और मतदाता पंजीकरण से जुड़े बदलावों पर राजनीतिक दलों तथा नागरिक संगठनों की नजर बनी हुई है। एक ओर आयोग अपने फैसलों को सर्वसम्मत और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप बता रहा है, वहीं दूसरी ओर सामने आई रिपोर्टों में कुछ आंतरिक आपत्तियों का उल्लेख किया गया है। ऐसे में SIR से जुड़े आगामी आदेश और मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया इस पूरे विवाद में महत्वपूर्ण बनी हुई है।
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