Ambikapur Cyber Crime
Ambikapur Cyber Crime: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले की पुलिस ने तकनीकी अपराधों के खिलाफ एक निर्णायक सफलता हासिल की है। अंबिकापुर में सक्रिय एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने ‘म्यूल अकाउंट’ (Mule Accounts) के जरिए करोड़ों रुपये के अवैध लेनदेन में शामिल गिरोह के तीन शातिर सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह संगठित तरीके से भोले-भले युवाओं को बरगलाकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था और फिर उन खातों का इस्तेमाल देशभर में की गई ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए करता था। आरोपियों के पास से मिले बैंकिंग दस्तावेजों की भारी खेप ने पुलिस को भी चौंका दिया है।
यह पूरी कार्रवाई डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा राजेश कुमार अग्रवाल के कड़े दिशा-निर्देशों और नगर पुलिस अधीक्षक राहुल बंसल के सफल नेतृत्व में अंजाम दी गई। 19 मार्च को गांधीनगर थाना पुलिस को पुख्ता मुखबिर से सूचना मिली कि बनारस रोड स्थित एसबीआई बैंक के पास एक किराए के मकान में कुछ संदिग्ध युवक अवैध बैंकिंग गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी निरीक्षक प्रवीण द्विवेदी की टीम ने बिना समय गंवाए मौके पर छापेमारी की। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने आरोपियों को संभलने का मौका भी नहीं दिया और मुख्य सरगना राहुल गुप्ता को हिरासत में ले लिया गया।
पुलिस ने जब मुख्य आरोपी राहुल गुप्ता (20 वर्ष) के ठिकाने की तलाशी ली, तो वहां से साइबर अपराध का एक पूरा ‘कंट्रोल रूम’ जैसा सामान बरामद हुआ। पुलिस टीम ने मौके से 101 बैंक पासबुक, 35 एक्टिव एटीएम कार्ड, 28 चेकबुक, 3 स्मार्टफोन और 3 सिम कार्ड जब्त किए। इसके अलावा, कमरे से 1 लाख 36 हजार रुपये नगद भी बरामद हुए, जो ठगी के कमीशन के रूप में रखे गए थे। इतनी बड़ी संख्या में एटीएम और पासबुक का मिलना इस बात का प्रमाण है कि यह गिरोह बहुत बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहा था।
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपने काम करने के तरीके (Modus Operandi) का खुलासा किया। गिरोह के सदस्य स्थानीय बेरोजगार युवाओं को थोड़े से कमीशन का लालच देकर उनके आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों के जरिए बैंक खाते और सिम कार्ड निकलवाते थे। इन खातों को ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है क्योंकि इनका इस्तेमाल केवल काली कमाई को सफेद करने या एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। एक बार खाता खुल जाने के बाद, आरोपी पासबुक और एटीएम अपने कब्जे में ले लेते थे और मुख्य साइबर अपराधियों को ये खाते उपलब्ध कराते थे, जिससे असली अपराधी की पहचान छिपी रहे।
मुख्य आरोपी राहुल गुप्ता की निशानदेही पर पुलिस ने उसके दो अन्य साथियों, विकास किर्तनिया (26 वर्ष) और आशुतोष शर्मा (20 वर्ष) को भी दबोच लिया। इन तीनों ने मिलकर अंबिकापुर और आसपास के क्षेत्रों में कई युवाओं को अपने जाल में फंसाया था। आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है और पुलिस ने इनके इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए हैं, जिनसे कई महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत मिलने की उम्मीद है।
गांधीनगर पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 317(4) और 61(2) के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया है। पुलिस का मानना है कि इस नेटवर्क के तार अंतर्राज्यीय ठगों से जुड़े हो सकते हैं। एसएसपी सरगुजा ने कहा है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और इस गिरोह से जुड़े अन्य संपर्कों और मददगारों की तलाश के लिए टीमें रवाना की गई हैं। पुलिस ने आम जनता से भी अपील की है कि वे किसी के झांसे में आकर अपना बैंक खाता या एटीएम किराए पर न दें।
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