Delhi Riots Case
Delhi Riots Case: दिल्ली दंगों की कथित साजिश के मामले में लंबे समय से जेल में बंद शरजील इमाम शुक्रवार, 20 मार्च को तिहाड़ जेल से बाहर आ गए हैं। अदालत ने मानवीय आधार पर विचार करते हुए उन्हें 10 दिनों की अंतरिम जमानत प्रदान की है। दरअसल, 9 मार्च को अदालत ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया था। शरजील को यह राहत विशेष रूप से उनके भाई के विवाह समारोह में शामिल होने और उनकी बीमार मां की देखभाल करने के लिए दी गई है। सालों बाद जेल की सलाखों से बाहर आने पर उनके समर्थकों और परिवार में राहत की लहर देखी जा रही है।
शरजील इमाम को लेने तिहाड़ जेल पहुंचे उनके भाई ने मीडिया से बात करते हुए भावुक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि शरजील का इस समय परिवार के साथ होना अत्यंत आवश्यक है। उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं, ऐसे में शरजील ही परिवार के लिए एक अभिभावक (गार्जियन) की भूमिका निभाते हैं। भाई ने बताया कि शरजील सालों बाद अपनी मां से मिलेंगे, जो लंबे समय से बीमार चल रही हैं। उन्होंने न्यायपालिका का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे बिहार में होने वाले वैवाहिक कार्यक्रमों के दौरान अदालत द्वारा लगाई गई सभी शर्तों का पूरी निष्ठा से पालन करेंगे।
शरजील इमाम के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की शुरुआत जनवरी 2020 में हुई थी। दिल्ली पुलिस ने उन्हें 28 जनवरी, 2020 को बिहार के जहानाबाद से गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरोध के दौरान भड़काऊ भाषण दिए थे। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने उन पर फरवरी 2020 में दिल्ली में हुई भीषण सांप्रदायिक हिंसा की साजिश रचने का आरोप लगाया। इसके बाद उन पर कठोर कानून ‘गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम’ (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया।
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा भारत के हालिया इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में से एक थी। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी के विरोध प्रदर्शनों के बीच शुरू हुई यह हिंसा जल्द ही बेकाबू हो गई थी। इस दंगों में 50 से अधिक लोगों की जान चली गई थी और 700 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। दिल्ली पुलिस का दावा है कि शरजील इमाम और कई अन्य कार्यकर्ताओं ने मिलकर पूर्व-नियोजित तरीके से इस हिंसा की पटकथा लिखी थी। हालांकि, शरजील के वकील इन आरोपों को लगातार खारिज करते रहे हैं।
शरजील इमाम पिछले चार सालों से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में हैं। इस दौरान उन्होंने कई बार नियमित जमानत के लिए निचली अदालत से लेकर दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया। हालांकि, आरोपों की गंभीरता और यूएपीए की धाराओं के कारण उनकी अधिकांश जमानत याचिकाएं अब तक खारिज होती रही हैं। यह पहली बार है जब उन्हें किसी पारिवारिक कार्यक्रम के लिए 10 दिनों की अल्पकालिक राहत मिली है। 10 दिन की अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें पुनः जेल प्रशासन के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा।
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