US Palestine Action: अमेरिका और फिलिस्तीन के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की आगामी बैठक से ठीक पहले अमेरिका ने फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास और उनके उच्च अधिकारियों के वीजा रद्द कर दिए हैं। इस फैसले से फिलिस्तीन की राजनयिक उपस्थिति पर गंभीर असर पड़ा है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिका की आलोचना तेज हो सकती है।

अमेरिका ने क्यों लिया यह फैसला?
अमेरिकी विदेश विभाग ने इस कदम को “सुरक्षा कारणों” से उठाया हुआ बताया है। हालांकि, विश्लेषक इसे राजनीतिक दवाब के रूप में देख रहे हैं। अमेरिका ने इस बार फिलिस्तीन को UNGA में भाग लेने के लिए वीजा जारी नहीं किए, बल्कि पहले से जारी वीजा भी रद्द कर दिए हैं।

गौरतलब है कि अमेरिका को संयुक्त राष्ट्र से जुड़े प्रतिनिधियों को वीजा देना होता है, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय न्यूयॉर्क में स्थित है। हालांकि, “राष्ट्रीय सुरक्षा” के आधार पर अमेरिका को इस नियम से छूट प्राप्त है।
वर्चुअल जुड़ेंगे राष्ट्रपति महमूद अब्बास
अमेरिका की ओर से वीजा न मिलने के बावजूद फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास अब वर्चुअल माध्यम से UNGA मीटिंग में हिस्सा लेंगे। अमेरिकी प्रशासन ने वर्चुअल भागीदारी की अनुमति दे दी है, ताकि फिलिस्तीन की बात सुनी जा सके।
भारत समेत 180 देश फिलिस्तीन के पक्ष में
हाल ही में भारत ने संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन को पूर्ण सदस्यता दिए जाने के पक्ष में मतदान किया था। फिलिस्तीन को इस प्रस्ताव पर करीब 180 देशों का समर्थन मिला, जबकि अमेरिका और इजराइल ने इसका विरोध किया था। इस घटनाक्रम के बाद अमेरिका के इस वीजा निर्णय को राजनीतिक दबाव की रणनीति माना जा रहा है।
यह पहली बार नहीं है
यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने फिलिस्तीनी नेताओं को UNGA में भाग लेने से रोका हो। 1988 में भी अमेरिका ने फिलिस्तीनी नेता यासिर अराफात को वीजा देने से इनकार किया था, जिसके चलते UN को जेनेवा में विशेष सत्र बुलाना पड़ा था। उस समय अमेरिका के कदम की भी वैश्विक स्तर पर आलोचना हुई थी।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया का इंतजार
अमेरिका के इस निर्णय पर फिलहाल संयुक्त राष्ट्र की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन कई मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने इस पर चिंता व्यक्त की है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक और कूटनीतिक बहस का बड़ा विषय बन सकता है।
अमेरिका का यह कदम न केवल फिलिस्तीन के साथ उसके संबंधों में नई दरार डाल सकता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी तटस्थता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी सवाल खड़े कर सकता है। राष्ट्रपति महमूद अब्बास की वर्चुअल उपस्थिति यह तो सुनिश्चित करेगी कि फिलिस्तीन की आवाज UNGA में गूंजे, लेकिन भौतिक अनुपस्थिति एक बड़ा राजनीतिक संकेत भी मानी जा रही है।
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