India Pakistan Tension: भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बीच पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार के बार-बार बदलते बयानों ने कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख के बाद पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ती नजर आ रही हैं।

ट्रंप के टैरिफ के बाद बदल रहा वैश्विक समीकरण
हाल ही में अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया, जिसके बाद वैश्विक राजनीति में नए रणनीतिक गठजोड़ की शुरुआत हो गई है। पाकिस्तान, जो दशकों से आतंकियों का पनाहगार माना जाता रहा है, इस नए समीकरण में खुद को अलग-थलग पा रहा है। इस स्थिति से बचने के लिए वह बार-बार अमेरिका को खुश करने की कोशिश कर रहा है।

पाकिस्तान की दोहरी नीति उजागर
इशाक डार ने एक तरफ भारत से सम्मानजनक कंपोजिट डायलॉग की गुजारिश की, तो दूसरी तरफ भारतीय सेना के खिलाफ बयानबाज़ी कर डाली। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान बातचीत के लिए गिड़गिड़ाएगा नहीं। यह विरोधाभास खुद उनकी पूर्व टिप्पणियों से मेल नहीं खाता।
डार ने पहले स्वीकार किया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय हमलों से घबराकर पाकिस्तान ने ही सीजफायर की अपील की थी। वहीं, अब वे कह रहे हैं कि पाकिस्तान ने युद्धविराम में अमेरिका या किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं मांगी थी, जो ट्रंप के दावों से बिल्कुल उलट है।
ट्रंप ने जताई नाराज़गी
पाकिस्तानी विदेश मंत्री के इस पलटी मार बयान के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त नाराज़गी जताई। ट्रंप का कहना है कि उनके हस्तक्षेप के कारण ही भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध टला और दोनों देशों के बीच ट्रेड डील की संभावना बन पाई।
भारत का साफ रुख
भारत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान से कोई भी बातचीत तभी संभव है जब वह आतंकवाद पर ठोस कार्रवाई करे और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) के मुद्दे पर गंभीर चर्चा के लिए तैयार हो।
इशाक डार के परस्पर विरोधी बयानों और ट्रंप की प्रतिक्रिया ने एक बार फिर पाकिस्तान की विदेश नीति को कटघरे में खड़ा कर दिया है। भारत अपने रुख पर कायम है, और अमेरिका के सख्त रुख से साफ है कि पाकिस्तान को अब अपनी नीति पर पुनर्विचार करना होगा।
Read More : Maratha Reservation: मराठा आरक्षण आंदोलन, मनोज जरांगे की भूख हड़ताल का दूसरा दिन, मुंबई में समर्थन तेज










