Amit Shah in Chhattisgarh
Amit Shah in Chhattisgarh: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपने तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास पर रायपुर पहुंच चुके हैं। उनके इस दौरे को लेकर प्रदेश की सियासत पूरी तरह गरमा गई है। विपक्षी दल कांग्रेस ने शाह के बस्तर दौरे को लेकर केंद्र सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है और बस्तर की जनता की ओर से 9 महत्वपूर्ण सवाल पूछे हैं। कांग्रेस का कहना है कि अमित शाह ने खुद 31 मार्च 2026 तक बस्तर से नक्सलवाद खत्म करने की जो समयसीमा (डेडलाइन) तय की थी, उसमें अब केवल 52 दिन शेष रह गए हैं। ऐसे में जनता यह जानना चाहती है कि क्या सरकार इस वादे पर अब भी कायम है या फिर विफलता को छिपाने के लिए इसे आगे बढ़ाने की नई तैयारी की जा रही है।
कांग्रेस ने अपने सवालों की सूची में बस्तर के संसाधनों और आदिवासियों के अधिकारों को प्रमुखता दी है। पार्टी ने पूछा कि आखिर एनएमडीसी (NMDC) का मुख्यालय अब तक हैदराबाद में क्यों है, जबकि लौह अयस्क बस्तर की धरती से निकलता है। मुख्यालय को जगदलपुर स्थानांतरित कर स्थानीय युवाओं को रोजगार देने में देरी क्यों की जा रही है? इसके साथ ही कांग्रेस ने उद्योगपतियों के प्रवेश पर ‘गारंटी’ मांगी है। पार्टी का आरोप है कि स्थानीय लोगों की मर्जी के बिना बड़े उद्योगपतियों को बस्तर सौंपने की तैयारी है, जिस पर गृह मंत्री को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। आदिवासियों की आस्था के प्रतीक ‘नंदराज पहाड़’ की लीज रद्द करने की अधिसूचना में हो रही देरी पर भी सवाल खड़े किए गए हैं।
बस्तर की अर्थव्यवस्था और अस्मिता से जुड़े नगरनार स्टील प्लांट को लेकर भी कांग्रेस ने अमित शाह से जवाब मांगा है। कांग्रेस ने पूछा कि क्या केंद्र सरकार यह लिखित आश्वासन देगी कि इस संयंत्र का विनिवेश नहीं किया जाएगा और इसे निजी हाथों में नहीं बेचा जाएगा? इसके अलावा, बैलाडीला और कांकेर की खदानों को निजी समूहों को सौंपे जाने के पीछे के तर्कों पर भी सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस का कहना है कि बस्तर की जनता सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस जमीनी कार्रवाई और अपनी संपत्तियों की सुरक्षा का भरोसा चाहती है।
संसदीय और वैधानिक मुद्दों को उठाते हुए कांग्रेस ने वन अधिकार कानून 2006 में किए गए संशोधनों पर सवाल उठाए हैं, जिससे आदिवासियों के अधिकार कमजोर होने का दावा किया गया है। साथ ही, राज्य विधानसभा से पारित आरक्षण संशोधन विधेयक के राजभवन में लंबित होने पर भी गृह मंत्री से जवाब मांगा गया है। इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर, दल्लीराजहरा-जगदलपुर रेललाइन का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस ने याद दिलाया कि 2021 में पूरी होने वाली यह योजना आज 2026 तक भी अधूरी क्यों है।
अमित शाह का यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब 31 मार्च 2026 की ‘नक्सल मुक्त बस्तर’ की डेडलाइन बहुत करीब है। शाह न केवल सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करेंगे, बल्कि बस्तर पंडुम महोत्सव के समापन समारोह में भी शामिल होंगे। पिछले दो महीनों में यह उनका दूसरा दौरा है, जो बस्तर की संवेदनशीलता और केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाता है। कांग्रेस का आरोप है कि यह दौरा केवल औपचारिकता है, जबकि बस्तर की जनता मूलभूत सुविधाओं और विशेष आर्थिक पैकेज के इंतजार में है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अमित शाह अपनी बैठकों या सार्वजनिक संबोधन में इन 9 सवालों का कोई जवाब देते हैं।
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